स्थिरता आगे ले जाने के लिए, यौन क्रियाओं में बारीकी लाना

यह लाइट अब पीली ही रहेगी, हरी नहीं होगी

पहले चरण में यौन क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण रखने की बात कही गई है। यह पूर्ण नियंत्रण थोड़े समय के लिए था, और यह सेक्स क्रियाओं पर पहला प्रयोग था, जिससे हम गुजर चुके हैं। यौन क्रियाओं को फिर से शुरू करने के बारे में हमारे मन में उत्सुकता होगी। अगर एक वाक्य में कहा जाए, हमें दूसरे चरण में यौन क्रियाओं में बारीकी लाने की जरूरत होगी—और इसके लिए हमें बहुत सावधानी के साथ प्रयत्न करने की जरूरत होगी। यह सेक्स क्रियाओं पर दूसरा प्रयोग होगा। यह दूसरा प्रयोग हमेशा चलता रहेगा| सावधानी कभी खत्म नहीं होगी| अगर ट्रैफिक सिगनल की भाषा में कहा जाए तो यह लाइट अब पीली ही रहेगी, कभी भी हरी नहीं होगी|

यौन क्रियाओं में बारीकी का अर्थ

एक इंद्रधनुष यौन क्रियाओं का भी है।

बहुआयामी परिवर्तन की नजर में यौन क्रियाओं का अर्थ इस अध्याय में बताया गया है — सैक्स क्रियाओं और भावनाओं पर एक सप्ताह तक पूर्ण नियंत्रण। हमारे लिए सेक्स के बारे में सोचना भी यौन क्रिया है, और हल्का सा स्पर्श भी एक यौन क्रिया हो सकती है। इस प्रकार से सेक्स के बारे में सोचने से लेकर पूर्ण शारीरिक संबंध तक यौन क्रियाओं का एक इंद्रधनुष है।

सेक्स क्रियाओं को शून्य कर देने का हमारे ऊपर प्रभाव

पहले चरण के दौरान, हमने यौन क्रियाओं को कई दिनों के लिए शून्य कर दिया था। इस शून्य कर देने का हमारे ऊपर क्या प्रभाव हुआ? हमने देखा होगा, यह असर धीरे-धीरे बढ़ता है, और ऊपरी सीमा पर पहुँचकर बढ़ना बंद हो जाता है।

  • पूर्ण सेक्स का असर हमारे ऊपर लगभग एक हफ्ते तक रह सकता है।
    अपूर्ण सेक्स का असर कम दिनों तक रहेगा| सेक्स क्रियाओं को शून्य कर देने का पूरा प्रभाव एक हफ्ते में आया। इसका अर्थ हुआ, इसका अर्थ हुआ पूर्ण सेक्स का असर हमारे ऊपर लगभग एक हफ्ते तक रह सकता है। अपूर्ण सेक्स क्रियाओं (सेक्स के बारे में सोचना, स्पर्श, चुंबन, आलिंगन इत्यादि) का असर इन क्रियाओं की तीव्रता पर निर्भर करेगा, और यह असर भी कई दिनों तक रह सकता है।
  • पूर्ण सेक्स क्रिया का प्रभाव अधिक तीव्र होता है|
    पूर्ण सेक्स क्रिया का हमारे ऊपर प्रभाव अधिक दिनों तक तो रहता है है, यह प्रभाव अधिक तीव्र भी होता है। इसकी तुलना में, अपूर्ण सेक्स क्रियाओं का प्रभाव कम तीव्र होता है और कम दिनों तक रहता है।

पूर्ण और अपूर्ण सेक्स क्रियाएँ एक ही हैं, केवल तीव्रता का अंतर है

बहुआयामी परिवर्तन की दृष्टि से पूर्ण और अपूर्ण सेक्स क्रियाएँ एक ही हैं, अंतर केवल तीव्रता का है। अपूर्ण सेक्स क्रियाओं की तीव्रता भी हम घटा-बढ़ा सकते हैं। व्यावहारिक दृष्टि से इसका अर्थ है, हम पूर्ण सेक्स क्रिया के बदले अपूर्ण सेक्स क्रियाओं से अपना काम चला सकते हैं—और लंबे समय तक पूर्ण सेक्स क्रिया के बिना रह सकते हैं।

सेक्स क्रियाओं में बारीकी का अर्थ

सेक्स क्रियाओं में बारीकी का अर्थ है, हम अपूर्ण सेक्स क्रियाओं को अपनाएं, और पूर्ण सेक्स क्रिया को कम करें। अपूर्ण सेक्स क्रियाओं की तीव्रता भी कम-अधिक करें। बारीकी का मतलब है, जितना जरूरी हो उतने से ही काम चलाएं।

सेक्स कियाओं को सीमा में रखना क्यों जरूरी है?

