बहुआयामी परिवर्तन का परिचय

बहुआयामी परिवर्तन हमारी रोजाना की सामान्य क्रियाओं और कार्यों में, सोची समझी रणनीति के अनुसार, किया गया परिवर्तन है—जिससे हम आसानी से एक बड़े और मनचाहे परिवर्तन की ओर बढ़ सकते हैं|...

लगातार घिसने से पत्थर पर भी रस्सी का निशान बन जाता है| कोई भी काम लगातार करने से, उस काम में महारत हासिल होती है| परन्तु हम कौन सा काम हाथ में लें, यह निश्चित करना पड़ेगा| अपनी जरूरत और अपनी क्षमताओं को ध्यान में रखना पड़ेगा, तभी हमें जो चाहिए वह हासिल हो सकेगा|

कोई भी काम लगातार करने के लिए, स्थिरता चाहिए| लेकिन केवल स्थिरता से काम नहीं चलेगा, साथ में असफलता के कारणों को समझने, और उसके अनुसार अपना रास्ता बदलने की ताकत भी चाहिए| बड़े लक्ष्य को पाने के लिए, बड़े लक्ष्य को छोटे-छोटे भागों में बांटकर, उन छोटे लक्ष्यों को एक-एक करके पाना पड़ता है|

बहुआयामी परिवर्तन हमें वह सभी कुछ देता है—अपने लक्ष्यों को पाने के लिए, जिसकी जरूरत है| इसे अपनाकर हमें स्थिरता मिलती है| हम क्या करें (और क्या न करें), यह निश्चित करने की क्षमता विकसित होती है| साथ ही साथ, असफलता के कारणों को समझाने और उसके अनुसार अपना रास्ता बदलने की ताकत पैदा होती है| इन सभी ताकतों को हम बहुत आगे ले जा सकते हैं| और असंभव लगने वाले लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं|

संतुलित भोजन करना एक लक्ष्य हो सकता है| नियमित शारीरिक व्यायाम एक लक्ष्य हो सकता है| तम्बाकू और शराब का सेवन बंद कर देना एक लक्ष्य हो सकता है| अपने मन को शांत रखना और तनाव का मुकाबला करना एक लक्ष्य हो सकता है| अपनी आर्थिक स्थिति सुधारना और अपने लिए एक अच्छा घर बनाना एक लक्ष्य हो सकता है| अपने सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को सुदृढ़ करना भी एक लक्ष्य हो सकता है| इन सभी का बीमारियों से गहरा संबंध है, और इन लक्ष्यों को पाकर हम बीमारियों से ऊपर उठ सकते हैं| बीमारियों को काबू करना असंभव लग सकता है, परन्तु बहुआयामी परिवर्तन द्वारा यह पूरी तरह से संभव है|

बहुआयामी परिवर्तन द्वारा हम अपनी जीवनशैली में सुधार ला सकते हैं, परन्तु इसे केवल हमारी जीवनशैली में सुधार का रास्ता नहीं मान सकते हैं| जीवनशैली अच्छी होने पर भी बहुआयामी परिवर्तन अपनाने की जरूरत आम तौर पर होती है| बहुआयामी परिवर्तन अनेक गंभीर रोगों के उपचार में सक्षम है| इसलिए बहुआयामी परिवर्तन अच्छी जीवनशैली का पर्यायी नहीं है|

बहुआयामी परिवर्तन कोई रहस्यमय यौगिक क्रिया जैसे सुदर्शन क्रिया या विपासना नहीं है| बहुआयामी परिवर्तन द्वारा हम अपनी अनेक बीमारियों का उपचार कर सकते हैं, परन्तु बहुआयामी परिवर्तन होम्योपैथी या निसर्गोपचार जैसी कोई चिकित्सा प्रणाली भी नहीं है||बहुआयामी परिवर्तन अपनाकर, हम दवाइयों की जरूरत कम कर सकते हैं, लेकिन बहुआयामी परिवर्तन के साथ आम दवाइयों का प्रयोग जरूरी हो सकता है—जैसे कि उच्च रक्तचाप और मधुमेह| बहुआयामी परिवर्तन के साथ अन्य चिकित्सा प्रणालियों को जोड़ना संभव है| बहुआयामी परिवर्तन सभी चिकित्सा प्रणालियों के उपयोग की जरूरत को कम करने की क्षमता रखता है| लेकिन बहुआयामी परिवर्तन केवल एक अपने आप को बदलने का तरीका है|

बहुआयामी परिवर्तन के गुणों के पहले अक्षरों को जोड़कर अंग्रेजी का स्मार्ट (SMART) शब्द बन जाता है| इसलिए इसे परिवर्तन का एक स्मार्ट तरीका माना जा सकता है| व्यक्ति विशेष, सरकारी महकमे, स्वयंसेवी संस्थाएं, सामाजिक संगठन, छोटे व्यापारी, बड़े उद्योग, खेलों और शिक्षा से जुड़ी संस्थाएं, मेडिकल कॉलेज और अस्पताल—तुरंत या कुछ देरी के बाद—ये सभी बहुआयामी परिवर्तन को अपनाएंगे, ऐसी आशा की जानी चाहिए| बहुआयामी परिवर्तन दुनिया के सभी देशों तक पहुंचेगा, और सभी समुदाय इसे अपनाएंगे—ऐसी आशा भी की जा सकती है|


