बहुआयामी परिवर्तन इन जैसी और भी बहुत सी परिस्थितियों में लाभप्रद है

विद्यार्थी का पढ़ाई में मन नहीं लगता है| मेहनत-मजदूरी करने वाले के हाथ-पैर दुखते हैं| बहुत सारे लोंगों को सिगरेट और शराब की लत है| लत वाली बीमारियों में अब मोबाइल और लैपटॉप भी शामिल हो गए हैं. चिंता, और तनाव; अस्थमा, एंजाइना, कमर-दर्द, माइग्रेन, और मधुमेह−इन सबको मिलकर कुल तेरह स्थितियां हो जाती हैं−जिनका चित्रण यहाँ ऊपर किया गया है| इन सभी पीड़ितों को स्थिर होकर अपनी कठिनाई या बीमारी का मुकाबला करने की जरूरत है| स्थिरता द्वारा मनचाहा परिवर्तन, यही बहुआयामी परिवर्तन है| स्थिरता और परिवर्तन एक दूसरे के विपरीत न होकर सहयोगी हैं|हम स्थिर होकर परिवर्तन लाने की कोशिश करते हैं, जिससे हम और अधिक स्थिर हो सकें|

हमारे दरवाजे पर एक दस्तक ...

मनुष्य सदियों से स्थिरता और परिवर्तन इन दोनों की जरूरत के प्रति जागरूक रहा है| इन दोनों उद्देश्यों को पाने के लिए आदिकाल से लेकर अब तक अनेक प्रकार के इतने मार्ग अपनाए गए हैं, जिनको गिन पाना भी संभव नहीं है| इन आजमाए हुए रास्तों की तुलना में बहुआयामी परिवर्तन बिलकुल नया है, और हमारे दरवाजे पर दस्तक देना शुरू भर कर रहा है|

नयापन नहीं फिर भी अनोखा!

विचारों और भावनाओं पर नियंत्रण, सांस पर नियंत्रण, तनाव-मुक्ति, शारीरिक व्यायाम, तम्बाकू का निषेध —इन सबमें कुछ भी नयापन नहीं है| बहुआयामी परिवर्तन इन्हीं सदियों पुराने और घिसे-पिटे तरीकों को अपनाता हुआ दिखाई देगा| इसलिए पहली नजर में बहुआयामी परिवर्तन में कोई नवीनता नहीं है|

इन घिसे-पिटे तरीकों को छोड़ दें तो बहुआयामी परिवर्तन और सदियों से चाले आ रहे रास्तों के बीच कुछ भी समानता नहीं है| बहुआयामी परिवर्तन बिलकुल अलग है| बहुआयामी परिवर्तन अपनाने वाला व्यक्ति , यह अनोखापन कुछ घंटों या कुछ दिनों में महसूस कर सकता है|

अनोखा होने का कारण समझना आसान है ...

चौबीस घंटे की सारी क्रियाओं को सोची-समझी रणनीति के अनुसार बदलना

बहुआयामी परिवर्तन को अंग्रेजी में multiple activities change intervention कहते हैं| इसका अर्थ बहुत सारी क्रियाओं को एक साथ बदलना| बहुआयामी परिवर्तन के दौरान हम अपनी रोजाना की सामान्य क्रियाओं और कार्यों में, सोची समझी रणनीति के अनुसार बदलते हैं| यहाँ रणनीति महत्वपूर्ण है—इसके साथ ही चौबीस घंटे की सारी क्रियाओं को एक साथ बदलना भी उतने ही महत्त्व का है, जिसके कारण ही हम एक बड़े और मनचाहे परिवर्तन की ओर बढ़ सकते हैं|

लगातार घिसने से पत्थर पर भी रस्सी का निशान बन जाता है| कोई भी काम लगातार करने से, उस काम में महारत हासिल होती है| परन्तु हम कौन सा काम हाथ में लें, यह निश्चित करना पड़ेगा| अपनी जरूरत और अपनी क्षमताओं को ध्यान में रखना पड़ेगा, तभी हमें जो चाहिए वह हासिल हो सकेगा|

