बहुआयामी परिवर्तन द्वारा कमरदर्द का उपचार

क्या मेरे कमर-दर्द का कारण रीढ़ की हड्डी की कोई खराबी है?

कमर-दर्द एक आम तकलीफ है, जो हर किसी को कभी न कभी अवश्य अनुभव होती है, और दो-चार दिनों में ठीक भी हो जाती है। क्रॉनिक हो जाने पर यही कमर-दर्द एक गम्भीर बीमारी बन जाती है। हम बिस्तर से बाहर निकलने में डरते हैं। करवट बदलने से और कमर को झटका देने से डरते हैं। वजनी चीज उठाने से डरते हैं। और जिंदगी एक बोझ बनकर रह जाती है। फिर डॉक्टरों के पास जाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। एम आर आई और सीटी स्कैन जैसी जांचें शुरू हो जाती हैं। इन जांचों में रीढ़ की हड्डी की कुछ न कुछ खराबी निकलती ही है। इसके बाद या तो हम इस खराबी और कमर-दर्द के साथ जीने का तय करते हैं—या फिर रीढ़ की हड्डी की खराबी ठीक करने के लिए उपचार खोजने का सिलसिला शुरू हो जाता है। यह खोज अकसर कमर-दर्द के लिए सर्जरी के साथ ही समाप्त होती है। इस दौरान लाखों रुपए खर्च हो जाना आम बात है। लेकिन सर्जरी के बाद भी कमर-दर्द ठीक होगा, इस बात की कोई गारन्टी नहीं होती है। हम सोच रहे होंगे, इन महंगे उपचारों का क्या कोई सस्ता और अच्छा पर्याय है?

उम्र के साथ, हमारे बाल सफेद होते हैं. उसी प्रकार से हमारी रीढ़ में कुछ बदलाव आते हैं। ये बदलाव एम आर आई और सीटी स्कैन में साफ तौर पर दिखाई देते हैं। इन बदलावों को हम खराबी समझ बैठते हैं, या बीमारी समझ बैठते हैं। हम सोचने लगते हैं कि हमारी रीढ़ की हड्डी कमजोर हो गई है, और यही हमारे कमर-दर्द का कारण है। परंतु सच्चाई अकसर इससे कोसों दूर होती है, और हमारी रीढ़ की हड्डी बिल्कुल ठीक ठाक होती है। फिर क्यों एम आर आई और सीटी स्कैन खराबियां दिखलाते हैं? हम एम आर आई और सीटी स्कैन द्वारा बिछाए गए सर्जरी के जाल में कैसे फंस जाते हैं? इन प्रश्नों का उत्तर पाने की कोशिश पहले की जाएगी, और उसके बाद कमर-दर्द के उपचार के सही तरीके पर आएंगे।

निचली कमर का एक नार्मल एम आर आई

सीटी याएम आर आई में खराबी मिलना आम है

ये खराबियां ही हमें सर्जरी के जाल में फंसा देती हैं

सीटी और एम आर आई स्कैन का चलन, पिछली शती में सत्तर के दशक के दौरान शुरू हुआ था। कमर-दर्द के लिए भी ये स्कैन किए जाने लगे, और सामने आ रही विकृतियों को कमर-दर्द का कारण माना जाने लगा। नब्बे के दशक में हमें यह पता चला कि इन विकृतियों का कमर-दर्द से कोई खास रिश्ता नहीं है।

एक बड़ी संख्या में कमर-दर्द के रोगियों का एम आर आई स्कैन किया गया। अब उतनी ही संख्या के नॉरमल (जिन्हें कमर-दर्द नहीं था) व्यक्तियों का भी एम आर आई स्कैन किया गया। अब दो टोलियां हो गईं—एक कमर-दर्द वाली टोली, और एक नॉरमल टोली। दोनों टोलियों के एम आर आई स्कैन में मिली विकृतियों की तुलना की गई। दोनों टोलियों में मिलीं विकृतियां बिल्कुल एक जैसी पाई गईं। इसका मतलब बिल्कुल साफ था। एम आर आई में मिली विकृतियों का कमर-दर्द से कोई रिश्ता नहीं था।