सस्टेनेबिल का अर्थ है कुछ ऐसा जिससे हमें या हमारे आस पास वालों को कोई नुकसान न हो| जिसे बहुत बड़ी संख्या में अपनाने पर भी पर्यावरण को नुकसान होने की संभावना न हो| सौर ऊर्जा इसी श्रेणी में आती है| लेकिन कोयला और खनिज तेल इस श्रेणी में नहीं हैं| जब तक पर्यावरण की दृष्टी से सुरक्षित ईंधन का उपयोग हवाई यात्रा के लिए शुरू नहीं होता है, हवाई यात्रा सस्टेनेबल नहीं मानी जाएगी| लेकिन सायकिल का प्रयोग पूरी तरह से सस्टेनेबल है| इसी नजरिए से बहुआयामी परिवर्तन को देखना पड़ेगा|

बहुआयामी परिवर्तन कोई डॉक्टरी इलाज न होकर एक सामाजिक हस्तक्षेप है| इसे अपनाने के लिए किसी डॉक्टर या अस्पताल की जरूरत नहीं है—इसलिए भी यह सस्टेनेबल है| बहुआयामी परिवर्तन किसी अंधविश्वास पर आधारित न होकर, तर्क और विज्ञान पर आधारित है—इसलिए भी यह सस्टेनेबल है|


बहुआयामी परिवर्तन अपनाने वाले व्यक्तियों के अन्दर एक वैचारिक विश्वास और भावनात्मक दृढ़ता पैदा होती है कि वे किसी भी कठिनाई को पार करके आगे बढ़ सकते हैं—और अपने लक्ष्य को पा सकते हैं| यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है| इससे भी बढ़कर, हमारे मन में अच्छे काम करने और सही रास्ते पर चल सकने का विश्वास जागृत होता है|


हर कोई बहुआयामी परिवर्तन अपना सकता है| बहुआयामी परिवर्तन के बारे में सारी जानकारी इन्टरनेट पर उपलब्ध करा दी गई है, या उपलब्ध कराई जा रही है| यह सारी जानकारी हिन्दी में उपलब्ध है| धीरे-धीरे बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के लिए कुछ और प्रकार की सहायता मिलने लगेगी| इसकी पूरी जानकारी भी यहाँ दी जाएगी|


रेस्पोंसिबल का अर्थ है अपने दायित्वों का निर्वाह करने वाला, यानी उत्तरदायी या जवाबदार| प्रश्न उठना चाहिए कि बहुआयामी परिवर्तन की क्या जवाबदारी है, या हो सकती है? क्या बहुआयामी परिवर्तन मानवीय गुणों को आगे ले जाएगा? क्या बहुआयामी परिवर्तन पर्यावरण को सुरक्षित रखने में हमारी मदद करेगा? क्या बहुआयामी परिवर्तन वैश्विक असमानता को दूर करने की ओर एक कदम साबित होगा? ऐसा प्रतीत होता है कि बहुआयामी परिवर्तन एक बेहतर विश्व के निर्माण में सकारात्मक भूमिका अदा करेगा|


बहुआयामी परिवर्तन अपनाकर हम अपने जीवन को बदल सकते हैं| बड़े पैमाने पर बहुआयामी परिवर्तन अपनाकर, हम जीवन के अनेक क्षेत्रों में गहरा परिवर्तन ला सकते हैं| सबसे बड़ा परिवर्तन शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आने की संभावना है| कोई भी क्षेत्र बहुआयामी परिवर्तन के प्रभाव से अछूता नहीं रहेगा|

इस परिवर्तन के बारे में तीन बातें जान लेना जरूरी है—सुरक्षित है, लाभ जल्दी मिलता है, और इसे हर कोई अपना सकता है| इसमें यह भी जोड़ लें कि बिना मूल्य का है लेकिन फिर भी अमूल्य है| कई गंभीर बीमारियों और परेशानियों के लिए हम बहुआयामी परिवर्तन अपना सकते हैं|


बहुआयामी परिवर्तन हमें एक सुरक्षित मार्ग से लेकर जाता है| परन्तु गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए, जरूरी तो नहीं है लेकिन बेहतर होगा कि वे किसी डॉक्टर की निगरानी में ही बहुआयामी परिवर्तन अपनाएं| यह सलाह उन लोगों पर विशेष लागू होती है जो गंभीर बीमारी जैसे अस्थमा या एंजाइना को ठीक करने के लिए और दवाइयाँ छोड़ने के लिए बहुआयामी परिवर्तन अपना रहे हैं| अगर हम सवेरे से शराब पीना शुरू कर देते हैं, तो शराब छोड़ने के लिए हमें डॉक्टर की निगरानी अवश्य चाहिए| मानसिक रोग की दवाइयां छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी डॉक्टर की निगरानी बेहतर है| कैंसर, मधुमेह, और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों को ठीक करने का कोई दावा बहुआयामी परिवर्तन नहीं करता है| इसलिए इन बीमारियों में बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के लिए डॉक्टर की निगरानी की जरूरत नहीं हैं| लेकिन इतना ध्यान रखने की जरूरत हैं कि मधुमेह और उच्च-रक्तचाप दोनों बीमारियों में दवाइयों की जरूरत घट सकती है| इसलिए शुगर के स्तरों और ब्लड प्रैशर पर नजर रखने की जरूरत है|