कोई भी काम लगातार करने के लिए, स्थिरता चाहिए| लेकिन केवल स्थिरता से काम नहीं चलेगा, साथ में असफलता के कारणों को समझने, और उसके अनुसार अपना रास्ता बदलने की ताकत भी चाहिए| बड़े लक्ष्य को पाने के लिए, बड़े लक्ष्य को छोटे-छोटे भागों में बांटकर, उन छोटे लक्ष्यों को एक-एक करके पाना पड़ता है|

बहुआयामी परिवर्तन हमें वह सभी कुछ देता है—अपने लक्ष्यों को पाने के लिए, जिसकी जरूरत है| इसे अपनाकर हमें स्थिरता मिलती है| हम क्या करें (और क्या न करें), यह निश्चित करने की क्षमता विकसित होती है| साथ ही साथ, असफलता के कारणों को समझाने और उसके अनुसार अपना रास्ता बदलने की ताकत पैदा होती है| इन सभी ताकतों को हम बहुत आगे ले जा सकते हैं| और असंभव लगने वाले लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं|

इस रणनीति के कुछ मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • यह लम्बे समय की या जीवन भर की रणनीति है| मतलब इसका लाभ जीवन भर मिलाने वाला है|
  • इस रणनीति का लाभ बहुत जल्दी मिलता है| कुछ दिनों में या एक दो हफ्तों में, लाभ मिलना आम है| कुछ गंभीर बीमारियों में भी चमत्कारिक लाभ मिलता है|
  • इस रणनीति को पढ़े-लिखे और अनपढ़, अमीर और गरीब, स्त्री और पुरुष सभी अपना सकते हैं|
  • रणनीति तर्क और समझदारी पर आधारित है| यह किसी चमत्कार या अंधविश्वास पर आधारित नहीं है|
  • परिवार के सभी सदस्य इसे एक साथ अपनाएं|

रोजमर्रा के जीवन से कुछ उदाहरण

जहाँ बहुआयामी परिवार्तन लागू होगा

यहाँ आम जीवन के कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैं| इन उदाहरणों द्वारा हम अनुमान लगा सकेंगे कि बहुआयामी परिवर्तन किस प्रकार से बहुत सारे लोगों के जीवन में असाधारण बदलाव का वाहक बन सकता है|

सुषमा को अपने पैरों पर खडा होना है, लेकिन उसका मन पढाई में नहीं है

सुषमा एक दिन पढ़ती है, और दूसरे दिन टीवी देखने में, उपन्यास पढ़ने में, या दोस्तों से बातें करने में निकाल देती है| बहुत कोशिश करने पर भी वह पढाई में नियमित नहीं हो पा रही है| सुषमा मानती है कि नियमित हुए बिना, पढाई में सफलता संभव नहीं है| वह एक समय निश्चित करती है, और उस समय पर पढ़ने बैठती है, लेकिन पढाई खिसकती नहीं है| उसका सिर भारी होने लगता है, और उसे नींद आने लगती है| सिर दर्द से बचने के लिए वह पढाई छोड़कर उठ जाती है|

माँ कहती है: घर को आग भी लग जाए, तो भी विकास मोबाइल नहीं छोड़ेगा

विकास हर समय मोबाइल से चिपका रहता है| फेसबुक और व्हाट्सएप से मन भर जाता है तो यूट्यूब पर वीडिओ देखता है| उससे भी मन भर जाता है तो मोबाइल गेम्स खेलने लगता है| इस लत का बुरा असर, विकास के स्वास्थ्य पर और पढ़ाई पर पड़ रहा है| एक बार एक दोस्त ने विकास का मोबाइल छिपा दिया, तो विकास ने उसे जान से मार डालने की धमकी दे डाली| विकास के माता-पिता उसे समझा कर हार चुके हैं|

हाथ-पैरों का दर्द: किशोरी महीने में दस दिन काम पर नहीं जा पाती

किशोरी मेहनत-मजदूरी करके अपने अंधे पति और दो बच्चों का पेट पालती है| लेकिन उसके हाथ-पैर बहुत दुखते हैं| डॉक्टर कहते हैं कि उसे कोई बीमारी नहीं है, लेकिन फिर भी किशोरी महीने में आठ-दस दिन काम पर नहीं जा पाती है| ऐसे में घर चलाना मुश्किल हो जाता है| किशोरी कोई रास्ता ढूंढ रही है जिससे उसका पति भी कुछ कमाई कर सके| लेकिन वह अपने पति को अकेले घर से बाहर जाने देने से डरती है|

