धीमा और नियंत्रित सांस

हमें सबसे पहले सांस पर नियंत्रण सीखना है

इसके पहले वाले अध्याय में, बहुआयामी परिवर्तन शुरु करने का तरीका बताया गया है । इस अध्याय में हम सांस पर नियंत्रण की बात करेंगे। पिछले अध्यायों को पढ़ने और समझने के बाद ही, इस नियंत्रण की शुरुआत करें। सांस पर नियंत्रण बहुआयामी परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण भाग है। आमने-सामने बैठकर जब बहुआयामी परिवर्तन की शुरुआत कराई जाती है, तो सबसे पहले सांस पर नियंत्रण सिखाया जाता है। लेकिन इस मार्गदर्शिका पढ़ने वालों को अपने आप ही सांस पर नियंत्रण करना सीखना होगा।

  • इस अध्याय में, केवल सांस को नियंत्रित करने का तरीका बताया गया है। हमारी नजर में सांस पर नियंत्रण का क्या मतलब हैं? सांस पर नियंत्रण, हम कैसे ला सकते हैं? सांस पर नियंत्रण लाने में क्या कठिनाइयाँ आ सकती हैं? और इन कठिनाइयों को कैसे दूर किया जा सकता हैं? इन प्रश्नों के उत्तर जानने की कोशिश इस अध्याय में की जाएगी|
    इसके साथ-साथ हम सांस पर नियंत्रण को बहुआयामी परिवर्तन के पहले चरण के दृष्टिकोण से भी देखेंगे| पहले चरण के दौरान, हमें सांस पर नियंत्रण कैसे लागू करना है? कितने समय के लिए और कितने दिनों तक सांस पर नियंत्रण अपनाना है? और मुश्किलों पर कैसे पार पाना है?
  • सांस पर नियंत्रण रखना क्यों जरूरी है? यह जानने के लिए परिशिष्ट देखिए: वैज्ञानिक दृष्टि से सांस को नियंत्रित करना क्यों जरूरी है?

अब बहुआयामी परिवर्तन की बात करेंगे

हम सांस पर नियंत्रण किसे मानते हैं?

हमारी सांस की क्रिया के दो भाग हैं, सांस खींचना और सांस छोड़ना। पर हमें केवल सांस छोड़ने पर नियंत्रण करना सीखना है। इसका अर्थ हुआ—सांस लें, और फिर नियंत्रित ढंग से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। फिर से सांस लें, और फिर से नियंत्रित ढंग से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। हर बार सांस को छोड़ने की क्रिया पर नियंत्रण बनाए रखना है।

बहुआयामी परिवर्तन के दौरान अपनाया जाने वाला, सांस पर नियंत्रण का तरीका, हम ऊपर के वीडियो में देख सकते हैं| यह एक आसान तरीका है, जिसका पूरा विवरण आगे दिया गया है|

इन बातों को ध्यान में रखना जरूरी है ...

पहली बार करना कुछ लोंगो के लिए मुश्किल हो सकता है| अंत में हरेक व्यक्ति इसे सीख सकता है और अपना सकता है|

  • पहली बार सीखने में कुछ लोगों को अधिक समय लगाना पड़ेगा, और कुछ लोगों को कम|
  • कुछ लोगों को कुछ घंटे या आधा दिन लगाकर पहली बार सीखना पड़ेगा|
  • अधिकतर लोग एक घंटे के अंदर, इसे पहली बार कर सकेंगे|
  • एक बार कर लेने के बाद, अगली बार करना यह सभी लोगों के लिए आसान हो जाएगा| इसलिए पहली बार सीखते समय धैर्य रखें|
  • पहली बार करने में हमें जितना अधिक समय लगेगा, उतना ही अधिक फायदा हमें सांस के नियंत्रण से होगा| इसलिए जिन लोगों को दिक्कत आ रही है, उनके लिए सांस का नियंत्रण सीखना अधिक जरूरी है|

कुछ प्रयोग करें ...