गंभीर स्थितियों में भी, बहुआयामी परिवर्तन का लाभ जल्दी मिलता है, जैसे कुछ घंटे या कुछ दिन| कई सालों से तकलीफ उठा रहे, और अनेक उपचारों से गुजर चुके लोगों को भी, एक सप्ताह से भी कम समय में दिखाई देने लगता है कि उनकी तकलीफ समाप्त हो रही है| यहाँ कुछ गिने चुने लोगों की बात नहीं हो रही है| एक बड़ी संख्या में लोगों को इस प्रकार के चमत्कार का अनुभव होता है|


एक बिना पढ़ा-लिखा सामान्य बुद्धि वाला व्यक्ति भी बहुआयामी परिवर्तन अपना सकता है| आठ-दस साल के बच्चे भी सांस का व्यायाम और तनाव-मुक्ति का आसन सीख सकते हैं| खास तौर पर यदि घर के और लोग भी बहुआयामी परिवर्तन अपना रहे हैं| बहुआयामी परिवर्तन गरीब-अमीर, पढ़े-लिखे और अनपढ़, या स्त्री-पुरुष के बीच भेद नहीं करता है−सभी इसका लाभ उठा सकते हैं|

बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के लिए मार्गदर्शिका बनाई गई है| इस मार्गदर्शिका के तीनों चरण यहाँ उपलब्ध है| बहुआयामी परिवर्तन का पूरा लाभ उठाने के लिए तीनों चरणों को अपनाना जरूरी है| तीनों चरणों के दौरान हमें क्या-क्या करना है, और उसके क्या परिणाम मिलेंगे—इसका एक संक्षिप्त विवरण यहाँ दिया जा रहा है|


पहले चरण के दौरान, हम सांस का व्यायाम और तनाव-मुक्ति का आसन सीखते हैं| शारीरिक व्यायाम करने की शुरुआत करते हैं| तम्बाकू और शराब का प्रयोग पूरी तरह से बंद करना जरूरी है| सेक्स (यौन) क्रियाओं और भावनाओं को काबू करना—यह बहुआयामी परिवर्तन की विशेषता है, और यह पहले चरण से ही शुरू हो जाता है|

पहला चरण अपनाने के साथ-साथ, हमें अपने आप में एक बड़ा बदलाव महसूस होता है| स्थिरता लगती है, अपने-आप पर नियंत्रण लगता है, और एक नई ताकत अपने अन्दर जागनी शुरू होती है| साथ ही साथ हमें लगने लगता है कि हम अपनी समस्याओं को दूर कर आगे बढ़ सकेंगे|

पहले चरण में केवल पांच से दस दिन का समय लगता है|


दूसरे चरण की शुरुआत में, हम हमारी पुरानी तकलीफों को भूलने का एक बहुत असरदार तरीका सीखते हैं—यह तरीका बहुआयामी परिवर्तन की खासियत है| पुरानी तकलीफों को भूलकर ही, हम जीवन में एक नई शुरुआत कर सकते हैं—और यही दूसरे चरण में होता है|

दूसरे चरण का एक और लक्ष्य हैं, भावनाओं पर नियंत्रण| इसमें सेक्स (यौन) भावनाओं पर नियंत्रण भी शामिल है| इस चरण के दौरान हमें लगने लगता है कि हम भावनाओं की गुलामी से निकल रहे हैं, और अपने उद्देश्यों को पाने के लिए, भावनाओं का उपयोग शुरू कर सकते हैं|


तीसरे चरण में हमारे अन्दर एक गहरा परिवर्तन आता है| बहुआयामी परिवर्तन हमारे जीवन का एक भाग बन जाता है, और हम मजबूती से अपने लक्ष्यों को पाने की ओर बढ़ते हैं|

हमारे आस-पास के लोग समझ जाते हैं कि हम बदल गए हैं, और हमारे प्रति उनका व्यवहार बदलने लगता है| अपने आस-पास के लोगों के प्रति हमारा नजरिया भी बदल जाता है, और हम उनके साथ सहयोग करने लगते हैं|

हमारा बोलने, उठने-बैठने, चलने-फिरने का तरीका बदल जाता है| हम अपनी बात बेहतर तरीके से समझा सकते हैं, और दूसरों को आसानी से समझ सकते हैं|

सतत एवं निर्विरोध विकास में सहायक, निरंतर प्रेरणा का स्रोत, किफायती, तथा सबके लिए बेहतरी लाने वाला परिवर्तन
Multiple Activities Change Intervention:
Sustainable, Motivating, Affordable, Responsible, and Transformative

क्रिकेट के मैदान में, बल्लेबाज अपने शरीर को गेंद की रेखा में लाने के लिए कदम बढाता है या पीछे हटता है, फिर अपने आप को स्थिर करता है, तभी बल्ला घुमाता है| क्षेत्ररक्षक गेंद की दिशा में दौड़ता है, परन्तु कैच लपकने से पहले अपने शरीर को स्थिर कर लेता है| टेनिस या बैडमिन्टन खिलाड़ी पहले दौड़ता है, फिर अपने आप को स्थिर करता है, और अंत में शॉट लगाता है| निशानेबाज अपने शरीर को, हाथ को, और आँखों को स्थिर करके ही निशाना लगाता है|...