ऐसी शोधों को कई बार दोहराया गया, और नतीजा हमेशा एक जैसा ही मिला। अब यह सिद्ध हो गया कि एम आर आई या सीटी में मिलीं विकृतियों का कमर-दर्द से रिश्ता नहीं होता है। ये विकृतियां नॉरमल होती हैं। जैसे हमारे बाल सफेद हो जाते हैं, वैसे ही उम्र बढ़ने के साथ ये विकृतियां आने लगती हैं। लेकिन सर्जन इन विकृतियों का बहाना लेकर रीढ़ की हड्डी की सर्जरी करते जा रहे थे। इसलिए, इन शोधों के बाद, कमर-दर्द के रोगियों का सीटी, एम आर आई स्कैन, और यहां तक कि सादा एक्सरे पर भी रोक लगाई जाने लगी।

व्यावसायिक असोसिएशनों की सिफारिशें

अमेरिका और यूरोप के डॉक्टरों की व्यावसायिक असोसिएशनों ने भी देखा कि स्कैनिंग में मिल रही विकृतियों की आड़ लेकर बड़े पैमाने पर कमर-दर्द के रोगियों की बेवजह सर्जरी की जा रही थी। इसे रोकने के लिए, इन असोसिएशनों ने एक स्वर में जोरदार सिफारिश की है कि कमर-दर्द के रोगियों की स्कैनिंग याने एम आर आई, सीटी, और सादा एक्सरे भी कराना उचित नहीं है। इन जांचों को कब कराया जाए, इसके दिशानिर्देशभी जारी किए गए| वर्ष 2006 एवं 2007 में जारी की गईं, ये सिफारिशें आज भी लागू हैं।

इन असोसिएशनों की सिफारिश है कि पहले कमर-दर्द के कारण का पता लगाऐं। और यह कारण मुख्य रूप से रोग का इतिहास जानकर और साधारण जांच पड़ताल द्वारा ही पता लगाया जाए। इस क्लिनिकल जांच के बाद, अगर कमर-दर्द का कोई विशेष कारण संभावित हो तो ही स्कैनिंग का सहारा लेना उचित है।

नई दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में ओपीडी का परचा बनवाते लोग

कमर-दर्द का कारण ढूँढने की जल्दी न करें|

नब्बे प्रतिशत से अधिक मामलों में कमर-दर्द का कोई विशेष कारण नहीं होता है। ऐसे कमर-दर्द को चिकित्सा जगत में अविशिष्ट या नॉन-स्पेसिफिक कमर-दर्द यह नाम दिया गया है। हम सोच रहे होंगे कि अविशिष्ट कमर-दर्द का भी कोई न कोई कारण तो जरूर होता होगा। हमारी सोच सही है, लेकिन कारण जानकर हम सन्न रह जाऐंगे। क्योंकि अविशिष्ट कमर-दर्द का कारण कोई शारीरिक विकृति नहीं है। इसका कारण हमारी सोच है, हमारी परिस्थितियां हैं, हमारी नौकरी की शर्तें, और ऐसे ढेरों मानसिक और सामाजिक कारण हैं। केवल एक बात पक्की है कि अविशिष्ट कमर-दर्द से पीड़ित व्यक्ति की कमर की बनावट में कोई खराबी नहीं है—इसलिए कई बार इस दर्द को फंक्शनल भी कह दिया जाता है। इसका मतलब यह कदापि नहीं है कि दर्द से पीड़ित व्यक्ति का दर्द का अहसास झूठा है—मतलब शारीरिक विकृति न होने पर भी उसका दर्द सचमुच का ही होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकतर मामलों में कमर-दर्द का कारण ढूँढने में शक्ति लगाना ठीक नहीं है| कमर-दर्द को बड़ी या खतरनाक बीमारी समझने की जरूरत नहीं है| ऐसा करके हम समय, स्वास्थ्य, और पैसा, सभी गवां सकते हैं|

किन परिस्थितियों में कारण जानना जरूरी है?

कमर-दर्द के लाल झंडे (Red Flags of Back Pain)

अधिकतर मामलों में कमर-दर्द का कारण बहुत साधारण होता है। परंतु हमें शंका रहती है—हमारा कमर-दर्द किसी विशेष कारण से तो नहीं है? इस शंका के समाधान के लिए हम स्कैनिंग कराते हैं, लेकिन स्कैनिंग हमें गलत रास्ते पर ले जाता है। इस शंका समाधान का बेहतर तरीका यहां दिया गया है। अनेक विशेषज्ञों द्वारा इस तरीके की सिफारिश की गई है। नीचे लिखे गए लक्षण उपस्थित होने पर शंका करने की जरूरत है। ये लक्षण न होने की स्थिति में शंका करना उचित नहीं है। हम अपने डॉक्टर के साथ मिलकर नीचे लिखे लक्षणों की उपस्थिति का पता करें। इन्हें कमर-दर्द के red-flags कहा जाता है|