नारायण इन्सुलिन के इंजेक्शन के सहारे है

नारायण को मधुमेह है| लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं होती है| क्योंकि मधुमेह के साथ-साथ नारायण को मोटापा, ब्लडप्रेशर, और ह्रदय-रोग भी है| चलने-फिरने में नारायण का सांस फूलता है| तला-भुना और मीठा खाना उसे भाता है| नतीजतन नारायण का वजन बढ़ता जा रहा है, और उसकी डाइबिटीज कंट्रोल में नहीं रहती है| नारायण संत-महात्माओं के चक्कर लगा रहा है, क्योंकि डॉक्टरों ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं|

घर का खर्च पत्नी चलाती है; घर का बहुत सारा सामान बिक चुका है, पर देव दारू नहीं छोड़ पा रहा है

देव पढ़ा-लिखा है, लेकिन दारू की लत ने उसका और उसके परिवार का जीवन बरबाद कर दिया है| उसकी अच्छी नौकरी छूट गई| घर का खर्च चलाने के लिए पत्नी दूसरों के कपडे सिलती है, और एक दूकान में भी काम करती है| देव शराब के नशे में धुत रहता है, और उसकी पत्नी काम में व्यस्त रहती है| बच्चे आवारा की तरह घर से बाहर घूमते रहते हैं| इतना सब होने पर भी देव की लत नहीं छूटती है|

दशरथ पिछले चालीस सालों से बीड़ी छोड़ना चाहता है

दशरथ साठ साल का होने वाला है| वह पिछले पैंतालिस सालों से बीड़ी पी रहा है, और लगभग चालीस सालों से बीड़ी छोड़ने की कोशिश कर रहा है| उसकी पत्नी दमे के कारण चल बसी| बीड़ी दशरथ पीता था, लेकिन धुएं के कारण दमे की परेशानी उसकी पत्नी को होती थी| दशरथ अपनी पत्नी को प्यार करता था, फिर भी वह बीड़ी छोड़ न सका| हालाकि पत्नी के कहने पर शराब पीना उसने छोड़ दिया| दशरथ का मानना है कि तम्बाकू छोड़ना शराब छोड़ने के मुकाबले बहुत मुश्किल है|

निखिल, एक शिक्षक, तनाव का शिकार, वह हर बात में गुस्सा करता है. उसे गंभीरता से लेने वाले कम हैं

घर में भी और स्कूल में भी, निखिल बात-बात में भड़क उठता है| कई बार तो वह गाली-गलौज और मार-पीट भी कर बैठता है| थोड़ी देर बाद पछताता है और माफी भी मांग लेता है| उसका सिर दुखता है और कई बार रात को नींद भी नहीं आती है| उसे भूख अधिक लगती है, और उसका वजन बढ़ रहा है| उसे महंगी चीजें खरीदने का शौक है| कर्जा लेकर एक बड़ी गाड़ी खरीद ली, लेकिन किश्त चुकाना उसके लिए मुश्किल हो रहा है|

कमला के पास सुकून के सिवा सब कुछ है| वह चिंता की बीमारी से पीड़ित है

कमला पैंसठ साल की है| उसके पति की मृत्यु एक सड़क दुर्घटना में हुई| तब से पंद्रह साल बीत गए, लेकिन कमला को हर समय अनहोनी का डर सताता रहता है| कमला ने मुश्किल समय देखा है, लेकिन आज उसके पास पति को छोड़कर सब कुछ है| फिर भी कमला परेशान रहती है| वह बुरे वक्त की यादों से उबर नहीं पाई है| वह रात में उठकर बैठ जाती है, और रोने लगती है| इसका बुरा असर उसके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है|

