तनाव-मुक्ति के लिए आसन

तनाव-मुक्ति के आसन का पहला अनुभव कुछ मिनटों में ही जीवन बदल सकता है| नब्बे वर्ष से ऊपर के, इस व्यक्ति के साथ भी ऐसा ही हुआ|

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वर्ष 1920 में जन्में, श्री सोहनलाल कालरा कुछ वर्ष पहले गिर गए| उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गई, जिसका ऑपरेशन कराना पड़ा| इसके बाद कई महीने गुजर गए, लेकिन कालरा बिस्तर से उठ नहीं पाए| बाथरूम जाना तो दूर, एक कदम भी चल पाना संभव नहीं हो पा रहा था| सारी कोशिशों के बाद, वे निराश हो चुके थे| तनाव-मुक्ति का आसन एक चमत्कार था| वे कुछ ही मिनटों में उठकर चलने फिरने लगे, और पहली बार में ही सीढ़ियां चढ़कर अपने कमरे में गए| सोहनलाल कालरा को एक नया जीवन मिला था|

इस आसन से होने वाले लाभों का परिचय

यह आसन बड़े काम का है। खास तौर पर अगर इसे पैरासिटामौल और सांस के व्यायाम के साथ किया जाए तो इसका लाभ अनेक स्थितियों में लिया जा सकता है—वह भी नियमित रूप से। यहां तक कि स्वयं को तनाव-मुक्त करने के लिए हम इस आसन पर बहुत अधिक निर्भर हो जाते हैं। अब इसके लाभों पर एक नजर डालिए।

  • हमें तुरंत एक बहुत जरूरी काम करना है, और हम इतना अधिक थके हैं कि हमारी उठने की बिलकुल हिम्मत नहीं हो पा रही है। लगता है कि रात भर की नींद के बाद ही हम कुछ कर पाएंगे। अब कल्पना करिए कोई हमें एक आसन बताता है। हम आधे मन से उस आसन को करना शुरू करते हैं। लेकिन केवल आधे घंटे बाद ही हम पूरी ताकत से उस जरूरी काम में जुट जाते हैं।
  • क्या हमें रातभर की नींद के बाद भी सवेरे थकावट लगती है? अगर ऐसा है, तो यह आसन नींद की गुणवत्ता को बढ़ाएगा और रातभर की नींद के बाद थकान का अनुभव होना बंद हो जाएगा।
  • क्या हम अपने जीवन को नियमित नहीं बना पा रहे हैं? यह आसन हमारी स्थिरता और दृढ़ता को बढ़ाएगा, और जीवन को नियमित करने में हमारी मदद करेगा।
  • गर्दन दर्द, कमर-दर्द, और माईग्रेन जैसी बीमारियों को हम काबू कर पाएंगे। बहुआयामी परिवर्तन के लाभों को इस मार्गदर्शिका के शुरू में ही गिनाया गया है। देखें—बहुआयामी परिवर्तन से जुड़े प्रश्न जो अकसर पूछे जाते हैं।

हममें से बहुत से लोग इन लाभों का श्रेय केवल इस आसन को देते हैं—जो बहुआयामी परिवर्तन के अन्य घटकों के मुकाबले इस आसन के महत्व को दिखाता है। क्या हमारे पास इस आसन के लिए समय नहीं है। यह आसन हमारी कार्यकुशलता को बढ़ाता है और हम कम समय में अधिक काम कर पाते हैं। मतलब यह आसन हमारा समय बचाता है—और यह सोचना बेमानी होगा कि हमारे पास इस आसन के लिए समय नहीं है। फिर भी बहुत से लोग शुरू में कहते हैं कि उनके पास इस आसन के लिए समय नहीं है।

