बहुआयामी परिवर्तन का एक संक्षिप्त विवरण

बहुआयामी परिवर्तन क्या है?

एक किसान अपनी उपज बढ़ाने के लिए क्या करेगा? एक दुकानदार अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए क्या करेगा? एक मैनेजर उत्पादन बढ़ाने के लिए क्या करेगा? किसान खेत में से घास-पात निकालेगा| दुकानदार कभी-कभी बिकने वाली वस्तुओं के बदले जल्दी बिक जाने वाला सामान शेल्फ पर सजाएगा| मैनेजर कार्यकुशल कर्मचारियों को नौकरी देगा, और अकुशल लोगों को निकाल बाहर करेगा|

ये उदाहरण हमारे जीवन में किस प्रकार से लागू होते हैं? हमें भी हानिकारक या काम में न आने वाली गतिविधियों को हटाना पड़ेगा| तभी काम की गतिविधियों के लिए समय, शक्ति, और संसाधन हमारे पास बचेंगे| बेकार या हानिकारक गतिविधियों को हटाकर, लाभकारी गतिविधियों को बढ़ाना ही बहुआयामी परिवर्तन का उद्देश्य हैं| व्यवस्थित ढंग से, इस उद्देश्य को प्राप्त कर लेना ही बहुआयामी परिवर्तन है|

गतिविधियों का अर्थ?

हम अपनी गतिविधियों का सबसे विस्तृत अर्थ लेकर चलेंगे. और गतिविधियों के अंतर्गत हम अपने सभी कामों को शामिल करेंगे, जो हमने पिछले चौबीस घंटे में, पिछले सप्ताह में, या पिछले महीने में किए थे―उदाहरण के लिए सोना, सांस लेना, खाना-पीना, सोचना, चलना, चिंतित होना, गुस्सा होना, टीवी देखना, और बाकी के सभी सामान्य काम जिनमें यौन क्रियाएं भी शामिल होंगी| इस प्रकार से, हम सब अपने आप में अनोखे हैं, लेकिन हम सभी की गतिविधियाँ लगभग एक जैसी हैं|

शांति से जुड़ी, सामंजस्य से जुड़ी, और विकास से जुड़ी: हमारी तीन प्रकार की गतिविधियाँ

हमारी समस्त क्रियाओं या गतिविधियों को इन तीन भागों में बांटा जा सकता है: शांति से जुड़ी, सामंजस्य से जुड़ी, और विकास से जुड़ी गतिविधियाँ| शांति से जुड़ी गतिविधियाँ हमें शांत अथवा अशांत करने का काम करती हैं―जैसे कि सोना, खाना-पीना, टीवी देखना, चिंतित होना, गुस्सा करना, और उदास होना| आत्महत्या का प्रयास भी शांति से जुड़ी गतिविधियों में ही शामिल होगा| सामंजस्य से जुड़ी गतिविधियों के द्वारा हम जुड़ते हैं या समन्वय करते हैं| हम अपने परिवार से, समाज से, और पूरे विश्व से जुड़ते हैं| हम पर्यावरण से जुड़ते हैं| हम अपनी कमजोरियों और बीमारियों के साथ भी समझौता करते हैं| उदाहरण के लिए हमारा जीवन-साथी गुस्सैल हो सकता है, लेकिन घर में शांति बनाए रखने के लिए हम चुप रह जाते हैं| हमें मीठा पसंद है, लेकिन मधुमेह को नियंत्रित रखने के लिए इससे दूरी बनाकर रखनी है| हमारा स्थानान्तरण हो गया है, और परिवार से अलग रहना पड़ेगा, लेकिन नौकरी तो करनी ही है| तीसरे प्रकार की गतिविधियाँ विकास से जुड़ी हैं| योग्यता बढ़ाने के लिए, हम पढ़ते-लिखते हैं और डिग्री हासिल करते हैं| नई भाषा सीखते हैं| कंप्यूटर के प्रोग्राम सीखते हैं| ये सभी विकास से जुड़ी गतिविधियाँ हैं|