भौमिक रोजाना 8 से 10 घंटे इन्टरनेट से चिपका रहता है

भौमिक सब्जी-भाजी से लेकर दवाइयों तक सब-कुछ ऑनलाइन खरीदता है| हाल ही में उसके घर के ए सी का कंप्रेसर खराब हो गया, वह भी उसने ऑनलाइन खरीद लिया| ऑनलाइन खरीदारी के अलावा भी इन्टरनेट पर कोई जानकारी पानी हो तो वह भौमिक के लिए चुटकियों का काम है| लेकिन इन्टरनेट से चिपके रहने के कारण, भौमिक बहुत सी जरूरी चीजों की ओर कम ध्यान दे पाता है| उसका एक भी मित्र नहीं है|

माइग्रेन के कारण अनुपम की नौकरी चली गई

अनुपम को माइग्रेन का दौरा अचानक पड़ जाता है, और दो-तीन दिनों तक चलता है| कई बार तो हफ्ता-भर भी निकल जाता है| ऐसे में अनुपम अँधेरे कमरे में चुप-चाप लेटी रहती है, और दर्द की गोलियां खाती रहती है| माइग्रेन के दौरे के समय में, अनुपम खाना-पीना भी टालती है| माइग्रेन के कारण अनुपम का जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है| अनियमितता के कारण ही उसे नौकरी से भी निकाल दिया गया| वह नई नौकरी ढूंढ रही है|

आरुशी के जीवन का सब-कुछ कमर-दर्द ने छीन लिया है

आरुशी सुंदर और पढ़ी-लिखी है| उसके दो प्यारे-प्यारे बच्चे हैं, और बेहद प्यार करने वाला पति है| आरुशी भी अपने परिवार के लिए बहुत कुछ करना चाहती है| लेकिन पिछले कई सालों से वह कमर-दर्द से लाचार है| बहुत सारे उपचार करा लिए, लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ| डॉक्टर अब सर्जरी की बात कर रहे हैं, लेकिन सर्जरी का नाम सुनते ही आरुशी को घबराहट होने लगती है| पढ़ी-लिखी और समझदार आरुशी मन्त्र-तंत्र और पूजा-पाठ के चक्कर में फंस गई है|

सुरेखा टेनिस खिलाड़ी बनाना चाहती है, लेकिन माँ-पिता आस्थमा के कारण उसे घर से बाहर जाने नहीं देते

सुरेखा को उसके माँ-पिता बेहद प्यार करते हैं| वे सुरेखा की किसी भी बात को टालने से पहले दस बार सोचते हैं| इसके बावजूद सुरेखा एक कैदी की तरह महसूस करती है| क्योंकि उसके खाने-पीने, और घर से बाहर निकलने पर, अनेक प्रकार की पाबंदियां लगाई जाती हैं| थोड़ी से सर्दी-खांसी होने पर उसे डॉक्टर के पास ले जाया जाता है| माँ-पिता डरते हैं कि कहीं सुरेखा को अस्थमा का दौरा न पड़ जाए|

एंजाइना के लिए डॉक्टरों ने कहा है: एंजियोप्लास्टी या फिर बाईपास सर्जरी

मनमोहन पुलिस कांस्टेबल है| कठिन और तनावभारी जिन्दगी के बदले में उसे एंजाइना की बीमारी मिली है| उसके और भी कई सहकर्मी एंजाइना का शिकार हैं| सबकी कहानी एक जैसी है| डॉक्टरों की सलाह होती है: एंजियोप्लास्टी या फिर बाईपास सर्जरी| सरकारी अस्पतालों में मरीजों की लंबी लाइन है| वहां मनमोहन का नंबर आने में कई महीने लगेंगे| प्राईवेट एंजियोप्लास्टी का खर्च, मनमोहन की ताकत के बाहर है| वह कर्ज लेने की सोच रहा है|

मुझे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करनी है|

जीवन एक ही बार मिलता है| बहुत सारे लोग इस जीवन से कुछ बड़ा हासिल करना चाहते हैं, परन्तु इसके साथ-साथ वे लंबी छलांग लगाने से भी डरते हैं| दूसरे लोग हम पर हँसेंगे, यह भावना भी बहुत सारे लोगों को पीछे खींच लेती है| इन सब भावनाओं के चलते, बहुत सारे लोगों को अपना लक्ष्य चुनने में परेशानी का सामना करना पड़ता है| लक्ष्य चुनने का बाद भी उनके मन में अविश्वास बना रह सकता है, जो लक्ष्य की प्राप्ति में बाधक सिद्ध होता है|