  • मुंह से एक इंच की दूरी पर अपनी हथेली रखें और आगे लिखा वाक्य धीरे-धीरे परंतु स्पष्टता से बोलें: "राहुल फर्राटे से दौड़कर मेट्रो पर चढ़ गया|" इस वाक्य को कई बार दोहराएं|
  • हम सभी गाना जानते हैं! मुंह से एक इंच की दूरी पर अपनी हथेली रखें और कोई भी गाना गाएँ ध्यान दें गाते समय हम केवल सांस अंदर लेने के लिए रुकते हैं—सांस बाहर छोड़ने के लिए नहीं रुकते हैं।
  • अब हथेली मुंह के सामने रखकर केवल फुसफुसाएँ।

बोलते समय, गाना गाते समय, या फुसफुसाते समय सांस बाहर जाता है, और हथेली से टकराता है| इसलिए हमें हथेली पर हवा महसूस होती है| कोई भी गायक, गाते समय माइक मुंह के सामने रखता है| गाते समय बाहर निकलने वाली हवा, माइक के परदे में कंपन पैदा करती है| फिर यह कंपन बिजली के संकेतों में बदलता है| गाना गाते समय हम सांस बाहर निकालते हैं, इसीलिए यह संभव हो पाता है|

हम बोलते समय सांस छोड़ते हैं। इसलिए सांस छोड़ने को नियंत्रित करने का सबसे आसान तरीका बोलना है। यही बहुआयामी परिवर्तन के दौरान, सांस को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है|

अब सांस को धीमा और नियंत्रित करने का एक प्रयोग करें ...

क्या हमने किसी छोटे बच्चे को गिनती बोलना सिखाया है? अगर नहीं भी सिखाया है तो अब सिखाएँ। इस प्रकार से खींचकर गिनती बोलें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, छेएएए, साआआआत, आआआठ, नौऔऔऔ, दअअअस। घड़ी देखकर एक से दस तक गिनती बोलने में लगभग दस सेकंड का समय लें। और इस दस सेकंड में सांस अंदर न लें। ऐसा कई बार करें।

  • शांत वातावरण में कुर्सी पर आराम से बैठ जाएँ|
  • गिनती बोलें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, छेएएए, साआआआत, आआआठ, नौऔऔऔ, दअअअस।
  • केवल एक बार गहरा और लंबा साँस लें|
  • गिनती बोलें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, छेएएए, साआआआत, आआआठ, नौऔऔऔ, दअअअस।
  • केवल एक बार गहरा और लंबा साँस लें|
  • गिनती बोलें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, छेएएए, साआआआत, आआआठ, नौऔऔऔ, दअअअस।
  • केवल एक बार गहरा और लंबा साँस लें|
  • लगभग पांच मिनट तक लंबा सांस लेना और गिनती बोलना इसी प्रकार से दोहराते रहें|

एक से दस तक गिनती बोलने में आठ से दस सेकंड का समय लगाएं| बिनती बोलते समय बीच में रुककर छोटा सा सांस चुराने की कोशिश न करें| गिनती बोलना खत्म होने के बाद केवल एक ही गहरा और लंबा सांस लें| एक से दस तक गिनती (दस सेकंड) + एक बार सांस अंदर लेना (दो सेकंड) = कुल बारह सेकंड में एक सांस। इस प्रकार से एक मिनट में लगभग पांच बार सांस लेना है—तब हम सांस को धीमा और नियंत्रित कहेंगे।

ऊपर के इस प्रयोग को आसान बनाना है?

अपनी जरूरत के हिसाब से चलें ...