गतिविधियों और आवश्यकताओं के बीच का अंतर

गतिविधियाँ जरूरतों को पूरा करती हैं| इसलिए गतिविधियाँ औजारों की तरह हैं| हमें अच्छे किस्म के औजार चाहिये, इसी प्रकार से हमारे लिए अच्छी गतिविधियाँ भी जरूरी हैं|

गतिविधियों की गुणवत्ता बढ़ाने का अर्थ

हमें मुख्य रूप से शांति से जुड़ी गतिविधियों (शां) की गुणवत्ता पर ध्यान देना है| अच्छी गुणवत्ता वाली शांति से जुड़ी गतिविधियाँ अपनाकर, हम इन गतिविधियों की जरूरत को कम कर देंगे, और सामंजस्य (सा) तथा विकास से जुड़ी गतिविधियों (वि) की ओर अधिक ध्यान दे सकेंगे| चित्र 1 में इसे समझाने की कोशिश की गई है।

चित्र 1: गतिविधियों की गुणवत्ता बढ़ाने का अर्थ और उसका संभावित प्रभाव।

इस चित्र में (‘क’, ‘ख’, और ‘ग’) तीन प्रकार का गतिविधियों का संतुलन दिखाया गया है| ‘क’ में शांति से जुड़ी गतिविधियों की बहुतायत है| ‘ग’ में विकास और सामंजस्य से जुड़ी गतिविधियों की बहुतायत है; जबकि ‘ख’ में तीनों प्रकार की गतिविधियाँ एक बराबर हैं| अब एक विद्यार्थी का उदाहरण लेते हैं| विद्यार्थी आम दिनों में ‘ख’ वाली स्थिति में रहेगा| परीक्षा से पहले, वह ‘ग’ वाली स्थिति में आ जाएगा, और परीक्षा के तुरंत बाद ‘क’ वाली स्थिति में पहुँच जाएगा| ‘ग’ वाली स्थिति में वह पढ़ने पर पूरा ध्यान केंद्रित करेगा, और उसकी नींद और भूख भी गायब हो जाएगी| ‘क’ वाली स्थिति में वही विद्यार्थी घूमेगा-फिरेगा, सिनेमा देखेगा, और आनंद करेगा| इसे हम गतिविधियों में आने वाला रोजमर्रा का बदलाव कहेंगे|

परन्तु हमने ऐसे विद्यार्थी भी देखे होंगे जो परीक्षा से पहले चिन्ता की स्थिति में पहुँच जाते हैं और पढ़ाई नहीं कर पाते हैं| यह ‘क’ वाली स्थिति है, और इसे हम गतिविधियों का असंतुलन कहेंगे| इस असंतुलन को दूर करने के लिए बहुआयामी परिवर्तन चाहिए, जो विद्यार्थी को समय-समय पर ‘ग’ वाली स्थिति अंगीकार करने में सहायक होगा| जैसा की चित्र-1 में दिखाया गया है|

शांति और स्थिरता पाने का एक गुलदस्ता

हम शांति से जुड़ी गतिविधियों के चुनाव में गलती करते हैं| उदाहरण के लिए, हम चिन्ता और उदासी से घिरे रहते हैं, जबकि हमें खुश रहने की जरूरत है| हम तम्बाकू का प्रयोग करते हैं, जिससे थोड़े समय के लिए तलब कम होती है| लेकिन तलब फिर से बढ़ जाती है, और हमें फिर से तम्बाकू का प्रयोग करना पड़ता है| तलब कम करना ही हमारी सबसे बड़ी जरूरत बन जाती है| धीरे-धीरे शांति से जुड़ी गतिविधियाँ बढ़ जाती हैं, और बाकी की गतिविधियाँ कम होने लगती है| कुल मिलाकर हम असंतुलन की तरफ बढ़ने लगते हैं| इस असंतुलन के कारण कार्य कुशलता कम होती है, हिंसा और अपराध बढ़ते हैं, और अनेक बीमारियाँ पैदा हो सकती हैं|