स्थिर होकर पढ़ाई कर सकने वाले विद्यार्थी बेहतर सफलता हासिल करते हैं| मधुमेह या मोटापे को काबू में लाने के लिए स्थिरतापूर्वक खाने पीने पर और शारीरिक व्यायाम पर ध्यान देने की जरूरत होती है| किसी भी बीमारी पर नियंत्रण के लिए स्थिरतापूर्वक उसके उपचार की जरूरत होती है| आपसी संबंधों को बेहतर बनाने के लिए स्थिरतापूर्वक प्रयत्न करना पड़ता है| स्थिरता और परिवर्तन एक दूसरे के पूरक हैं| मनचाहे परिवर्तन की ओर बढ़ने के लिए स्थिरता बेहद जरूरी है|

मनुष्य सदियों से स्थिरता और परिवर्तन इन दोनों की जरूरत के प्रति जागरूक रहा है| इन दोनों उद्देश्यों को पाने के लिए आदिकाल से लेकर अब तक अनेक प्रकार के इतने मार्ग अपनाए गए हैं, जिनको गिन पाना भी संभव नहीं है| इन आजमाए हुए रास्तों की तुलना में बहुआयामी परिवर्तन बिलकुल नया है, और हमारे दरवाजे पर दस्तक देना शुरू भर कर रहा है|इस नए रास्ते की विशेषताओं का परिचय यहाँ दिया गया है|हमें इस रास्ते को परखने की जरूरत है|

बहुआयामी परिवर्तन का आधार हमारी रोजाना की सामान्य क्रियाओं और कार्यों में परिवर्तन है—जैसे कि सांस लेना, शारीरिक व्यायाम, और तनाव-मुक्ति का आसन| हमारे विचार और भावनाएं भी इन सामान्य क्रियाओं में शामिल हैं| इन सामान्य क्रियाओं में बदलाव द्वारा ही परिवर्तन को बहुआयामी बनाया जा सकता है| अंग्रेजी में इसे मल्टीपल एक्टीविटीज चेंज इंटरवेंशन कहते हैं, मतलब अनेक क्रियाओं में एक साथ बदलाव| इन क्रियाओं में बदलाव की बात हम सदियों से सुनते आ रहे हैं| सतही तौर पर नजर डालेंगे तो हमें बहुआयामी परिवर्तन में कुछ भी नयापन नहीं लगेगा| परन्तु बहुआयामी परिवर्तन बिलकुल अलग है, और अपने आप में अनूठा है|

बहुआयामी परिवर्तन, यह किसी किताबी सिद्धांत पर आधारित नहीं है| बल्कि यह तो अनुभवों की मिट्टी में से उपजा है और बड़ा हुआ है| पिछले चार दशकों के दौरान इन अनुभवों के आधार पर बहुआयामी परिवर्तन में निरंतर बदलाव लाए गए हैं|...

बहुआयामी परिवर्तन, यह किसी किताबी सिद्धांत पर आधारित नहीं है| बल्कि यह तो अनुभवों की मिट्टी में से उपजा है और बड़ा हुआ है| पिछले चार दशकों के दौरान इन अनुभवों के आधार पर बहुआयामी परिवर्तन में निरंतर बदलाव लाए गए हैं| इन बदलावों को परखा गया है, और लाभ देने वाले बदलावों को आगे गढ़ाया गया है| यह प्रक्रिया निरंतर जारी रही है| और बदलाव की इस प्रक्रिया से परिवर्तन का यह माध्यम एक मजबूत स्थिति में पहुँच चुका है| ऐसी स्थिति में जहां इस माध्यम से निश्चित और निर्णायक लाभ मिल पा रहे हैं| पिछले चार दशकों के इन अनुभवों को अब एक सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है, और जल्द ही इस सिद्धांत की रूपरेखा भी हमारे समक्ष आएगी|

बहुआयामी परिवर्तन की इस यात्रा में जिन लोगों का योगदान रहा है, उनका आभार यहाँ व्यक्त किया गया है|

बहुआयामी परिवर्तन का मतलब है, बहुत सारी एक्टीविटीज में एक सोची-समझी रणनीति के अनुसार परिवर्तन| इसके माध्यम से हम अपने जीवन में मनचाहा परिवर्तन ला सकते हैं| इसके बाद हम अपने लिए नए लक्ष्य खड़े कर सकते हैं, और उन लक्ष्यों को भी पा सकते हैं| नए लक्ष्य खड़े करना और उन लक्ष्यों को पा लेना यह एक जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है| मुश्किलों और मुसीबतों का मुकाबला भी जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है| बहुआयामी परिवर्तन की रणनीति जीवन भर हमारे साथ रहती है|