ऊपर के प्रयोग में एक मिनट में पांच बार सांस लेना है, और पांच मिनट तक यह प्रयोग जारी रखना है| बहुत से लोग अपने सांस को इतना अधिक नियंत्रित कर पाने में मुश्किलों का सामना करेंगे| उनकी सांस फूलने लगेगी, और वे इस प्रयोग को छोड़ देंगे| लेकिन इस प्रयोग को छोड़ने का मतलब है बहुआयामी परिवर्तन को छोड़ देना| इसलिए इस प्रयोग को आसान बनाने की जरूरत है, जिससे हर कोई इस प्रयोग को सफलतापूर्वक कर पाए|

अपनी ताकत और जरूरत के अनुसार, अब हम सांस पर नियंत्रण के इस प्रयोग को बदलेंगे| यहाँ हम इस बारे में कुछ सुझाव और दिशा-निर्देश जान लेते हैं| इस प्रयोग में, हमें क्या बदलाव करने की अनुमति हैं? और क्या बदलाव करने की अनुमति नहीं है?

हमें किस प्रकार से बदलने की अनुमति हैं?

सही बदलाव—1: अगर हमें दस तक गिनती बोलना मुश्किल लग रहा है, हम दस से कम गिनती बोलेंगे:

  • गिनती बोलें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, छेएएए।
  • केवल एक बार गहरा और लंबा साँस लें|
  • गिनती बोलें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, छेएएए।
  • केवल एक बार गहरा और लंबा साँस लें|
  • गिनती बोलें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, छेएएए।
  • केवल एक बार गहरा और लंबा साँस लें|

सही बदलाव—2: अगर हम बीच में थक जाते हैं—गिनती बोलना बंद करके पूरा सांस लेंगे, और फिर एक से गिनती शुरू करेंगे|

  • गिनती बोलें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, छेएएए।
  • केवल एक बार गहरा और लंबा साँस लें|
  • गिनती बोलें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन। यहाँ हम थक गए, और हमने गिनती बोलना बंद कर दिया|
  • केवल एक बार गहरा और लंबा साँस लें|
  • गिनती बोलें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, छेएएए।
  • केवल एक बार गहरा और लंबा साँस लें|

सही बदलाव—3: अगर हम बीच में थक गए हैं—गिनती बोलना और कम करेंगे|

  • गिनती बोलें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, छेएएए।
  • केवल एक बार गहरा और लंबा साँस लें|
  • गिनती बोलें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, छेएएए।
  • केवल एक बार गहरा और लंबा साँस लें| यहाँ हमें और सांस लेने की इच्छा हो रही है, इसलिए गिनती कम कर देंगे|
  • गिनती बोलें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर।
  • केवल एक बार गहरा और लंबा साँस लें|
  • गिनती बोलें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर।
  • केवल एक बार गहरा और लंबा साँस लें|
  • गिनती बोलें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर।
  • केवल एक बार गहरा और लंबा साँस लें| अगर ठीक लग रहा है, फिर से बढाने की कोशिश कर सकते हैं|
  • गिनती बोलें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, छेएएए।

सही बदलाव—4: अगर हम साधारण आवाज में नहीं बोल पा रहे हैं—फुसफुसाना शुरू कर दें|

साधारण आवाज में बोलते समय, सांस फूलने की अधिक संभावना है| इसलिए बहुत धीमी आवाज में फुसफुसाना शुरू कर सकते हैं|

सही बदलाव—5: अगर हम गिनती नहीं बोल पा रहे हैं—कोई गीत गाना शुरू कर दें|

क्या हम गाना जानते हैं? अगर हम गिनती नहीं बोल पा रहे हैं—हम कोई गीत गाना शुरू कर सकते हैं|

सही बदलाव—6: अगर गला सूख रहा है—पानी पी लें|

अकसर गिनती बोलने में कठिनाई गला सूखने के कारण होती है। कुछ घूंट पानी पीकर फिर गिनती बोलना शुरू कर देना, इसका आसान उपाय है।

हमें किस प्रकार से बदलने की अनुमति नहीं हैं?