  • छाती में किसी विशेष स्थान पर दबाने से दर्द या दुखन, जो लगातार बना रहता है (Thoracic pain).
  • बुखार और शरीर के वजन में कमी जिसका कोई कारण नजर नहीं आ रहा है (Fever and unexplained weight loss).
  • टट्टी या पेशाब रोकने में या करने में दिक्कत (Bladder or bowel dysfunction).
  • शरीर के किसी भाग का कैंसर (History of carcinoma)
  • अन्य किसी गम्भीर बीमारी का होना (Ill-health or presence of other medical illness).
  • बढ़ती जा रही नसों की कमजोरी के लक्षण (Progressive neurological deficit).
  • नितम्बों या पैर में कहीं बधिरता, जहां छूने या पिन चुभाने से पता न चल पाए। पैर के किसी हिस्से में कमजोरी, और उसके कारण चाल में फर्क (Disturbed gait, saddle anesthesia)

ऊपर लिखे लक्षणों की उपस्थिति में सावधानी बरतने की जरूरत है। भारी काम नहीं करना है और किसी विशेषज्ञ की सलाह लेना है। ऊपर लिखे लक्षण नहीं होने पर, विशेषज्ञ की सलाह की जरूरत नहीं है, क्योंकि कमर-दर्द किसी खास कारण से होने की संभावना बहुत कम है।

बीस वर्ष से कम और पचपन से अधिक आयु वालों को भी सावधानी बरतना है। लेकिन कोई इमरजेंसी न हो और ऊपर लिखे लक्षण उपस्थित न हों तो, इस आयुवर्ग के लोग भी एक सप्ताह तक केवल बहुआयामी परिवर्तन अपनाएं, और उससे लाभ न होने पर ही विशेषज्ञ की सलाह लें। इस प्रकार की स्टैप-केयर प्रणाली भी कमर-दर्द के उपचार में पूरी तरह से मान्य है—जहां पहले प्राथमिक उपचार अपनाया जाता है, और उसके बाद लाभ न होने पर ही विशेष उपचारों का सहारा लिया जाता है। हम आगे चलकर देखेंगे, क्यों बहुआयामी परिवर्तन कमर-दर्द का सबसे अच्छा प्राथमिक उपचार बन जाने की संभावना है।

अविशिष्ट कमर-दर्द क्रॉनिक क्यों बन जाता है?

इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मानसिक और सामाजिक कारणों से ही अविशिष्ट कमर-दर्द क्रॉनिक बन जाता है। इन विशेषज्ञों द्वारा बताए गए कुछ कारण यहां उद्धृत किए जा रहे हैं।

  • ऐसी सोच कि कमर-दर्द एक बड़ी और विकलांग कर सकने वाली बीमारी है।
  • कमर-दर्द के दर्द से बचने की कोशिश, और इसके लिए घरेलू और घर के बाहर की शारीरिक गतिविधियों से दूरी रखना—मतलब कमर को काम नहीं करना पड़ेगा, तो वह नहीं दुखेगी।
  • भागदौड़ और कसरत से नाउम्मीदी और यह उम्मीद कि आराम भरी जिंदगी से और कमर के किसी व्यायाम के बिना ही दर्द ठीक होगा। उदासी, सामाजिक अकेलापन, और आत्मविश्वास की कमी।
  • सामाजिक और आर्थिक समस्याओं की उपस्थिति।

दर्द का यह चक्रव्यूह भेदना जरूरी है

दर्द का चक्रव्यूह भेदने के लिए बहुआयामी परिवर्तन

ऊपर के चित्र में हम दर्द का चक्रव्यूह देख सकते हैं| कोई भी दर्द शारीरिक कामों के बचने की प्रवृत्ति को जन्म देता है| इससे हमारी मांसपेशियों की ताकत कम होती है, और दर्द बढ़ता है| दूसरी ओर दर्द के कारण मानसिक तनाव के कई लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं, जैसे कि गुस्सा, चिंता, डर इत्यादि| ये लक्षण हमारी नींद, भूख, पारिवारिक और सामाजिक संबंध, हमारे काम-काज, और हमारी दूसरी रुचियों को प्रभावित करते हैं| एक सीमा के बाद हम अवसाद यानी डिप्रैशन का शिकार हो सकते हैं| इससे भी दर्द बढ़ता है| यही दर्द का चक्रव्यूह है, जिसे भेदना जरूरी होता है| एक स्वस्थ व्यक्ति भी चौबीस घंटे बिस्तर में लेटा रहेगा, तो दो-तीन दिन में उसकी कमर दुखनी शुरू हो जाएगी| 