इस आसन को पहली बार करते समय ध्यान देने योग्य बातें

इस अध्याय के शुरू में, तनाव-मुक्ति के इस आसन के लाभों का परिचय कराया गया है। पहली बार आसन करते समय, यह जरूरी है कि हमें इन लाभों का अनुभव हो सके। और इस आसन पर हमारा विश्वास कायम हो जाए। इसके लिए यह जरूरी है कि हम इस आसन को ठीक ढंग से करें, और नीचे लिखी बातों का भी ध्यान रखें।

  • पहली बार आसन करते समय, आधे से अधिक लोगों के लिए, लगभग तीस मिनट का समय पर्याप्त होता है। इसका अर्थ हुआ, वे अपने सांस को आसानी से नियंत्रित कर पाते हैं। पैरासिटामौल की एक गोली उनके लिए पर्याप्त होती है। उनका शरीर जल्दी ढीला हो जाता है। तीस मिनट के बाद वे अपना अनुभव ‘अच्छा’ या ‘बहुत अच्छा’ बताते हैं—और ‘अब बिलकुल ठीक लग रहा है,’ ऐसा कहते हैं। ऐसे लोगों को आगे बहुत कुछ समझने की जरूरत नहीं है।
  • बाकी के लोगों को कुछ कठिनाइयां आती हैं। इसलिए पहली बार आसन करते समय का उनका अनुभव एक खट्टे-मीठे दौर से गुजरता है। इस खट्टे-मीठे दौर को पार करने में समय लगता है, जो दो से तीन घंटे का भी हो सकता है। इस दौर को पार करने के लिए पैरासिटामौल की कई गोलियां खानी पड़ सकती हैं (पिछला अध्याय देखें)। सांस को नियंत्रित करने में भी समय लग सकता है (पांचवां अध्याय देखें)।
  • इस आसन को ठीक से न कर पाने का कारण सांस पर नियंत्रण में कठिनाई हो सकती है (पांचवां अध्याय देखें)। इसके अलावा कमर-दर्द और माईग्रेन दो मुख्य कारण हैं, जिनसे पीड़ित व्यक्ति को कठिनाई आएगी। लेकिन वह कठिनाई पार हो जाएगी—इसलिए धैर्य रखकर आसन करते रहें।
  • किसी भी एक्यूट बीमारी से  पीड़ित व्यक्ति भी कठिनाई का अनुभव करेगा—जैसे कि बुखार, खांसी इत्यादि। मुश्किल लग रहा हो तो ऐसी बीमारियां ठीक होने पर ही इस आसन को पहली बार सीखें।

आसन का सही तरीका जानिए और अपनाइए|

बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के लिए, इस आसन को सही ढंग से अपनाना बेहद जरूरी है| इसके बिना बहुआयामी परिवर्तन का लाभ मिल पाना संभव नहीं है|

पहले चरण का यह सबसे लंबा अध्याय है—क्योंकि इस आसन का पूरा लाभ लेने के लिए, इसे करने का सही तरीका अपनाना जरूरी है। इसलिए पहले चरण के दौरान तो हम यहां दिए गए तरीके में कुछ भी परिवर्तन न करें। अगर परिवर्तन करना जरूरी हो तो पहले चरण के बाद ही करें—और उस परिवर्तन का प्रभाव देखें। अपने अनुभवों को विस्तार से बताते हुए, आप हमसे संपर्क कर सकते हैं|

विशेष रूप से पहले चरण के दौरान, आसन करने से पहले कुछ तैयारी जरूरी है। शौच के लिए जाएं और दांत साफ करें। अगर शरीर में धूल या पसीना लगा हो तो नहा लें। ठंडी के दिनों में, अगर संभव हो पाए तो, गरम पानी से स्नान करें। पेटभर भोजन के बाद भी इस आसन को किया जा सकता है—परंतु हाथ-पैरों या सिर में दर्द होने पर, आसन के पहले, कुछ भी न खाएं। हो सके तो मोबाइल बंद कर दें।

किसी की निगरानी में इस आसन को करें|

पहले कुछ दिनों में किसी की निगरानी में आसन करें|हम कहाँ गलती कर रहे हैं, इसका पता आसानी से चल जाएगा| अगर एक घर या संस्था के कई लोग एक साथ बहुआयामी परिवर्तन अपना रहे हों तो वे एक दूसरे की निगरानी कर सकते हैं|

हमारे कपड़े कैसे हों?