आम तौर पर हम अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों और अपने परिवार के लक्ष्यों तक सीमित रहते हैं| केवल कुछ ही लोग सामाजिक, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, और पर्यावरण से जुड़े लक्ष्यों के प्रति जागरूकता दिखाते हैं| बहुआयामी परिवर्तन अपनाकर हम अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक लक्ष्यों को पाने के प्रति अधिक जागरूक बन जाते हैं—लेकिन इसके साथ-साथ हम सामाजिक, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, और पर्यावरण से जुड़े लक्ष्यों को पाने में भी अधिक सक्षम हो जाते हैं| हमारी नजर बड़े लक्ष्यों की तरफ केंद्रित हो जाती है|

जन्म-दिवस पर या नव-वर्ष के अवसर पर, हम अपने आप में केवल एक बदलाव लाने का निर्णय करते हैं—चाहे वह तम्बाकू छोड़ना हो, या शारीरिक व्यायाम करना शुरू करना हो| अनेक क्रियाओं में एक साथ बदलाव बहुत मुश्किल या असंभव माना जाता है, और एक क्रिया को बदलने के निर्णय पर भी बहुत कम लोग टिके रह पाते हैं| एक साथ अनेक क्रियाओं में बदलाव का मार्ग प्रशस्त करना, यह बहुआयामी परिवर्तन की विशिष्टता है|

हम आधुनिक चिकित्सा प्रणाली पर भरोसा करते हैं, यानी इस प्रणाली में विश्वसनीयता है| इसी प्रकार का भरोसा, या इससे भी अधिक भरोसा, हम बहुआयामी परिवर्तन पर भी कर सकते हैं|

बहुआयामी परिवर्तन अनेक ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में सक्षम है, जो अभी तक अनुत्तरित हैं—जिनका उत्तर हम खोज रहे हैं, या जिनका उत्तर पाने की जरूरत हमें हो सकती है|...

मृणालिनी कमर-दर्द से पीड़ित है|बहुत प्रयास करने के बाद भी कमर-दर्द ठीक नहीं हो रहा है|डॉक्टरों ने शल्य-चिकित्सा ही एकमात्र उपाय बताया है|लेकिन मृणालिनी ने इन्टरनेट पर पढ़ा है कि कमर-दर्द के रोगियों की अनावश्यक सर्जरी दुनिया भर में हो रही है| मृणालिनी पढ़ी-लिखी है, और ऐसे जाल में फंसना नहीं चाहती है| उसने कई डॉक्टरों की सलाह ली, लेकिन सर्जरी कराना उसके लिए जरूरी है या नहीं—इस प्रश्न का संतोषजनक उत्तर उसे मिल नहीं पा रहा है| मृणालिनी अपने प्रश्न का उत्तर पा सकती है| उसे बहुआयामी परिवर्तन अपनाना होगा| इसके बाद अगर एक सप्ताह के अन्दर मृणालिनी का कमर-दर्द ठीक नहीं होता है, तभी उसे किसी विशेषज्ञ के उपचार की जरूरत होगी|

कमर-दर्द की तरह और भी अनेक बीमारियों में हम अनावश्यक उपचारों से बच सकते हैं| डिप्रैशन की गोलियां खाना, क्या हमारे लिए जरूरी है? क्या एंजियोप्लास्टी ले बिना हमारा काम चल सकता है? क्या अस्थमा ठीक हो सकता है? और भी बहुत सारे सवालों का उत्तर हम बहुआयामी परिवर्तन अपनाकर पा सकते हैं|

बहुआयामी परिवर्तन सस्ता नहीं एक बेहतर पर्याय माना जाना चाहिए|...

बहुआयामी परिवर्तन सस्ता नहीं एक बेहतर पर्याय माना जाना चाहिए| स्वस्थ रहने के बारे में और बीमारियों से छुटकारा पाने के बारे में हमें अपनी सोच बदलनी पड़ेगी| बहुआयामी परिवर्तन आज की हमारी सोच के बारे में अनेक प्रश्न खड़े कर सकता है, और हमें अपनी सोच बदलने के लिए उकसाता है|

बहुआयामी परिवर्तन कुछ कठिन रोगों का बेहतर उपचार है| बेहतर उपचार का अर्थ है—कम समय में, कम दवाइयां लेकर, और कम खर्च में अधिक लाभ|... अस्थमा, कमर-दर्द, ह्रदय-रोग, और डिप्रेशन जैसे रोगों में आठ-दस दिन में आशातीत लाभ होने की संभावना होती है; और कुछ हफ्तों में बीमारी पूरी तरह से ठीक हो सकती है| बीमारी पूरी तरह से ठीक होने का मतलब दवाइयों का पूरी तरह से बंद हो जाना है. बीमारी भी नहीं और दवाइयों की जरूरत भी नहीं—इसी बात से बहुआयामी परिवर्तन की ताकत का अनुमान लगाया जाना चाहिए|

इन रोगों में बेहतर लाभ पायें

अस्थमा को असाध्य माना जाता है, और कहा जाता है कि दमा दम के साथ ही जाता है| परन्तु बहुआयामी परिवर्तन अपनाकर हम अस्थमा से मुक्ति पा सकते हैं|


बहुआयामी परिवर्तन एंजाइना का सबसे अच्छा उपचार है|एंजाइना के लिए बड़े अस्पतालों, बड़े विशेषज्ञों, और बड़े एवं महंगे उपचारों की जरूरत नहीं के बराबर है|