गलत बदलाव—1: हम छोटा सा सांस लेकर गिनती आगे बढ़ा देते हैं|

  • गिनती बोली: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, (थक गए छोटा सा सांस ले लिया) छेएएए, साआआआत, आआआठ, नौऔऔऔ, दअअअस।
  • एक बार गहरा और लंबा साँस लिया|
  • गिनती बोली: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, छेएएए, साआआआत, आआआठ, (थक गए छोटा सा सांस ले लिया) नौऔऔऔ, दअअअस।
  • फिर एक बार गहरा और लंबा साँस लिया|

अगर थक गए हैं तो गिनती बीच में छोड़कर सांस लेंगे और फिर एक से ही शुरू करेंगे| देखिए सही बदलाव—2|

गलत बदलाव—2: हम थक जाने पर एक साथ दो-तीन सांस ले लेते हैं|

  • गिनती बोली: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, छेएएए, साआआआत, आआआठ, नौऔऔऔ, दअअअस।
  • दो, तीन, या इससे भी अधिक बार सांस ले लिया|
  • गिनती बोली: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, छेएएए, साआआआत, आआआठ, नौऔऔऔ, दअअअस।

अगर हम बीच में थक गए हैं—गिनती बोलना और कम करेंगे| देखिए सही बदलाव—3:

गलत बदलाव—3: हम सांस को नियंत्रित करने के लिए बहुत जोर लगा रहे हैं|

सांस को नियंत्रित करने का मतलब ताकत का प्रयोग करना नहीं है—क्योंकि सांस को नियंत्रित करने का उद्देश्य ही अपने आप को तनावमुक्त करना है। इसलिए ताकत का प्रयोग न करें। आराम से सांस अंदर लें, और केवल फुसफुसाते हुए गिनती बोलकर सांस बाहर निकालें। साथ-साथ हाथ-पैरों और बाकी सारे शरीर की मांसपेशियों को भी तनावमुक्त करने की कोशिश करें। बेहतर होगा तनावमुक्ति का आसन भी साथ में करें।

गलत बदलाव—4: हम सांस का यह व्यायाम खत्म करने की जल्दी रहे हैं|

हम सांस के इस व्यायाम को करते समय बहुत जल्दी उकता जाते हैं। एक-दो मिनट के बाद ही सोचने लगते हैं कि अब बहुत हो गया—या बाद में कर लूंगा। पहली बार सांस का व्यायाम कम से कम दस मिनट तक किया जाना चाहिए। आधे घंटे करना बेहतर हो सकता है| हम में से कुछ को तो, पहली बार में, दो घंटे लगाने की जरूरत हो सकती है। इसलिए उकताएं नहीं और जल्दबाजी न करें। पहली बार में कम से कम आधे घंटे तक सांस का व्यायाम करें। उसके बाद उठकर खड़े हो जाएं और दो चार कदम चलें।

सांस को नियंत्रण सीखने का हमारा पहला प्रयत्न

यह प्रयोग करते समय आने वाली दिक्कत कितनी बड़ी है?

सांस पर नियंत्रण करने की बारीकियां जानने के बाद, अब हमें सांस को नियंत्रित करने का पहला प्रयत्न करना है| यह पहला प्रयत्न कुछ लोगों के लिए यह आसान हो सकता है, परन्तु बहुत सारे लोगों के लिए इसके मुश्किल होने की भी संभावना है|

क्या हम यह प्रयोग आसानी से कर पा रहे हैं? इसका उत्तर सोच-समझकर दें| यह समझना जरूरी है: सांस को नियंत्रित करने में जितनी अधिक कठिनाई है, उतनी ही अधिक सांस के नियंत्रण की आवश्यकता है—और उतना ही अधिक लाभ सांस का नियंत्रण करने से हमें मिलेगा|

हम यह पहला प्रयत्न आसानी से कर पा रहे हैं

बहुआयामी परिवर्तन अपनाने वाले अधिकतर लोग बिना किसी कठिनाई के सांस पर पहला नियंत्रण स्थापित कर सकते हैं| अगर हमारा नियंत्रण स्थापित हो रहा है, और हमें कोई परेशानी नहीं हो रही है—हमें इन बातों का ध्यान रखते हुए सांस का व्यायाम जारी रखना है:

  • बंद करने की जल्दी न करें। पहले प्रयत्न के दौरान कम से कम ३० मिनट तक इसे जारी रखना है|
  • गिनती बोलना दस तक ले जाने की कोशिश करें: एएएएक, दोओओओ, तीईईईन, चाआआआर, पांआंआंच, छेएएए, साआआआत, आआआठ, नौऔऔऔ, दअअअस।
  • जितना गहरा हो सके उतना गहरा सांस लें|
  • इस क्रम को जारी रखें|
  • बीच-बीच में हम गिनती बोलना दस तक नहीं ले जा पाएंगे| ऊपर लिखे सही और गलत बदलावों को ध्यान में रखें, और उसी हिसाब से बदलाव करने का सोचें|

कुछ देर के बाद तकलीफ महसूस हो रही है

सांस को नियंत्रित करने का हमारा पहला प्रयत्न चल रहा है| कुछ देर के बाद, कुछ लोग तकलीफ का अनुभव करने लगते हैं। सिर भारी होना या सिर दर्द, हाथ पैरों में दर्द, कमर-दर्द, पेट दुखना, चक्कर आना, नींद आना इत्यादि इन तकलीफों में शामिल है। कुछ लोग केवल इतना कहते हैं कि अच्छा नहीं लग रहा है। ध्यान रहे कि इस प्रकार की तकलीफ केवल पहले प्रयत्न के समय ही होगी| मतलब जब हम अगले दिन फिर से सांस को नियंत्रित करेंगे, यह तकलीफ नहीं होगी|

सांस पर नियंत्रण के पहले प्रयत्न के दौरान तकलीफ क्यों होती है?

अगर सांस पर ठीक से नियंत्रण के बावजूद भी तकलीफ हो रही है—इसका कारण समझना जरूरी है। पहले इतना समझ लें कि तनाव के समय हमें दर्द, भूख, प्यास इत्यादि का अहसास नहीं होता है। अब इस तकलीफ का कारण इस प्रकार से समझें। दर्द या तकलीफ हमारे शरीर में पहले से थी, लेकिन तनाव के कारण उसका अहसास नहीं हो पा रहा था। जैसे ही तनाव कम होना शुरू हुआ, तकलीफ का अहसास भी शुरू हो गया। अब यह भी समझ लें कि सांस का व्यायाम जारी रखेंगे तो तकलीफ का अहसास थोड़ी देर में अपने आप समाप्त हो जाएगा।

अगली बार सांस का व्यायाम करते समय, कुछ भी तकलीफ नहीं होगी।

इस तकलीफ से परेशान न हों, और बहुआयामी परिवर्तन विधिपूर्वक अपनाएं। इसके आगे ऐसी परेशानी नहीं होगा। इसका कारण सरल है। बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के बाद तनाव के स्तर को इतना बढ़ने का अवसर नहीं मिलेगा कि वह तनाव भूख, प्यास, दर्द इत्यादि के अहसास को दबा सके।

तनाव का यह स्तर बहुत अधिक भी हो सकता है।

अगर ठीक से सांस का व्यायाम करने के कुछ समय बाद तकलीफ महसूस होने लगे, तो इसका अर्थ है कि तनाव का स्तर अधिक है। तनाव का यह स्तर बहुत अधिक भी हो सकता है। इसके लिए सांस का व्यायाम दो से तीन घंटे तक भी जारी रखने की जरूरत हो सकती है। और पैरासिटामौल की गोलियां और भी खानी पड़ सकती हैं—जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है।

हम यह पहला प्रयत्न नहीं कर पा रहे हैं

सांस को नियंत्रित करने का तरीका ठीक से जानने पर भी, कुछ लोग सांस को नियंत्रित नहीं कर पाते हैं। उनका सांस फूलता है, और उन्हें गिनती बोलने में कठिनाई होती है। कठिनाई का स्तर मामूली भी हो सकता है, और बहुत बड़ा भी हो सकता है। कठिनाई का स्तर कितना भी हो, इस पर काबू पाया जा सकता है। काबू पाने में समय लगता है, और इस बीच सांस पर नियंत्रण की कोशिश (गिनती बोलना) जारी रखना पड़ता है। धीरे-धीरे कठिनाई कम होने लगती है। समय काफी लग सकता है, इसलिए बीच में एक दो बार उठकर चलना फिरना और फिर से बैठकर या लेटकर सांस पर नियंत्रण की कोशिश करना ठीक रहता है। इस कठिनाई को दूर करने के और भी तरीके आगे बताए गए हैं।