कपड़े साफ, ढीले, और मौसम के हिसाब से हों। ठंड महसूस हो रही हो तो चादर, कंबल, या रजाई ओढ़ी जा सकती है

आसन करने की जगह कैसी हो? और अपने साथ में क्या रखें?

एकांत जरूरी है| हो सके तो कमरा बंद कर लें| घर के लोगों को डिस्टर्ब न करने की हिदायत दे दें, और मोबाइल बंद कर दें|

अपने पास पैरासिटामौल की कुछ गोलियां रख लें। पानी का एक गिलास रख लें। एक-दो धुले हुए छोटे तौलिये रख लें। मौसम के हिसाब से चादर या कंबल रख लें। आसन के समय पैरों के पंजे भी ढक लेना महिलाओं को सुरक्षित लग सकता है—इसके लिए कोई कपड़ा ले लें।

कृत्रिम फाइबर के बने दो मुलायम तकिए भी ले लें| तकिए अगर घर में न हों तो खरीद लें| घुटनों या कमर में दर्द होने पर दो से अधिक तकियों की जरूरत हो सकती है, जिन्हें घुटने या कमर को सहारा देने के लिए रखा जा सके|

सांस कैसे लें?

धीमा और नियंत्रित सांस लेना हम पहले ही सीख चुके हैं| यह आसन करते समय, नियंत्रित सांस लेना जरूरी है।

आसन करने के 'तुरंत पहले' पैरासिटामौल का प्रयोग

पहले चरण के दौरान, आसन करने के तुरंत पहले पैरासिटामौल का उपयोग जरूरी है। यहाँ 'तुरंत पहले', इस पर ध्यान देना जरूरी है|नियमित रूप से आसन करने वाले के लिए, एक या आधी गोली लेना पर्याप्त होता है। पहली बार आसन करते समय दो गोली एक साथ लेकर आसन शुरू करें| सिर-दर्द, कमर-दर्द, माइग्रेन जैसी स्थितियों में अधिक मात्रा लेने की जरूरत होती है| कुछ दिन बीतने के बाद, धीरे-धीरे पैरासिटामौल का प्रयोग कम होने और समाप्त होने की संभावना होती है। पहले चरण के बाद अधिकतर लोग इसका प्रयोग बंद कर पाते हैं।

रोशनी पर नियंत्रण: आँखों में रोशनी न जाए

कमरे की सभी रोशनियां बंद कर दें। खिड़कियों के पर्दे गिरा दें। आंखें एक छोटे तौलिये से ढक लें जिससे आंखों में रोशनी का प्रवेश न हो सके। चाहे तो दो तौलिये प्रयोग करिए, पर आंखों में रोशनी न जाये। हलके सूती कपड़े का प्रयोग अच्छा है, जैसे कि रूमाल या छोटा नेपकिन| यहाँ आँखें ढकी हुई नहीं हैं, जो नहीं करना है|

तकिया कैसा हो, और उसे कैसे लगाएँ?

तकिया बहुत मुलायम होना चाहिए। वह न बहुत मोटा हो न बहुत पतला। रुई के बदले सिंथेटिक फाईबर का बना-बनाया तकिया लें। अगर घर में न हो तो जरूरी समझ कर इसे खरीद लें।

तकिया मुलायम होना चाहिए, जो इस प्रकार से मुड़ सके|

ठीक प्रकार के तकिये का प्रयोग बहुत जरूरी है। हमारा तकिया ठीक है, इसका परीक्षण आसान है। तकिये को तीन परत में तहाने की कोशिश करें, और फिर छोड़ दें। अगर तकिया टूटता नहीं है, और अपने आप वापस पहले की स्थिति में आ जाता है, तभी वह हमारे काम का है। ऊपर के चित्र देखें। इन चित्रों में दिखाया गया है कि तकिया मुलायम है|सिर रखने से तकिया दबता है| तकिए को मोड़ा जा सकता है, लेकिन छोड़ने पर तकिया फिर पहली स्थिति में आ जाता है|