बहुआयामी परिवर्तन अपनाने से बरसों पुराना कमर-दर्द भी छूमंतर होने की संभावना है| बस तीन-चार दिन लंगेंगे|


बहुआयामी परिवर्तन मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर उपाय है|... बहुआयामी परिवर्तन अपनाकर मानसिक रूप से कमजोर या मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्ति भी एक सामान्य व्यक्ति से ऊपर जा सकता है| इसमें कुछ समय लग सकता है| लेकिन बहुआयामी परिवर्तन हरेक व्यक्ति को निरंतर आगे बढ़ने में समर्थ बनाता है|


बहुत सारे और रोगों में भी बहुआयामी परिवर्तन लाभकारी है| कैंसर जैसे अनेक रोगों में भी जीवन की लंबाई कुछ हद तक बढ़ सकती है और जीवन की गुणवत्ता सुधर सकती है|

जीवनशैली में सुधार और तनाव का प्रतिकार, ये दोनों ही रोगों की रोकथाम के लिए प्रमुख माने जाते हैं| बेहतर मानसिक स्वास्थ्य पर कम ध्यान दिया जाता है| बेहतर रिश्ते स्वस्थ रहने के लिए जरूरी हैं, इस बारे में हमारी जानकारी बढ़ रही है|...

टीबी के कीटाणु, हमारे शरीर के अंदर, केवल एक साल या दो साल नहीं दस बीस पचास साल तक भी जिंदा रह सकते हैं. फिर जैसे ही प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है. ये छिपे हुए कीटाणु बढ़ना शुरू कर देते हैं, और टीबी की बीमारी शुरू हो जाती है. अब इस सवाल का जवाब देना नामुमकिन है कि टीबी कब शुरू हुई, और एक स्वस्थ व्यक्ति अस्वस्थ किस दिन बना. यह भी समझना जरूरी है कि केवल टीबी के कीटाणुओं से टीबी नहीं होती है. टीबी की शुरुआत होने के लिए प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाना जरूरी है. आज से सत्तर अस्सी साल पहले जब टीबी की दवाएँ नहीं थीं, टीबी से पीड़ित व्यक्तियों को उपचार के लिये सेनेटोरियम में भेजा जाता था. वहाँ खुली हवा, पौष्टिक भोजन, और घूमने फिरने से टीबी ठीक होती थी. आज भी दवाएँ लिए बिना, टीबी ठीक होना सम्भव माना जाता है. आज हम 2025 तक देश तो टीबी मुक्त करने का सपना देख रहे हैं. केंद्र और राज्य सरकारें इस दिशा में प्रयत्न कर रहे हैं. ऐसी स्थिति में टीबी के उपचार में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का महत्व समझना बेहद जरूरी है, और बहुआयामी परिवर्तन जैसा उपाय हमें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में मदद कर सकता है|

अब कुछ वायरसों की बात करता हूँ - हर्पिस सिमप्लेक्स, हर्पिस जोस्टर, और साइटोमिगैलो वायरस. ये वायरस हम सब के शरीर में मौजूद हैं, लेकिन शांत अवस्था में हैं. टीबी के कीटाणुओं की तरह, प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर, ये वायरस भी बढ़ना शुरू होंगे, और बीमारी पैदा करेंगे|

हम सब कैंसर से परिचित हैं. लेकिन हम यह नहीं जानते हैं कि कैंसर भी बहुत सालों तक शांत अवस्था में रहता है, या बहुत धीरे धीरे बढ़ता है. कैंसर के अस्तित्व का पता चलने में दस बीस साल भी लग सकते हैं. ऐसा माना जाने लगा है कि प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होने से कई प्रकार के कैंसर से बचा जा सकता है|

हममें से अधिकतर लोग अपने आप को रोगमुक्त मानते होंगे, और वे अपने विश्वास में सही होंगे. लेकिन एक निरोगी व्यक्ति भी अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है. स्वास्थ्य को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है. टीबी, कैंसर, और अस्थमा जैसी बीमारियों से बच सकता है, और इस काम में बहुआयामी परिवर्तन पूरी तरह से हमारी मदद कर सकता है|

व्यसन जीवन की परेशानियों और तनाव से दूर भागने का रास्ता है| इसके विपरीत बहुआयामी परिवर्तन जीवन में आने वाली परेशानियों और तनाव का मुकाबला करने का रास्ता है|...

व्यसन जीवन की परेशानियों और तनाव से दूर भागने का रास्ता है| इसके विपरीत बहुआयामी परिवर्तन जीवन में आने वाली परेशानियों और तनाव का मुकाबला करने का रास्ता है| हम परेशानियों से दूर भागने का रास्ता तभी अपनाते हैं, जब हमें परेशानियों का मुकाबला करने का रास्ता नहीं मिल रहा है| जैसे ही हमें विश्वास हो जाता है कि हमें परेशानियों का मुकाबला करने का रास्ता मिल गया है, हम परेशानियों से दूर भागना बंद कर देते हैं|

यह तो सिद्धांत की बात हो गई| सिद्धांत से आगे बढ़कर व्यवहार में भी बहुआयामी परिवर्तन व्यसन मुक्ति के लिए अत्यंत उपयोगी पाया गया है|