नीचे दिए हुए एक या एक से अधिक तरीकों को अपनाकर पहला प्रयत्न सफल बना सकते हैं|

  • कोशिश करना जारी रखें| कुछ घंटे या आधा दिन भी लग सकता है लेकिन सफलता मिल जाएगी|
  • अगर नींद आने लगे, सो जाएं| नींद खुलने के तुरंत बाद, सांस का व्यायाम फिर से शुरू कर दें| नींद खुलने का अर्थ नीचे वाले पैराग्राफ में दिया गया है|
  • जैसा ऊपर के पैराग्राफ में दिया गया है—अगर वैसी तकलीफ होने लगे, पैरासिटामौल की दो गोली लेकर तनाव-मुक्ति का आसन शुरू करें| साथ में सांस का व्यायाम करना भी जारी रखें| तकलीफ पूरी शांत होने तक दोनों क्रियाएँ जारी रखें| इसमें दो से तीन घंटे भी लग सकते हैं| एक घंटा बीतने के बाद, एक गोली पैरासिटामौल और ले लें| बीच-बीच में पानी का घूँट लेते रहें, जिससे गला न सूखे| हर आधे घंटे बाद नीचे उतरकर कुछ कदम चलें, जिससे हमें स्थिति का सही अनुमान लगाने में आसानी होगी| पूरा विवरण तनाव-मुक्ति का आसन : इस अध्याय में दिया गया है|
  • गाना जानने वाले लोग, आधा घंटा गाना या भजन गाएं| उसके बाद तुरंत सांस का व्यायाम शुरू करें| बीच में कोई गैप नहीं रखना है|
  • किसी मित्र को साथ में बैठा लें। अब दोनों एक साथ गिनती बोलकर सांस पर नियंत्रण करने की कोशिश करें। पति-पत्नी साथ मिलकर यह प्रयत्न कर सकते हैं।
  • अगर ऊपर की क्रियाओं से सांस पर नियंत्रण न हो पाए, तो अगले दिन फिर से प्रयत्न करें।
  • अगर इतनी कोशिशों के बाद भी सफलता न मिले तो चौथे अध्याय में बताया गया दूसरा रास्ता चुनें—मतलब चार-पाँच दिन धूम्रपान और यौन क्रियाओं पर नियंत्रण के बाद सांस का व्यायाम करें।

यह प्रयत्न कर सकना असंभव हो सकता है

ऊपर के वीडियो को ध्यान से देखें| दंत-विशेषज्ञों की वेशभूषा और उनके औजारों से घबराकर, यह स्त्री सांस पर से नियंत्रण पूरी तरह से खो देती है| यह पैनिक अटैक का एक उदाहरण है| कुछ लोगों में इस प्रकार का पैनिक अटैक कई दिनों तक या हफ्तों तक भी चल सकता है|

इतने लंबे समय तक चलने का कारण समझने की जरूरत है| साँस पर नियंत्रण खो देने के कारण, कोई भी घबरा जाएगा| यहाँ तक कि आस-पास के लोग भी घबरा जाएंगे| घबराहट के कारण, सांस पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो जाएगा, और सांस पर नियंत्रण खो देने के कारण घबराहट बनी रहेगी| इस दुष्चक्र को तोड़ने के प्रयत्न में हफ्तों भी गुजर सकते हैं| और ये प्रयत्न असफल भी हो सकते हैं|

 

क्या आपने 2019 की मूवी गेम ओवर देखी है? स्वप्ना (तापसी पन्नू) साँस पर से नियंत्रण खो देती है| बहुत सारे लोगों को इस तरह की समस्या होती है, लेकिन कोई प्रामाणिक उपचार न होने के कारण इस तरह की समस्या बनी रहती है| इस जरूरत को पूरा करने में बहुआयामी परिवर्तन पूरी तरह से समर्थ है| शुरुआत साँस पर नियंत्रण करना सीखने से करनी पड़ेगी|