छोड़ देने के बाद तकिया अपने आप सीधा हो गया है|

तकिया लगाने का ठीक तरीका जानना भी जरूरी है। तकिये का निचला हिस्सा ऊपर उठा हुआ है, और कंधों को ढक रहा है—और एक गोदी जैसी बनाकर उसमें गरदन को आराम से रख रहा है। आसानी से मुड़ सकने वाले ठीक तरह के तकिये से ही यह संभव है।

थोड़ी देर के बाद अगर कुछ परेशानी हो तो तकिये को कुछ खिसकाकर फिर से आरामदायक स्थिति में लाने की जरूरत हो सकती है। लेकिन निचला किनारा कंधों के ऊपर ही रहना चाहिए। अगर करवट लें तो सीधे होने पर फिर से तकिये को ठीक स्थिति में ले आयें।

तनाव-मुक्त होने के लिए, शरीर के सभी अंगों पर ध्यान देने की जरूरत है|

  • पैरासिटामौल खाकर बिलकुल सीधे लेट जाएं| जैसा बताया गया है, वैसे तकिया लगा लें, और आँखें ढक लें| यह आसन सीधे लेटकर ही करना होता है। पर थक जाने पर एक-दो मिनट के लिए करवट ले सकते हैं—और फिर से सीधे हो सकते हैं। सीधे होने पर तकिया ठीक से लगाना, और आँखें ढक लेना न भूलें।
  • धीमा और नियंत्रित सांस लेना हम पहले ही सीख चुके हैं| सांस के इस व्यायाम को शुरू करें और जारी रखें।
  • कमर ढीली करें| इसके लिए, कमर को थोड़ा सा दायें-बाएँ और ऊपर-नीचे हिलाएँ| कमर ढीली हो जाने के बाद रुक जाएं| अगर कमर फिर से टाईट लगाने लगे तो इस क्रिया को फिर से करें|
  • गरदन पर ध्यान दें। गरदन को थोड़ा ऊंचा करें और फिर तकिये में रख लें—ऐसा कई बार करें। इसके बाद गरदन को दायें से बाएँ और बाएँ से दायें घुमाएँ—और फिर से एक बार तकिये में रख लें। गरदन के नीचे जो तकिए का हिस्सा है, उसे थोड़ा ऊपर उठाएं या नीचे करें, जिससे गरदन को सपोर्ट मिले| गरदन की मांसपेशियां ढीली हो जाने तक इस प्रक्रिया को करते रहें। अगर गर्दन फिर से टाईट लगने लगे तो इस क्रिया को दोहराएँ| तकिए की ठीक स्थिति फिर से देख लें
  • पैर सीधे रखें, और पैरों की अंगुलियां पलंग के नीचे के हिस्से या दीवार इत्यादि को न छूएँ। अगर छू रही हों तो शरीर को थोड़ा ऊपर खिसका लेंपैरों के बीच कुछ दूरी रखें और पंजों को बाहर की ओर झुकाकर ही रखें। ऊपर के चित्र देखें| इस चित्र और इस चित्र में पैर ठीक स्थिति में नहीं हैं|
  • अब लेटे-लेटे इसी प्रकार से पैरों के पंजों को दायें से बाएँ और बाएँ से दायें की ओर घुमाएं पैरों की अंगुलियों को चलाएँ। यह केवल कुछ सैकंड के लिए ही करना है। पैर फिर से टाईट लगने लगें तो इस क्रिया को दोहराएँ|
  • हथेलियों को आराम से जांघों या पेट के ऊपर रख लें। हाथों की अंगुलियों को एक-दूसरे में न फँसाएँ। पेट पर रखे-रखे अगर हाथ थक जाएं तो हाथों को बाजू में या जाँघों पर भी रखा जा सकता है| केवल हथेली नीचे की और हो, इसका ध्यान रखें|
  • सांस पर नियंत्रण बनाए रखें—और बीच-बीच में कुछ सैकंड के लिए, गरदन, पैरों, कमर, और हाथों को ऊपर लिखे प्रकार से चलाते रहें जब तक पूरा शरीर ढीला न हो जाये।
  • अगर अब भी शरीर ढीला नहीं लग रहा है, तो एक बार उठ जाएं, और फिर पहले की तरह लेट जाएं—और ऊपर बताए ढंग से आसन करें। अगर नींद आने लगे तो सो जाएं।

