वैज्ञानिक दृष्टि से सांस को नियंत्रित करना क्यों जरूरी है?

हम सभी सांस लेने और छोड़ने की क्रिया को समझते हैं। बहुत से लोग यह भी जानते हैं कि सांस के द्वारा हम ऑक्सीजन अंदर लेते हैं, और कार्बन-डाइ-ऑक्साइड बाहर निकालते हैं। हम जानते हैं कि शारीरिक श्रम करते समय, जैसे सीढ़ियां चढ़ते समय, सांस तेजी से चलती है क्योंकि हमें अधिक ऑक्सीजन की जरूरत होती है। क्या हमने कभी सोचा है कि चिंता, डर, और क्रोध जैसी भावनाओं के आवेग में भी हमारा सांस तेजी से चलने लगता है? जाहिर है भावनाओं के आवेग में शरीर को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत नहीं होती है फिर भी सांस तेजी से चलता है। भावनाओं का आवेग न भी हो, तब भी कुछ लोग जरूरत से ज्यादा गति से सांस लेते रहते हैं। क्या जरूरत से अधिक सांस लेना, हमारे लिए हानिकारक हो सकता है? अगर ऐसा है, तब हमें अपने सांस को नियंत्रित करने की जरूरत पड़ेगी।

सांस पर नियंत्रण खोने से संबंधित ये कुछ वीडियो क्लिप्स देखिए

 

वर्ष २०१९ की हिन्दी मूवी गेम ओवर की क्लिप—जिसमें स्वपना (तापसी पन्नू) अपने सांस पर नियंत्रण खो देती है|

 

हिंदी मूवी 3 ईडियट्स में राजू रस्तोगी (शर्मन जोशी) की माँ की खांसी का कारण घर की परेशानियाँ हैं|

 

दांत के उपचार के दौरान यह स्त्री डॉक्टरों की वेशभूषा और उनके औजारों से घबड़ा जाती है, और तेजी से सांस लेना शुरू कर देती है| पैनिक और घबराहट में बहुत से लोगों का सांस पर से नियंत्रण समाप्त हो जाता है|

अनियंत्रित सांस से हमारे शरीर में होने वाले रासायनिक परिवर्तन

हम यहां पर सांस को बीमारियों से जोड़ने वाली एक वैज्ञानिक कड़ी की बात कर रहे हैं। हम यह जानते हैं कि सांस के साथ कार्बन-डाइ-ऑक्साइड शरीर से बाहर निकलती है। अगर हम जल्दी-जल्दी और गहरा-गहरा सांस लेते हैं तो जरूरत से ज्यादा कार्बन-डाइ-ऑक्साइड शरीर से बाहर निकल जाती है। इससे हमारे रक्त में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड की कमी हो जाती है। कोई भी रसायन-शास्त्री यह बता सकता है कि कार्बन-डाइ-ऑक्साइड एक अम्ल की भांति काम करती है, और रक्त की अम्लता बनाए रखती है। कार्बन-डाइ-ऑक्साइड की कमी होने से रक्त में क्षार की मात्रा बढ़ जाती है और रक्त का पी-एच नॉरमल से अधिक हो जाता है। दूसरा रासायनिक परिवर्तन है रक्त में कैल्शियम के स्तर का कम हो जाना|रक्त में उपस्थित कैल्शियम, प्रोटीन द्वारा सोख लिया जाता है| रक्त में आने वाले इन परिवर्तनों के कारण, तरह-तरह के लक्षण हमारे शरीर में पैदा हो जाते हैं। इनमें से कुछ खतरनाक भी हो सकते हैं|

