पहले चरण में प्रवेश

क्या हम बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के लिए तैयार हैं?

हम बहुआयामी परिवर्तन को समझ चुके हैं, और उसे अपनाना चाहते हैं तो आगे पढ़ें|

अगर हम बहुआयामी परिवर्तन को और अधिक समझना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करें—बहुआयामी परिवर्तन इन जैसी और भी बहुत सी परिस्थितियों में लाभप्रद है|

पहले चरण में हमें अपने में क्या परिवर्तन लाने हैं?

नीचे लिखे बदलावों को हमें पहले चरण के दौरान अपनाना है| इनका विस्तृत विवरण इस मार्गदर्शिका में उपलब्ध है|

ऊपर की सभी क्रियाओं को एक साथ बदलना क्यों जरूरी है?

ऊपर की सभी क्रियाओं को एक साथ बदलना आसान है, और एक-एक करके बदलना मुश्किल है—इसलिए इन सभी को एक साथ बदलने की सलाह जोर देकर दी जा रही है।

अगर एक साथ बदलना संभव न हो पा रहा हो, तो यौन (सैक्स) क्रियाओं और भावनाओं पर नियंत्रण, तम्बाकू का निषेध, और पैरासिटामौल के उपयोग से शुरू करें—इसके बाद धीमा और नियंत्रित साँस जोड़ें,और अगले चार-पाँच दिन के दौरान बाकी के बदलाव भी जोड़ दें। इसके बाद और चार-पाँच दिन तक सभी बदलावों को एक साथ अपनाते हुए चलें। इस प्रकार से आठ-दस दिनों में पहला चरण पूरा हो जाएगा।

पहले चरण में आने वाली कठिनाइयाँ

पहले चरण का सबसे कठिन भाग है यौन (सैक्स) क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण। लेकिन पहले चरण के अंत में (लगभग आठ-दस दिन में) नियंत्रित रूप से सैक्स क्रियाऐं प्रारम्भ की जा सकेंगी। हमारा लक्ष्य सैक्स क्रियाओं की अधिकता न रहकर गुणवत्ता रहेगा। हमें लगेगा कि तम्बाकू का पूर्ण निषेध इस चरण का सबसे कठिन भाग होगा, परन्तु बहुआयामी परिवर्तन अपनाने वाले अधिकतर लोग तम्बाकू छोड़ना बेहद आसान पाते हैं|

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पहले चरण के लिए पांच से दस दिन का समय लगेगा

बहुआयामी परिवर्तन के पहले चरण को अपनाने के लिए पांच से दस का समय लगेगा| लेकिन विधिपूर्वक इस चरण को अपनाने के बजाय अपनी मनमानी करने के कारण यह समय लंबा हो सकता है| हमें पहले चरण को दोबारा करने की जरूरत हो सकती है, इसमें लगने वाला समय दोगुना हो सकता है| सही तरीके से बहुआयामी परिवर्तन अपनाना जरूरी है| लापरवाही से काम नहीं चलेगा|

बहुआयामी परिवर्तन को विश्वास के साथ अपनाने की जरूरत है

कोई भी नया काम करने के लिए, उस काम को विधिपूर्वक करना जरूरी है, जिसके लिए निष्ठा और विश्वास जरूरी है| जैसे एक लेखक नई पुस्तक लिख रहा है| उसे विषय की पूरी जानकारी एकत्र करनी पड़ेगी, एक रूपरेखा बनानी पड़ेगी, और फिर लिखने का काम शुरू होगा|  इतना सब करने के लिए लेखक को यह विश्वास होना चाहिए कि वह पुस्तक पूरी कर सकेगा, और लोग उसे पढ़कर लाभ उठा सकेंगे| जैसे एक डॉक्टर अपनी पत्नी, पुत्र या पुत्री, या किसी और निकट व्यक्ति की सर्जरी करने वाला है| उसे विश्वास होना चाहिए कि उसके हाथ नहीं कांपेंगे| चाहे तैर कर इंग्लिश चैनल पार करना हो या हिमालय की चोटी पर चढ़ना हो, विश्वास तो जरूरी है|

आम तौर पर लम्बे और मुश्किल कामों को पूरा करने के लिए विश्वास जरूरी माना जाता है| परन्तु बहुआयामी परिवर्तन अपनाना न लंबा है और न मुश्किल, फिर विश्वास की जरूरत क्यों है? कुछ उदाहरणों से, यह बात स्पष्ट हो जाएगी|

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पहले चरण के अंत तक आशा का सूरज चमकने लगेगा

बहुआयामी परिवर्तन का पहला चरण आठ से दस दिनों में समाप्त हो जाएगा, और पहला चरण समाप्त होने के पहले ही आशा का बड़ा सूरज चमकने लगेगा| अनेक प्रकार के शारीरिक और मानसिक लक्षण समाप्त हो जायेंगे| पहला चरण समाप्त होते-होते हम नियमित व्यायाम करना शुरू कर पाएँगे, और सादा स्वास्थ्य-वर्धक भोजन हमें अच्छा लगने लगेगा| भूख और नींद सुधरेगी और तम्बाकू जैसी लतें छूट जायेंगी| बीती हुई तकलीफों को हम भूल सकेंगे, और एक नये जीवन की ओर दृढ़ता के साथ बढ़ सकेंगे| गंभीर समस्याओं से जूझ रहे और जीवन की पारी का असमय अंत चाहने वाले लोग आत्महत्या का विचार दृढ़तापूर्वक अपने मन से निकाल फेंकेंगे| पूरा विवरण यहाँ उपलब्ध है—पहले चरण का समापन|





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