कुछ कठिनाइयों को पार करने के लिए अतिरिक्त उपाय

इस आसन के दौरान, सांस पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। पर कुछ स्थितियों में सांस पर ध्यान के अलावा दोनों आँखों के बीच के भाग पर भी ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है।

दोहरा ध्यान। दोनों आंखों के बीच, जहां माथा और नाक का ऊपरी भाग मिलता है, उसे ग्लैबला कहते हैं। इस अध्याय में बताए गए आसन के तरीके को अपनाएँ। सांस के नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित करें। सांस पर नियंत्रण हो जाने के बाद, धीमा सांस गिनती बोलकर लेते रहें—और ग्लैबला पर भी ध्यान केंद्रित करें। इसका अर्थ हुआ कि पहली बार में सांस पर ध्यान केंद्रित करना है, और वह आसान हो जाने पर, ग्लैबला पर भी ध्यान केंद्रित करना है। इसे दोहरा ध्यान कह सकते हैं। दोहरे ध्यान का लाभ भी दोगुना हो सकता है। लेकिन इसके लिए अधिक आत्म-नियंत्रण और इच्छा-शक्ति की जरूरत होती है।

दोहरा ध्यान: बिंदी लगाने की जगह ही ग्लैबला है|

दोहरे ध्यान की जरूरत कब होती है, इसे नीचे गिनाया गया है।

  • माईग्रेन का दर्द शुरू हो जाये, तो कई दिनों तक चलता है। सिर दुखता है, उल्टियां होती हैं, और कुछ खाना नहीं होता है। माईग्रेन के रोगी कई प्रकार की दवाइयां खाते हैं—और यह दर्द जल्दी ठीक हो जाये इसके उपाय करते हैं। तनाव-मुक्ति का आसन दोहरे ध्यान के साथ करना—यह माईग्रेन के गंभीर हमले को भी निष्फल करने का आसान उपाय है। सामान्य रूप से पैरासिटामौल की दो गोली लेकर आसन करें और दोहरा ध्यान करें। पूरी सावधानी रखें। एक घंटे के बाद भी माईग्रेन पूरी तरह से ठीक नहीं होता है, मतलब चुभन थोड़ी सी भी जारी रहती है—तो एक गोली और ले लें। पूरी तरह से निष्फल न होगा तो माईग्रेन फिर शुरू हो जाएगा। पैरासिटामौल के प्रयोग के बारे में अधिक जानकारी छठे अध्याय में दी गई है।
  • बिना शारीरिक विकृति वाले किसी भी दर्द को अगर जल्दी ठीक करना है, तब भी ऊपर माईग्रेन के लिए दिया गया तरीका अपनाएँ। पैरासिटामौल का प्रयोग भी वैसा ही करें।
  • कोई दर्द अगर बहुआयामी परिवर्तन से ठीक हो जाये, तो ऐसी स्थिति में गंभीर शारीरिक विकार की संभावना न के बराबर है। पुराना पीठ-दर्द के लिए बहुआयामी परिवर्तन बहुत अच्छा उपचार है—क्योंकि पुराना पीठ दर्द भी अधिकतर किसी शारीरिक विकार की अनुपस्थिति में ही होता है। सातवां परिशिष्ट देखें।
  • तनाव-मुक्ति का आसन दोहरे ध्यान के साथ करते समय पैरासिटामौल का प्रयोग जरूरी नहीं है। यह काम पैरासिटामौल की एक गोली, आधी गोली, या बिना गोली के भी किया जा सकता है। दोहरा ध्यान इस आसन की ताकत को बढ़ाता है।
  • जब तकलीफ बहुत अधिक न हो, ऐसे समय पर दोहरा ध्यान पैरासिटामौल के बिना करके देखें।

आसन को कितनी देर, कितनी बार, और कब-कब करें?