ऐसी समस्या के दौरान सांस का नियंत्रण सीखना असंभव हो सकता हैं

अगर सांस पर नियंत्रण इतना अधिक खराब है कि सांस का नियंत्रण सीखना भी संभव नहीं हो पा रहा है, ऐसी हालत में नीचे लिखे उपाय आजमाए जा सकते हैं|

  • सोकर उठने के तुरंत बाद सांस का नियंत्रण सीखना शुरू करें:
    नींद खुलने के बाद हम अकसर बिस्तर में पड़े रहते हैं| अगर बिस्तर में पड़े रहने के बाद उठेंगे, और आराम से सांस का व्यायाम सीखना शुरू करेंगे, तो इसका फायदा नहीं होगा| हमें नींद खुलने के तुरंत बाद सांस का व्यायाम शुरू कर देना है| बाथरूम का प्रयोग भी सांस का व्यायाम करते-करते ही करें|
  • डॉक्टर कि मदद लें:
    ऐसी स्थिति में डॉक्टर डाएजेपाम का इंजेक्शन देते हैं| इसके बाद पीड़ित शांत होकर सो जाता है| नींद खुलने के तुरंत बाद सांस का नियंत्रण सीखना शुरू किया जाना चाहिए| और सांस का नियंत्रण लगातार बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए| बाथरूम का प्रयोग भी सांस का व्यायाम करते-करते ही करें|

अस्थमा और सांस का नियंत्रण

अस्थमा के रोगियों के लिए भी सांस का नियंत्रण जरूरी है| बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के दौरान, इन रोगियों को जरूरी दवाएं लेते रहना पड़ेगा| ये दवाएं कम होकर बंद हो सकती है| क्या अस्थमा एक असाध्य रोग है?: इस अध्याय में स्पष्ट किया गया है कि अस्थमा पर नियंत्रण और इससे छुटकारा भी संभव है|

अस्थमा के रोगियों के लिए भी सांस पर नियंत्रण बाकी लोगों जैसा ही है| आम तौर पर पीड़ित गिनती बोलने और सांस पर नियंत्रण स्थापित करने की स्थिति में होते हैं| और उन्हें ऊपर वर्णित तकनीक से ही सांस पर नियंत्रण स्थापित करने की राय दी जाती है|

अस्थमा का एक्यूट अटैक

ऊपर के वीडियो में, अस्थमा के एक्यूट अटैक से ग्रस्त कुछ पीड़ितों को दिखाया गया है| ऐसे एक्यूट अटैक को शांत करने के लिए सालब्युटामौल इनहेलर के प्रयोग की सलाह, आम तौर पर दी जाती है| बहुआयामी परिवर्तन इस इनहेलर और बाकी सभी जीवन-रक्षक उपचारों को अपनाने की जोरदार सिफारिश करता है|

सालब्युटामौल इनहेलर: यह इनहेलर हमेशा नीले रंग का ही होता है|

एक्यूट अटैक के समय, इन जीवन-रक्षक उपचारों के साथ-साथ सांस का नियंत्रण भी अपनाया जा सकता है| सांस पर नियंत्रण अपनाने से, एक्यूट अटैक जल्दी शांत होता है और जीवन-रक्षक दवाओं की जरूरत भी कम हो जाती है| नीचे बताए ढंग से सांस को नियंत्रित करने की कोशिश करें:

  • यह तरीका ऊपर बताए गए तरीके से बिलकुल अलग है| किसी दूसरे व्यक्ति या डॉक्टर की देख-रेख में ही इसे करें|
  • स्वाभाविक रूप से गिनती बोलें: एक, दो, तीन, चार, पांच। ध्यान रहे खींच कर गिनती नहीं बोलनी है|
  • जितना गहरा हो सके उतना गहरा सांस लें|
  • स्वाभाविक रूप से गिनती बोलें: एक, दो, तीन, चार, पांच।
  • जितना गहरा हो सके उतना गहरा सांस लें|
  • ऊपर की तरह गिनती बोलते रहें, और गहरा सांस लेते रहें| किसी का सहारा लेकर बिस्तर या कुर्सी से निकलकर फर्श पर खड़े हो जाएं, और एक दो कदम चलने की कोशिश करें|
  • फिर से बिस्तर या कुर्सी पर बैठ जाएं| इस दौरान ऊपर की तरह गिनती बोलना और गहरा सांस लेना जारी रखें|
  • गिनती जोर से बोलने की जरूरत नहीं है| केवल फुसफुसाकर बोलना पर्याप्त है|

यह एक वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित तरीका है| गहरा सांस लेने से फेफड़ों को अधिक ऑक्सीजन मिलाती है, जिससे पीड़ित कि हालत सुधरती है|

सांस पर नियंत्रण करना हमें आ गया है

अब आगे का रास्ता किसी के लिए भी मुश्किल नहीं है

पहली बार सांस पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए मेहनत की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन इसके बाद कभी भी सांस पर नियंत्रण करना बहुत आसान हो जाता है—इसके कई कारण हैं:

  • सबसे प्रमुख कारण है कि हमारे सांस पर हमारा वेहतर नियंत्रण हो जाता है| मतलब हम बेहतर तरीके से सांस लेना शुरू कर देते हैं|
  • हम सांस पर नियंत्रण करना सीख लेते हैं|
  • मन में विश्वास पैदा हो जाता है कि हम सांस पर नियंत्रण कर सकते हैं।

पहली बार सांस का नियंत्रण सीखने के बाद, आगे चलकर दिन में कितनी बार और कितने समय के लिए हमें सांस के इस व्यायाम को करना होगा? इस प्रश्न का उत्तर किसी निश्चित संख्या के रूप में देना यहाँ सम्भव नहीं है। केवल कुछ दिशानिर्देश दिए जा सकते हैं। जो इस प्रकार से हैं।

  • हरेक व्यक्ति की जरूरत अलग-अलग होगी, और उस जरूरत को वह व्यक्ति खुद ही तय करेगा। यह जरूरत समय के साथ बदलेगी। कुल मिलाकर जरूरत समय बीतने के साथ कम होती जाएगी। लेकिन बीच-बीच में, जैसे किसी बीमारी या तनाव की स्थिति में, यह जरूरत बढ़ सकती है और फिर कम हो सकती है। जाहिर है कि ऐसी स्थितियों में सांस के व्यायाम को बढ़ा लेना पड़ेगा।
  • तनाव-मुक्ति का आसन दिन में कितनी बार और कितने समय तक करना है—इस प्रश्न का उत्तर पढ़िए। यहाँ यह ध्यान देने योग्य है कि तनाव-मुक्ति का आसन और सांस का व्यायाम इन दोनों को साथ-साथ करना है।
    इसके अतिरिक्त जब हम तनाव-मुक्ति का आसन नहीं कर रहे हैं, उस समय पर भी सांस का व्यायाम कर सकते हैं। हम किसी भी स्थिति में (बैठे हुए, खड़े हुए, या काम करते हुए भी) सांस का व्यायाम कर सकते हैं। इस व्यायाम को अधिक मात्रा में करने से कोई हानि होने की संभावना नहीं है।
  • वैज्ञानिक दृष्टि से सांस को नियंत्रित करना क्यों जरूरी है? इस परिशिष्ट में सांस के व्यायाम का वैज्ञानिक आधार समझाया गया है। इसे पढ़ें, और तय करें कि हमें सांस के व्यायाम की कितनी जरूरत है। कुल मिलाकर उदासी, चिंता, और भावनाओं के अतिरेक से ग्रसित लोगों को सांस के व्यायाम की जरूरत अधिक होगी। और जैसे-जैसे ये परेशानियां दूर होती जाएंगी, सांस के व्यायाम की जरूरत कम होती जाएगी।




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