तम्बाकू और शराब दोनों का उपयोग करने वाले अकसर कहते हैं; शराब छोड़ दूंगा, लेकिन तम्बाकू छोड़ना मुश्किल है| हमारे देश में तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्र बनाए गए हैं, जहां तम्बाकू-मुक्ति के लिए दवाएं और सलाह मुफ्त उपलब्ध है| लेकिन इन केन्द्रों पर सफलता-पूर्वक तम्बाकू छोड़ने वालों की संख्या निराशाजनक है| रोटरी क्लब जैसी स्वयंसेवी संस्थाएं नए लोग तम्बाकू का सेवन शुरू न करें इस पर ही पूरा ध्यान दे रही हैं| कुल मिलाकर आदी बन चुके लोगों का तम्बाकू छुड़ाना मुश्किल माना जाता है|

तम्बाकू छुड़ाना मुश्किल है, इस आम धारणा के विपरीत, बहुआयामी परिवर्तन तम्बाकू छुड़ाना आसान मानता है| बहुआयामी परिवर्तन के पहले चरण में ही तम्बाकू पूरी तरह से छोड़ देना जरूरी है| अगर कोई व्यक्ति तम्बाकू छोड़ने के लिए राजी नहीं है तो वह व्यक्ति बहुआयामी परिवर्तन नहीं अपना सकता है| तम्बाकू का उपयोग करने वाले लगभग सभी लोग, तम्बाकू छोड़कर बहुआयामी परिवर्तन अपना लेते हैं|


बहुआयामी परिवर्तन शराब छुड़ाना भी आसान मानता है| शराब का नियमित सेवन करने वाले लोगों के लिए, बहुआयामी परिवर्तन के पहले चरण में ही शराब पूरी तरह से छोड़ देना जरूरी है| अगर कोई व्यक्ति शराब छोड़ने के लिए राजी नहीं है तो वह व्यक्ति बहुआयामी परिवर्तन नहीं अपना सकता है| शराब का उपयोग करने वाले लगभग सभी लोग, शराब छोड़कर बहुआयामी परिवर्तन अपना लेते हैं|

हम सभी अपने आप में सुधार लाना चाहते हैं, और बेहतर बनना चाहते हैं| बेहतरी के इस लक्ष्य को पाने में बहुत सारे लोग सफल नहीं हो पाते हैं| इसके बाद हम अपने आप से समझौता कर लेते हैं, गुणवत्ता में सुधार के प्रयत्न बंद हो जाते हैं|...

हम सभी अपने आप में सुधार लाना चाहते हैं, और बेहतर बनना चाहते हैं| बेहतरी के इस लक्ष्य को पाने में बहुत सारे लोग सफल नहीं हो पाते हैं| इसके बाद हम अपने आप से समझौता कर लेते हैं, गुणवत्ता में सुधार के प्रयत्न बंद हो जाते हैं| बहुआयामी परिवर्तन बेहतरी पाने का रास्ता हैं| बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के बाद अपनी गुणवत्ता में सुधार, बाकी लक्ष्यों की तरह एक लक्ष्य बन जाता है| विद्यार्थी, श्रमिक, और कर्मचारी—सभी बहुआयामी परिवर्तन अपनाकर, अपनी गुणवत्ता में सुधार ला सकते हैं| अकुशल श्रमिक की गुणवत्ता भी सुधारी जा सकती है, और एक कंपनी के सी ई ओ की गुणवत्ता भी सुधारी जा सकती है|

उदास लगना, मन पढ़ाई में नहीं लगना, अपने आप को किसी विषय में कमजोर पाना, मेहनत करने के बाद भी अच्छे नंबर नहीं आना, जानते हुए भी प्रश्नों का उत्तर नहीं दे पाना, नींद अधिक आना या सिर भारी रहना, और आत्मविश्वास की कमी जैसी बहुत सारी समस्याएं विद्यार्थियों के सामने रहती हैं| बहुआयामी परिवर्तन अपनाकर इन सभी समस्याओं से निजात पाया जा सकता है| बहुआयामी परिवर्तन का सबसे अधिक लाभ विद्यार्थियों ने लिया है|


खुद के व्यवसाय या उद्योग में लगे लोगों के सामने अनेक चुनौतियां होती हैं| सबसे बड़ी चुनौती लगाई गई पूंजी और शक्ति के बदले समुचित लाभ पाने और हानि से बचने की होती है| सरकार द्वारा समय-समय पर लागू किए गए कानूनों का पालन एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है—जैसे जी एस टी के प्रावधानों का पालन करना एक बड़ी चुनौती साबित हुआ है| लोगों को काम पर रखना और उनसे काम लेना भी एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है| अनेक प्रकार के लोगों (जैसे ग्राहक, सप्लायर, सरकारी महकमे, राजनेता इत्यादि) के साथ व्यावसायिक संबंध बनाकर रखना भी मुश्किल साबित हो सकता है| धंधे में अधिक समय दिया तो पारिवारिक और सामाजिक संबंधों के निर्वाह में बाधा पैदा हो सकती है| अनेक प्रकार की परेशानियों और कठिनाइयों के बीच अपने खुद के लिए समय निकल पाना भी मुश्किल हो सकता है, और स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर हो सकता है|