घर के कई सदस्य एक साथ बहुआयामी परिवर्तन को अपनाएं

घर के कई या सभी सदस्यों को एक साथ बहुआयामी परिवर्तन अपनाने की सलाह दी जाती है| इसके कई कारण है| एक से अधिक सदस्यों को बहुआयामी परिवर्तन का लाभ मिलने की संभावना है| उदाहरण के लिए माँ को कमर-दर्द, पिता को तम्बाकू की लत, और बेटी को अस्थमा हो सकता है| एक साथ मिलकर बहुआयामी परिवर्तन अपनाना आसान है| सब एक साथ सीखें तो एक-दूसरे की गलतियों की तरफ इशारा कर सकते हैं, जिससे गलती होने की संभावना कम हो जाती है| एक साथ अपनाने पर एक-दूसरे की कठिनाइयों और एक-दूसरे में आ रहे परिवर्तनों को समझने में आसानी होगी|

बहुआयामी परिवर्तन का एक परिचय

बहुआयामी परिवर्तन क्या है? इस परिवर्तन का क्या आधार है? इस परिवर्तन को कैसे अपनाना है और किसे-किसे अपनाना है? बहुआयामी परिवर्तन से, हमें क्या लाभ मिल सकता है? इस प्रकार के अनेक प्रश्नों का उत्तर जानने की उत्सुकता हमारे भीतर होगी| बहुआयामी परिवर्तन का परिचय बहुत गंभीरता से ऐसे बहुत सारे प्रश्नों का उत्तर देगा| कुछ समय निकालकर इस वेबपेज को पढ़ें, जिसे एक निबंध के रूप में लिखा गया है| इसे पढ़कर बहुआयामी परिवर्तन के पूरे स्वरूप का अनुमान हम कर सकेंगे|

क्या मुझे बहुआयामी परिवर्तन अपनाने की जरूरत हो सकती है?

इस वेबपेज पर मूवीज की कुछ क्लिप्स हैं| इन क्लिप्स में कुछ पात्रों के जीवन की झलक देखने को मिलती है| कुछ पात्रों के जीवन में मजबूती दिखलाई देती है| बहुआयामी परिवर्तन द्वारा हम ऐसी मजबूती पा सकते हैं| कुछ पात्रों के जीवन में, हम कमजोरी या कठिनाइयां देख सकते हैं| बहुआयामी परिवर्तन द्वारा हम इन कमजोरियों और कठिनाइयों से ऊपर उठ सकते हैं| इन क्लिप्स को देखने के बाद हम पूरी मूवी देखने का मन बना सकते हैं, और फिर यह निर्णय कर सकते हैं कि हमें या हमारे परिवार के किसी सदस्य को बहुआयामी परिवर्तन अपनाने की जरूरत हैं या नहीं|

बहुआयामी परिवर्तन का वैज्ञानिक और सैद्धांतिक परिपेक्ष्य

बहुआयामी परिवर्तन किसी अंधविश्वास या रूढी पर आधारित नहीं है| यह परिवर्तन पूरी तरह से वैज्ञानिक है| यहाँ इस परिवर्तन के वैज्ञानिक और सैद्धांतिक आधार को परखने और समझने की कोशिश की गई है| बहुआयामी परिवर्तन कोई मेडिकल इंटरवेंशन न होकर एक सामाजिक हस्तक्षेप है| फिर भी इस हस्तक्षेप का वैज्ञानिक और सैद्धांतिक आधार समझने के लिए, यहाँ हम एक मेडिकल मॉडल का प्रयोग कर रहे हैं| बहुआयामी परिवर्तन बहुत साधारण लगता है| फिर भी इतने सारे रोगों में और दूसरी स्थितियों में, बहुआयामी परिवर्तन किस प्रकार से असाधारण दिखाई देने वाले परिणाम देता है—वैज्ञानिक और सैद्धांतिक परिपेक्ष्य जानकर हम यह सब समझ पाएँगे|