अनियंत्रित सांस से पैदा होने वाले लक्षण

सांस के अनियंत्रित होने से सारा शरीर प्रभावित होता है|

  • सांस तेजी से चलने के कारण, हम बहुत सारी हवा निगल सकते हैं| यह निगली हुई हवा, पेट के रास्ते आंतों में होती हुई, गुदा के रास्ते शरीर से बाहर निकलती है|इसके कारण पेट फूलना और भारी होना, डकार, और उदरवायु (पाद) जैसे विकार पैदा हो सकते हैं|मुंह के रास्ते से वायु का प्रवाह बढ़ने के कारण, और चिंता के कारण, मुंह सूखना और हलक सूखना जैसे लक्षण पैदा हो जाते हैं|
  • बहुत से लक्षण रक्त में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड की कमी के कारण होते हैं| कार्बन-डाइ-ऑक्साइड कम हो जाने से मस्तिष्क को जाने वाले रक्त की मात्रा कम हो जाती है| जिसके कारण कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, बेहोशी, सांस लेने में दिक्कत, घबराहट, उलझन, और उत्तेजना जैसी परेशानियां हो सकती हैं|वास्तविकता से हमारा संबंध टूट सकता है, और हम भ्रमित हो सकते हैं|
  • रक्त में कैल्शियम की कमी से हमारा नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है| इन लक्षणों में से कुछ का अनुभव हम अपने ऊपर किए जाने वाले प्रयोग के दौरान कर सकेंगे—हाथ-पैरों और चेहरे पर चींटी चलना या बधिरता का अहसास, हाथ पैरों में जकड़न या ऐंठन, हाथ-पैरों और चेहरे की मांसपेशियों का फड़कना| कैल्शियम की कमी से होने वाले ये लक्षण कभी-कभी बहुत डरावने और खतरनाक भी हो सकते हैं| जैसे मिरगी (इपिलेप्सी) का दौरा पड़ सकता है| कुछ मामलों में मृत्यु भी हो सकती है|
  • तेजी से सांस चलने के कारण सांस लेने से जुडी मांसपेशियाँ थक सकती हैं| इसके कारण हमें सांस फूलने का अहसास होने लगता है| छाती में दर्द शुरू हो सकता है| रक्त में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड की कमी के कारण सांस की नालियां सिकुड़ कर छोटी हो सकती हैं| जिसके कारण सांस लेते समय सीटी बजने जैसी आवाज आती है, और हमें अस्थमा की शंका होने लगती है|
  • रक्त में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड की कमी के कारण हृदय और मस्तिष्क का रक्त प्रवाह कम हो जाता है| सैद्धांतिक रूप से इसके कारण एंजाइना, हार्ट अटैक, या लकवा हो सकता है|
  • आम तौर पर होने वाले लक्षण मामूली होते हैं, परन्तु शरीर के अनेक हिस्सों से जुड़े हो सकते हैं| जाहिर है कि किसी भी दवाई से ये लक्षण दूर नहीं हो पाते हैं, और हम किसी असाध्य रोग की शंका अपने मन में पाल लेते हैं। जिसके कारण हमारी चिंता बढ़ जाती है, जो इन लक्षणों को और बढाने का काम करती है|

हम अपने आप पर कुछ प्रयोग कर सकते हैं

☃ सावधानी: हृदय या फेफड़ों की किसी बड़ी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति इस प्रयोग को न करें। सिरदर्द होने की स्थिति में भी इस प्रयोग को न करें। इन दशाओं में हम परिवार के किसी अन्य सदस्य द्वारा प्रयोग करवाकर उसका अनुभव जान सकते हैं।

☃ सावधानी: अधिक तकलीफ महसूस होने पर, प्रयोग की क्रिया को तुरंत बंद कर दें।

█ प्रयोग - तीस से साठ सैकंड तक तेज गति से और लम्बा-लम्बा सांस लें। इस दौरान क्या हमें कोई परेशानी महसूस होती है, इसका ध्यान करें। अधिकतर लोगों को मामूली परेशानी का अनुभव होगा—जैसे कि हाथ पैरों में चींटियां चलना या सिर भारी हो जाना। कुछ लोगों का सिर दुखना, छाती दुखना, या पेट दुखना शुरू हो सकता है। कुछ लोगों को कोई भी परेशानी का अनुभव नहीं होगा।

परिणाम - तेजी से लम्बा-लम्बा सांस लेने से, हमें परेशानी का अनुभव हो सकता है। कुछ लोगों को अधिक परेशानी भी हो सकती है, जबकि कुछ लोगों को कुछ भी परेशानी अनुभव नहीं होगी।

█ प्रयोग - ऊपर के प्रयोग से हुई किसी परेशानी को दूर करने के लिए, एक दूसरा प्रयोग करें। मार्गदर्शिका के पहले चरण के चौथे अध्याय में बताए गए तरीके से धीमा और नियंत्रित सांस लेना शुरू करें। कुछ ही देर में ऊपर के प्रयोग से हुई परेशानी दूर हो जाएगी।

पर हम तो जल्दी-जल्दी और गहरा-गहरा सांस नहीं लेते हैं!

पैनिक अटैक, क्रोध, और चिंता के आवेग में, हम गहरा और तेज सांस लेते हैं। यही बात थोड़े समय के गहन शारीरिक दर्द पर भी लागू होती है। परंतु क्रोध या चिंता या उदासी या दर्द, पुराना यानी क्रॉनिक भी हो सकता है। और ऐसी क्रॉनिक स्थितियों में हमारा सांस लम्बे समय तक अनियंत्रित बना रहता है। हमें ऐसा बिल्कुल नहीं लगता है कि हमारे सांस में कोई भी खराबी है—मतलब, हमें सांस तेज और गहरा नहीं लगता है। परंतु सच्चाई यह है कि हमारा सांस सामान्य की तुलना में तेज और गहरा होता है। या बीच-बीच में थोड़ा तेज और गहरा हो जाता है। इस थोड़े से तेज और गहरे सांस का प्रभाव भी बुरा हो सकता है, और हम कई लक्षणों की गिरफ्त में आ सकते हैं। इसलिए अपने सांस को देखकर खुद यह निर्णय करना मुश्किल है कि सांस में कोई दोष नहीं है।

खराब मानसिक स्थिति, दर्द, और अनियंत्रित सांस का एक चक्रव्यूह!