इन चुनौतियों, समस्याओं, और परेशानियों का सामना करके आगे बढ़ने में बहुआयामी परिवर्तन मददगार होगा| छोटे से लेकर बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों तक को, बहुआयामी परिवर्तन का लाभ मिलेगा||


नौकरी करने वाले लोग कुछ अलग तरह की चुनौतियों का सामना करते हैं| सीमित आय में घर का खर्च चलाना है| नौकरी से निकाल दिए जाने का खतरा बना रहता है| पदोन्नति की चिन्ता रहती है| स्थानान्तरण का डर बना रहता है| स्थानान्तरण के कारण हर दूसरे-तीसरे साल शहर बदलने वाले लोग, अपना पक्का घर बना नहीं पाते हैं| उनके बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है| पति-पत्नी दोनों नौकरी करते हों तो वे लम्बे समय तक अलग-अलग रहने के लिए मजबूर हो सकते हैं|

नौकरीपेशा लोग शोषण का शिकार हो सकते हैं| इसमें स्त्रियों का यौन शोषण प्रमुख है| कई बार नौकरी करने वालों को गैरकानूनी या अनैतिक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है| फर्जी वाउचर और बिल बनवाना, और बैलेंस शीट के आंकड़ों में फेर-बदल करवाना, अपने प्रतिद्वंदियों को नुकसान पहुंचाना और उनके रहस्य चुराना, इस अनैतिकता के कुछ छोटे-बड़े उदाहरण हैं| उद्योगों में काम कर रहे लोग, काम की जगह पर, प्रदूषण का भी शिकार हो सकते हैं|

अपनी कार्यकुशलता और कार्यक्षमता बढ़ाकर, नौकरीपेशा लोग अपनी शर्तें मनवा सकते हैं, या कोई बेहतर नौकरी ढूंढ सकते हैं| नौकरीपेशा लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर, बहुत सारे कायदे-क़ानून हैं| बहुआयामी परिवर्तन हमें इन कायदे-कानूनों का सहारा लेने की हिम्मत देता है|

बहुआयामी परिवर्तन आपसी संबंधों में सुधार लाने का राज-मार्ग माना जाना चाहिए| क्योंकि बहुआयामी परिवर्तन की मदद से हम अपने आप को नियंत्रित कर सकते हैं, और दूसरों को बेहतर समझ सकते हैं|...

बहुआयामी परिवर्तन आपसी संबंधों में सुधार लाने का राज-मार्ग माना जाना चाहिए| क्योंकि बहुआयामी परिवर्तन की मदद से हम अपने आप को नियंत्रित कर सकते हैं, और दूसरों को बेहतर समझ सकते हैं| यहाँ एक उदाहरण देना उचित होगा| अगर हम किसी व्यक्ति को प्रतिदिन एक महीने तक केवल मुस्कराकर हैलो बोलेंगे तो शायद वह हमारा मित्र बन जाएगा| इसके विपरीत अगर हम किसी व्यक्ति को एक दिन खाने पर बुलाएंगे, और उसके बाद उसकी तरफ नजर भी नहीं डालेंगे, तो उस व्यक्ति के मन में हमारे प्रति कोई जगह नहीं बनेगी| इसका मतलब हैं कि संबंधों को बनाने के लिए और बनाए रखने के लिए स्थिरता जरूरी है—जिसके लिए अपने पर नियंत्रण जरूरी है| अपने पर नियंत्रण होगा तो हम धीरे-धीरे अपने मन की बात दूसरों को समझा सकते हैं, और दूसरों के मन की बात समझ सकते हैं| अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों के साथ-साथ, हम अपने परिवार, समाज, राष्ट्र, और पर्यावरण से जुड़े लक्ष्यों की तरफ भी कदम बढ़ाते हैं| कुल मिलाकर हम आपसी संबंधों में सुधार का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं—चाहे वह परिवार के साथ संबंध हों, समाज के साथ संबंध हों, या फिर पर्यावरण के साथ संबंध हों|

पति-पत्नी का संबंध बाक़ी के पारिवारिक संबंधों से हटकर है| पति-पत्नी जीवन भर साथ रहेंगे यह अपेक्षा की जाती है| अगर यह संबंध टूट रहा हो तो उसे जोड़ने की कोशिश की जाती है| जोड़ने की इस कोशिश में बहुआयामी परिवर्तन एक बड़ा योगदान दे सकता है| कई बार तलाक ही एकमात्र रास्ता बच जाता है| लेकिन तलाक की प्रक्रिया लम्बी और दर्द-भरी हो सकती है| इस दर्द को कम करने में भी बहुआयामी परिवर्तन बड़ा योगदान दे सकता है|

वैवाहिक संबंधों के अतिरिक्त बाकी पारिवारिक संबंधों में भी मिठास बढ़ाने का काम बहुआयामी परिवर्तन कर सकता है|


यहाँ पर्यावरण की चर्चा भी जरूरी है| केवल इतना कह देना पर्याप्त है कि बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के बाद हम पर्यावरण को अपना समझेंगे| पर्यावरण को सुरक्षित रखने के बारे में सोचेंगे भी और अपने व्यवहार को भी समुचित रूप से बदलने की कोशिश भी करेंगे| बहुआयामी परिवर्तन का प्रसार पर्यावरण की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा|





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