अध्याय के शुरू में इस आसन के लाभों का परिचय दिया गया है। इन लाभों का अनुभव करना और इन्हें बनाए रखना इस आसन का उद्देश्य है।

अगर हमें आसन से लाभ का अनुभव नहीं हो रहा है—अगर हमें आसन से उठने के बाद जल्दी थकान लगने लगती है या आसन का प्रभाव बहुत कम देर रहता है—इसका मतलब है कि हमें कुछ अधिक समय आसन के लिए देने की जरूरत हो सकती है।

ऊपर का चित्र देखें। रेखाओं द्वारा स्पष्ट किया गया है कि हमें आसन के लिए कितना समय देना चाहिए। ध्यान दें: बिन्दु-क पर आसन शुरू किया है—और जैसे-जैसे समय बीत रहा है, तनाव कम हो रहा है। लेकिन बिन्दु-ग पर पहुँचने के बाद, तनाव और कम नहीं होता है। ग ही वह बिन्दु है, जहां हम आसन करना रोक सकते हैं। अगर बिन्दु-ग पर आसन रोकेंगे तो तनाव का स्तर वही बना रहेगा (बिन्दु-घ देखिये)। लेकिन अगर बिन्दु-ग से पहले जैसे कि बिन्दु-ख पर आसन रोक देंगे, तो तनाव तुरंत बढ़ना शुरू हो जाएगा। देखिये बिन्दु-प। इसलिए आसन को बिन्दु-ग पर या उसके बाद ही रोकें।

नीचे आसन के समय के बारे में कुछ और मार्ग-निर्देश दिये गए हैं। वे केवल शुरू के कुछ हफ्तों के लिए हैं। इसके बाद हम स्वयं ही अपने अनुभव के आधार पर ही आसन का समय इत्यादि तय करेंगे।

  • पहली बार इस आसन को करते समय अधिक समय लगने की संभावना है। इसके बाद समय कम हो जाएगा। और कितनी बार करना है, वह भी कम हो जाएगा। लेकिन बीच-बीच में (तबीयत खराब होने पर) आसन का समय और गिनती बढ़ाने की जरूरत हो सकती है।
  • अगर आसन करते-करते नींद लग जाती है, तो सोते रहना अच्छा है पर जरूरी नहीं है।
  • हर रात को सोते समय आसन करें, और इसे करते-करते ही सो जाएं।
  • जल्दी नींद खुलने पर, फिर से आसन करते-करते सो जाने का प्रयत्न करें। विशेष रूप से अवसाद (डिप्रैशन) से पीड़ित लोग सवेरे तीन चार बजे उठ जाते हैं—और उन्हें फिर नींद नहीं आती है। ऐसे लोगों के लिए फिर से पैरासिटामौल की एक या आधी गोली लेकर आसन और सोने का प्रयत्न जरूरी है। नींद न आए, तो उठकर दूसरा काम करें—और जब नींद आने लगे तब सो जाएं|
  • दिन में सोते या आराम करते समय भी इस आसन को करें।
  • काम से लौटने पर थकान, तो हम काम से लौटकर इस आसन को करें। विद्यार्थी भी स्कूल या कालेज से लौटने के बाद इसे करें।
  • काम के दौरान थकान या नींद की परेशानी, तो हम काम पर जाने के तुरंत पहले आसन करें। यह विद्यार्थियों पर भी लागू है।




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