राजेश (काल्पनिक नाम) कई महीनों से कमर-दर्द से पीड़ित है| एम आर आई में भी कुछ खराबी निकली है| एकाएक दर्द बढ़ गया है| राजेश को डर है कि झुकने, तेज चलने, या कोई भारी काम करने से रीढ़ की हड्डी की खराबो बढ़ सकती है| वह बहुत सावधानी से चलते हुए केवल बहुत जरूरी काम करता है| बाकी समय वह बिस्तर में लेटा रहता है| बिस्तर में करवट बदलने से भी वह डरता है| आठ दिन बीतने के बाद, राजेश ने ऑफिस जाने का तय किया| उसने कपड़े पहने, नाश्ता किया, और बैग उठाकर बाहरी दरवाजे की ओर चलने लगा| बैग में कुछ जरूरी फाइलें और टिफिन था| अचानक कमर में दर्द उठा| राजेश ने बैग छोड़ दिया, और दोनों हाथों से किवाड़ पकड़कर खड़ा हो गया| उसकी पत्नी ने सहारा देकर उसे बिस्तर पर लिटाया| इस घटना के बाद से राजेश बहुत डर गया है| वह बाथरूम के लिए जाते समय भी पत्नी का सहारा लेकर बिस्तर से उतरता है| डर और शारीरिक काम से बचना, इन दोनों ने मिलकर राजेश को अपाहिज बना दिया है|

कोई भी पट्टा कमर में बांधना कमर-दर्द के लिए हानिकारक है| नीचे देखें ...

कमर-दर्द की सच्चाई आम धारणाओं के विपरीत है

कई प्रकार से, सच्चाई कमर-दर्द की आम धारणाओं के बिल्कुल ही विपरीत है।

  • नब्बे प्रतिशत से अधिक कमर-दर्द के मामलों में पीठ में कोई विकृति नहीं होती है।
  • एम आर आई और सीटी जैसी जांचें, कमर-दर्द के कारणों के बारे में हमें पथभ्रष्ट कर सकती हैं। इसलिए ये जांच कुछ चुने हुए मामलों में ही करने की सिफारिश की गई है।
  • अविशिष्ट कमर-दर्द आर्थिक, सामाजिक, और मानसिक कारणों से पैदा होता है, और इन्हीं कारणों से अविशिष्ट कमर-दर्द क्रॉनिक बन जाता है। जूतों का, बैठने की कुर्सी, या बैठने की मुद्रा का दोष, कमर-दर्द का मूल कारण नहीं होता है। हमें कोई विशेष कुर्सी या जूता खरीदने की जरूरत नहीं है। हमें बैठने की मुद्रा को सुधारने की जरूरत हो सकती है—पर उससे भी अधिक शरीर की फिटनेस को सुधारने की जरूरत होती है।
  • बहुत से लोग कमर में पट्टा बांधकर घूमते हुए दिखाई देते हैं| यह पट्टा भी बिस्तर में लेटकर आराम करने से मिलता-जुलता है| यह पट्टा भी कमर की मांसपेशियों को आराम देकर कमजोर बना देता है| ऊपर राजेश का उदहारण देखिए| बहुआयामी परिवर्तन कोई भी पट्टा कमर में बांधने की सलाह नहीं देता है|
  • अविशिष्ट कमर-दर्द के मामलों में व्यक्ति को उठने, बैठने, चलने-फिरने, और हल्के काम करने की सलाह देना ठीक है। दर्द चाहे कितना भी अधिक क्यों न हो—कमर की हल्की-फुल्की गतिविधि, कमर की मांसपेशियों को ताकत देती है, और कमर को ढीला और लचीला बनाए रखती है। कुल मिलाकर इसका अत्यंत सकारात्मक प्रभाव कमर-दर्द पर होता है।
  • मान्यता के विपरीत कमर को लचीला और ताकतवर बनाने के लिए कमर-दर्द के रोगियों को किसी विशेष व्यायाम की कोई भी जरूरत नहीं है। सामान्य रूप से किए जाने वाले शारीरिक व्यायाम जैसे घूमना या तेज चलना इत्यादि ही सबसे अच्छे व्यायाम कमर-दर्द के रोगियों के लिए भी हैं।