सेक्स क्रियाओं का हमारी स्थिरता पर बहुत गहरा और लंबा प्रभाव पड़ता है। यह प्रभाव स्थिरता के लिए, एक सीमा तक ही अच्छा होता है। व्यावहारिक दृष्टि से देखें तो उस सीमा तक सेक्स क्रियाएँ लाभदायक हैं और इसलिए जरूरी हैं। पर उस सीमा को लांघने के बाद, सेक्स क्रियाएँ हानिकारक हैं, और उनसे बचना चाहिए। सेक्स क्रियाओं की यह सीमा क्या है? हम इस सीमा के बारे में विस्तार से जरूर जानना चाहेंगे। केवल इतना कहा जा सकता है—अपने अनुभव को काम में लाएँ, और कुछ बिन्दुओं को ध्यान में रखें।

  • हममें से प्रत्येक को यह सीमा अपने-अपने अनुभव के आधार पर खुद ही तय करनी है। परेशानी की बात है कि यह सीमा प्रतिदिन बदलती रहती है—और जैसी सवेरे है, वैसी शाम को नहीं रहेगी। इसलिए सीमा बांधने में समय लगेगा|
  • सीमा तय करने के लिए हमें अपने जीवनसाथी की राय लेनी पड़ेगी, क्योंकि जीवनसाथी को भी अपनी स्थिरता का ध्यान रखना है। पति-पत्नी भी अकसर सेक्स के बारे में खुलकर बात नहीं करते हैं, यह दृष्टिकोण बदलना पड़ेगा। अकसर लोग एक कमरे के घर में रहते हैं। बच्चे बड़े होने के बाद, सेक्स के लिए अवसर कब और कैसे मिल सकता है, इस पर भी ध्यान देना होगा।

यौन क्रियाओं में बारीकी का उदाहरण

मनोहर और बीना ने अपनी सेक्स क्रियाओं में बारीकी लाने का काम किया

मनोहर और बीना एक कमरे के घर में दो बच्चों के साथ रहते थे। एक दसवीं और दूसरा सातवीं कक्षा में था, और दोनों बच्चे आठ बजे स्कूल चले जाते थे। उसके बाद पति-पत्नी जल्दी-जल्दी घर का काम निबटाते, क्योंकि दस बजे के पहले दोनों को अपने-अपने काम के लिए निकल जाना होता था। इसी बीच में दोनों सेक्स के लिए भी समय निकालते थे। हफ्ते में तीन-चार दिन (या उससे अधिक भी), लेकिन जल्दबाजी में की गई पूर्ण सेक्स क्रिया से दोनों ही असंतुष्ट रह जाते थे। मनोहर बहुत सालों से तंबाकू खाता था, और बीना को कमर-दर्द की लंबी शिकायत थी। दोनों पढ़े-लिखे थे, और तनाव को दूर करने के लिए उन्होंने अनेक उपाय किए थे। लेकिन किसी भी उपाय से बहुत अधिक लाभ नहीं हुआ था। अंत में दोनों ने बहुआयामी परिवर्तन को अपनाया।

बहुआयामी परिवर्तन के दूसरे चरण की शुरुआत थी। मनोहर और बीना आठ दिन तक सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण के बाद आगे जाने के लिए तैयार थे। उन्होंने अपने जीवन में कई परिवर्तन किए थे। उनके कमरे में दो पलंग थे। एक पलंग पर मनोहर सोता था, और दूसरे पर बीना और छोटा बेटा इकट्ठे सोते थे। बड़ा बेटा जमीन पर बिस्तर लगाकर सोता था। बहुआयामी परिवर्तन के बाद रसोईघर में रात को एक बिस्तर लगाया जाता था, जहां बड़ा बेटा सोता था। छोटा बेटा नीचे सोता था, और बीना को अकेला बिस्तर मिल गया था।