अत्याधुनिक अस्पतालों में हो रहे उपचारों का अत्यंत साधारण पर्याय

तकनीकी रूप से सुसज्ज अत्याधुनिक अस्पतालों में आज की बड़ी बीमारियों का उपचार बड़े-बड़े विशेषज्ञों द्वारा किया जा रहा है| इन बीमारियों में एंजाइना, अस्थमा, कमर-दर्द, और डिप्रैशन शामिल हैं| इन असाधारण रोगों का उपचार अत्यंत साधारण लगने वाले बहुयामी परिवर्तन द्वारा कैसे संभव है| यह प्रश्न हमारे मन में जरूर उठ रहा होगा| इससे भी आगे बढकर, बहुआयामी परिवर्तन आधुनिक उपचारों से बेहतर होने का दावा करता है| इन दावों के पीछे की सच्चाई जानना जरूरी है, और यही प्रयत्न यहाँ किया गया है| इस मार्गदर्शिका के परिशिष्ट वाले भाग में कुछ बीमारियों का विशेष उल्लेख किया गया है—एंजाइना, अस्थमा, कमर-दर्द, डिप्रैशन, और तम्बाकू की लत|

बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के लिए मार्गदर्शिका

बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के लिए मार्गदर्शिका बनाई गई है| इस मार्गदर्शिका के तीनों चरण इस वेबसाइट पर उपलब्ध हैं| बहुआयामी परिवर्तन का पूरा लाभ उठाने के लिए तीनों चरणों को अपनाना जरूरी है| तीनों चरणों के दौरान हमें क्या-क्या करना है, और उसके क्या परिणाम मिलेंगे—इसका पूरा विवरण यहाँ दिया जा रहा है|...

पहले चरण के दौरान, हम सांस का व्यायाम और तनाव-मुक्ति का आसन सीखते हैं| शारीरिक व्यायाम करने की शुरुआत करते हैं| तम्बाकू और शराब का प्रयोग पूरी तरह से बंद करना जरूरी है| सेक्स (यौन) क्रियाओं और भावनाओं को काबू करना—यह बहुआयामी परिवर्तन की विशेषता है, और यह पहले चरण से ही शुरू हो जाता है|

पहला चरण अपनाने के साथ-साथ, हमें अपने आप में एक बड़ा बदलाव महसूस होता है| स्थिरता लगती है, अपने-आप पर नियंत्रण लगता है, और एक नई ताकत अपने अन्दर जागनी शुरू होती है| साथ ही साथ हमें लगने लगता है कि हम अपनी समस्याओं को दूर कर आगे बढ़ सकेंगे|

दूसरे चरण की शुरुआत में, हम हमारी पुरानी तकलीफों को भूलने का एक बहुत असरदार तरीका सीखते हैं—यह तरीका बहुआयामी परिवर्तन की खासियत है| पुरानी तकलीफों को भूलकर ही, हम जीवन में एक नई शुरुआत कर सकते हैं—और यही दूसरे चरण में होता है|

दूसरे चरण का एक और लक्ष्य हैं, भावनाओं पर नियंत्रण| इसमें सेक्स (यौन) भावनाओं पर नियंत्रण भी शामिल है| इस चरण के दौरान हमें लगने लगता है कि हम भावनाओं की गुलामी से निकल रहे हैं, और अपने उद्देश्यों को पाने के लिए, भावनाओं का उपयोग शुरू कर सकते हैं|

तीसरे चरण में हमारे अन्दर एक गहरा परिवर्तन आता है| बहुआयामी परिवर्तन हमारे जीवन का एक भाग बन जाता है, और हम मजबूती से अपने लक्ष्यों को पाने की ओर बढ़ते हैं|

हमारे आस-पास के लोग समझ जाते हैं कि हम बदल गए हैं, और हमारे प्रति उनका व्यवहार बदलने लगता है| अपने आस-पास के लोगों के प्रति हमारा नजरिया भी बदल जाता है, और हम उनके साथ सहयोग करने लगते हैं|हमारा बोलने, उठने-बैठने, चलने-फिरने का तरीका बदल जाता है| हम अपनी बात बेहतर तरीके से समझा सकते हैं, और दूसरों को आसानी से समझ सकते हैं|





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