कमर-दर्द का उपचार बहुआयामी परिवर्तन से शुरू करें

नीचे लिखे बिंदुओं पर नजर डालकर हम समझ सकते हैं कि बहुआयामी परिवर्तन अविशिष्ट कमर-दर्द का सर्वोत्तम उपचार है।

  • बहुआयामी परिवर्तन अविशिष्ट कमर-दर्द के सभी मामलों में समान रूप से पूरी राहत देते हुए पाया गया है। एक सप्ताह से भी कम समय में कमर-दर्द ठीक हो जाता है। और साथ ही साथ यह विश्वास भी हो जाता है कि कमर-दर्द पीठ की किसी विकृति के कारण नहीं था—मतलब मांसपेशियों को ताकत देकर और कमर को मजबूत बनाकर कमर-दर्द से हमेशा के लिए बचा जा सकता है।
  • अकसर कई मानसिक और सामाजिक परेशानियां कमर-दर्द के साथ किसी न किसी रूप से जुड़ी होती हैं। ये परेशानियां कमर-दर्द का कारण और परिणाम दोनों हो सकती हैं। कई बार इस प्रकार की परेशानियों के कारण कमर-दर्द क्रॉनिक हो जाता है। इन मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करने के लिए भी बहुआयामी परिवर्तन बेहद उपयोगी है, जैसा हम अगले परिशिष्ट में देख सकते हैं।
  • बहुआयामी परिवर्तन का सकारात्मक प्रभाव, एक सप्ताह के अंदर, अविशिष्ट कमर-दर्द के सभी मामलों में होता है। अगर बहुआयामी परिवर्तन पूरी ईमानदारी से अपनाने के बाद भी एक सप्ताह में सम्पूर्ण लाभ नहीं हुआ है, हम यह मान सकते हैं की विशेषज्ञ की सलाह की जरूरत है। मतलब, बहुआयामी परिवर्तन को कमर-दर्द के मामलों में प्राथमिक चिकित्सा की तरह अपनाने की जरूरत है—और इससे लाभ न होने की स्थिति में विशेषज्ञों की सलाह लेकर आगे की चिकित्सा की जा सकती है। इस प्रकार की स्टैप-केयर अप्रोच कमर-दर्द के लिए सुझाई गई है, और बहुआयामी परिवर्तन, एक अत्यंत प्रभावशाली पहला स्टैप सिद्ध होगा।

बहुआयामी परिवर्तन कमर-दर्द के क्षेत्र में चल रही अफरा-तफरी को समाप्त करने के लिए एक अच्छा उपाय सिद्ध हो सकता है। इसके द्वारा वाडेल के स्वप्नों को साकार किया जा सकता है। नीचे देखिए|

गौर्डोन वाडेल (1942-2017)

मान्यताओं को अविलम्ब बदलने की जरूरत

गौर्डोन वाडेल ने अपनी पुस्तक, द बैकपेन रिवोलूशन, कमर-दर्द के बारे में हमारी मान्यताओं में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की जरूरत पर लिखी है। वाडेल के अनुसार, कमर-दर्द एक मामूली बीमारी है, जिसके लिए किसी महंगे उपचार की जरूरत नहीं है। फिर भी कमर-दर्द से परेशान लोगों की संख्या विश्व-भर में बढ़ती जा रही है। कमर-दर्द से होने वाली काम के दिनों की हानि और उससे होने वाला आर्थिक नुकसान बढ़ता जा रहा है, जो नुकसान डिप्रैशन, मिरगी, और टीबी जैसी बीमारियों से कहीं अधिक है—और मलेरिया जैसी बीमारियों की बराबरी कर रहा है। कमर-दर्द के उपचार पर किया जा रहा अनावश्यक खर्च भी रोकने की जरूरत है। जाहिर है कि हमें कमर-दर्द के लिए एक सोच बदलने वाले उपचार की जरूरत है।

कमर-दर्द के क्षेत्र में, वाडेल की पुस्तक को और उसके सुझावों को स्वीकृति मिली है। उसके बातों से सभी सहमत हैं। लेकिन इस पुस्तक के प्रकाशन के पचीस वर्ष के उपरांत भी कमर-दर्द के उपचार के क्षेत्र में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है। प्रगति न होने की बात को वाडेल के समर्थक भी स्वीकार करते हैं। ऐसे उपचार की जरूरत स्वीकार की जाती है, जो कमर-दर्द के बारे में हमारी सोच को बदलने का काम कर सके।





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