अब हमारे लिए खराब मानसिक स्थिति, दर्द, और सांस के चक्रव्यूह को समझना आसान है। उदासी, चिंता, क्रोध, या दर्द जैसी भावनाएं, हमारे सांस को अनियंत्रित बनाती हैं। अनियंत्रित सांस अपनी ओर से कई प्रकार के लक्षणों को जन्म देता है। ये लक्षण नींद, भूख, व कार्य-क्षमता में बाधा पैदा करते हैं। हमें अपने भीतर कमजोरी लगती है, और किसी बीमारी की शंका पैदा होती है। हम दवाइयां लेते हैं, लेकिन कुछ फायदा नहीं होता है। नतीजा एक ही हो सकता है—वह है, उदासी, चिंता, क्रोध, या दर्द में इजाफा। यह इजाफा सांस को और भी अधिक अनियंत्रित कर सकता है, और इस प्रकार से हम एक चक्रव्यूह में फंस सकते हैं। इस चक्रव्यूह का परिणाम भयंकर भी हो सकता है और तरह-तरह के गम्भीर रोग हमें घेर सकते हैं, जिनमें अस्थमा, कमर-दर्द, और हृदय-रोग शामिल हैं।

अगर हम इस प्रकार की बीमारियों से पीड़ित हैं, इसकी प्रबल संभावना है कि हम इस चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं। इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने का रास्ता बहुआयामी परिवर्तन है। सांस पर नियंत्रण इस परिवर्तन का एक भाग है, जिसे पहले चरण के चौथे अध्याय में विस्तार से बताया गया है।

सांस के नियंत्रण को बेहतर बनाएँ

नार्मल डिस्ट्रीब्यूशन या बैल कर्व

ऊपर के चित्र को ध्यान से देखें| इस घंटीनुमा चित्र के द्वारा दुनिया के सारे लोगों का वजन और उनकी लंबाई प्रदर्शित की जा सकती है| दुनिया के सारे लोगों की गुणवत्ता या उनकी इंटेलीजेंस भी प्रदर्शित की जा सकती है| कोई भी गुण ले लें, अस्सी प्रतिशत से भी अधिक लोग इस कर्व के बीच वाले हिस्से में आयेंगे, और सामान्य कहलायेंगे| उदाहरण के लिए अस्सी प्रतिशत से अधिक लोग सामान्य लंबाई वाले होंगे| दस प्रतिशत से कम लोग लम्बू होंगे| और दस प्रतिशत से भी कम लोग ठिगने होंगे| बाकी गुणों के लिए भी जनसंख्या इसी प्रकार से विभाजित होगी|

अब सांस के नियंत्रण की गुणवत्ता पर आते हैं| अस्सी प्रतिशत से अधिक लोगों को अपने सांस पर नियंत्रण की दृष्टि से सामान्य माना जा सकता है| लगभग दस प्रतिशत लोगों का सांस पर नियंत्रण बहुत खराब होगा| और बाकी के दस प्रतिशत का सांस पर नियंत्रण बहुत अच्छा होगा| हम ऊपर तीन वीडियो देख चुके हैं| इनमें दिखलाए गए पात्र सांस पर नियंत्रण की दृष्टि से सबसे खराब वाली श्रेणी में आयेंगे| इस सबसे खराब श्रेणी में आने वाले लोगों को निश्चित रूप से, अपना सांस पर नियंत्रण बेहतर बनाने की जरूरत होगी|

अब सबसे खराब श्रेणी को छोड़कर बीच वाली सामान्य श्रेणी पर आते हैं| यह बहुत बड़ी श्रेणी है, जिसे फिर से तीन भागों में बांटा गया है—सामान्य, सामान्य से कुछ बेहतर, और सामान्य से कुछ खराब| इन तीनों सामान्य श्रेणियों वाले लोग भी अपने सांस के नियंत्रण को बेहतर बना सकते हैं, और सबसे ऊंची श्रेणी में आने की कोशिश कर सकते हैं|

सामान्य श्रेणी में आने वाले लोग, सामान्य से बेहतर बनने की कोशिश कर सकते हैं|

 




मार्गदर्शिका