शांति से जुड़ी, अच्छे प्रकार की गतिविधियों को अपनाकर हम शांति से जुड़ी गतिविधियों की जरूरत कम कर सकते हैं| इन अच्छी गतिविधियों को, हम शांति और स्थिरता पाने का एक गुलदस्ता कहेंगे| इस गुलदस्ते की गतिविधियाँ, अपनी जरूरत को अपने आप कम करने का काम करती हैं, जिससे शांति से जुड़ी गतिविधियों की जरूरत कम हो जाती है, और बाकी की गतिविधियों को फलने-फूलने का अवसर मिलने लगता है|

नयापन नहीं है, लेकिन फिर भी अनोखा

विचारों और भावनाओं पर नियंत्रण, सांस पर नियंत्रण, तनाव-मुक्ति, शारीरिक व्यायाम, तम्बाकू का निषेध — यही कुछ ऊपर बताए गए गुलदस्ते की गतिविधियों के कुछ उदाहरण हैं, और इन सब में कुछ भी नयापन नहीं है| बहुआयामी परिवर्तन इन्हीं सदियों पुराने और घिसे-पिटे तरीकों को अपनाता हुआ दिखाई देगा| इसलिए पहली नजर में बहुआयामी परिवर्तन में कोई नवीनता नहीं है|लेकिन बहुआयामी परिवर्तन उँगलियों के उन निशानों की तरह है,जिनमें कोई नवीनता नहीं है, फिर भी हर व्यक्ति के निशान अनोखे होते हैं।

इन घिसे-पिटे तरीकों को छोड़ दें तो बहुआयामी परिवर्तन और सदियों से चाले आ रहे रास्तों के बीच कुछ भी समानता नहीं है| बहुआयामी परिवर्तन बिलकुल अलग है| बहुआयामी परिवर्तन अपनाने वाला व्यक्ति , यह अनोखापन कुछ घंटों या कुछ दिनों में महसूस कर सकता है|

अनोखा होने का कारण समझना आसान है ... सारी क्रियाओं को सोची-समझी रणनीति के अनुसार एकाएक बदल डालना

बहुआयामी परिवर्तन को अंग्रेजी में multiple activities change intervention कहते हैं| इसका अर्थ बहुत सारी क्रियाओं को एक साथ बदलना| बहुआयामी परिवर्तन के दौरान हम अपनी रोजाना की सामान्य क्रियाओं और कार्यों में, सोची समझी रणनीति के अनुसार बदलते हैं| यहाँ रणनीति महत्वपूर्ण है—इसके साथ ही चौबीस घंटे की सारी क्रियाओं को एक साथ और एकाएक बदलना भी उतने ही महत्व का है, जिसके कारण ही हम एक बड़े और मनचाहे परिवर्तन की ओर बढ़ सकते हैं|

बहुआयामी परिवर्तन से हम क्या आशा कर सकते हैं?

बहुआयामी परिवर्तन द्वारा हम अनेक बीमारियों से मुकाबला कर सकते हैं, और कुछ बीमारियों से छुटकारा भी पा सकते हैं―जैसे कि अवसाद और दूसरे मानसिक रोग, एंजाइना, अस्थमा, और कमर-दर्द| हम तम्बाकू और दूसरे नशे की आदतों से छुटकारा पा सकते हैं, और अपनी कार्य-कुशलता बढ़ाकर आगे बढ़ सकते हैं| विद्यार्थी पढ़ाई में सफलता हासिल कर सकते है। इतना ही नहीं हम अपने पारिवारिक झगड़ों को दूर कर सकते हैं, और संबंधों को मजबूत कर सकते हैं|

ये सभी लाभ जल्दी (कुछ दिनों या सप्ताहों के भीतर) और नियमित रूप से मिलते हैं|


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