रात का समय था। मैं मनोहर के साथ उसके घर में बैठा हुआ था। दोनों लड़के पढ़ रहे थे। बीना रसोईघर में थी। मैंने मनोहर से कहा, “चलो बाहर बैठते हैं। वहीं आगे की बात करेंगे।”

“यहीं बात कर लेते हैं,” मनोहर बोला। लेकिन मैंने जोर दिया। हम दोनों उठ कर बाहर चले गए, और बीना भी वहाँ आ गई।

“अब तक सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण चल रहा था। अब सेक्स क्रियाओं को फिर से शुरू करने की बात करेंगे,” मैंने मनोहर से कहा।

मनोहर उत्तेजित हो उठा। “हमारे बड़े-बड़े बच्चे हैं।”

मनोहर के कहने का मतलब था—बच्चे बड़े हो जाने के कारण उन लोगों को अब सेक्स के लिए अवसर नहीं मिल पाता था। लेकिन असलियत कुछ और थी। बीना का कमर-दर्द लगभग ठीक हो गया था, और मनोहर ने तंबाकू खाना छोड़ दिया था। मन ही मन उन्होंने अपनी परेशानी का कारण सेक्स क्रियाओं को समझा था। और मुझसे वे इस बात को छिपाना चाहते थे।

“लेकिन आप लोगों की इच्छा तो होती होगी।”

“हाँ इच्छा क्यों नहीं होगी? क्या हम नॉर्मल नहीं हैं?” अबकी बार बीना बोल पड़ी। “डॉक्टर आपको जो भी बताना हो खुलकर बताइये।”

मनोहर चुप रह गया।

मुझे पता था बीना और मनोहर साथ पढ़ते थे, और शादी के पहले से एक-दूसरे से मिलते थे। मैंने उसी की याद दिलाई, “याद कीजिए जब शादी के पहले आप एक-दूसरे से मिल रहे थे। तब एक हल्का सा स्पर्श, या आलिंगन, या छोटा सा चुंबन कितना मजा देता था। तब आप लोग एक-दूसरे के बारे में सोचते थे। एक दूसरे के शरीर के बारे में सोचते थे। केवल उतना ही बहुत होता था। उतने से ही आप बाकी दुनिया की सारी तकलीफें आप भूल जाते थे। उसी जीवन को वापस ले आइये।”

“और पूर्ण शारीरिक संबंध?” बीना ने पूछा।

“पूर्ण शारीरिक संबंध अभी और कुछ दिन टालिए।”

कुछ दिन तक उन्होंने ऐसा ही किया।

अगली बार जब वे मुझसे मिले, मनोहर ने अपने आप ही सारी जानकारी मुझे दी। जल्दी में किया जाने वाला पूर्ण सेक्स पूरी तरह से बंद था। वे बारीकी वाली सेक्स क्रियाओं से ही अपना काम चला रहे थे। उन्हें अच्छा लग रहा था। एक महीना बीत चुका था, पर बीना को कोई कमर-दर्द नहीं हो रहा था।

बीना के खुलकर बात की, “हम अलग-अलग बिस्तर पर सोते हैं—पर सोते समय एक-दूसरे के बारे में सोचते हैं। यह सोचते हैं कि हम एक दूसरे के साथ हैं, और तुरंत नींद आ जाती है। ऐसी अच्छी नींद हमें बहुत सालों से नहीं आई थी। पर ऐसा कितने दिन और चलेगा?”

“महीने दो-महीने में एक बार बच्चों को कुछ घंटों के लिए किसी परिचित के यहाँ भेज दीजिये। और उसके बाद तीन-चार घंटे तक लगातार ... बच्चे घर में नहीं हैं आपको इस बात का होश नहीं रहेगा।”

“आप बहुत अच्छे से समझाते हैं,” बीना बोली।

हम अभी-अभी पूर्ण नियंत्रण से गुजरे हैं

पूर्ण नियंत्रण के दौरान हमें कैसा अनुभव आया?

बहुआयामी परिवर्तन के पहले चरण में, हमने सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण को अपने ऊपर लागू किया। यह सेक्स क्रियाओं पर हमारा पहला प्रयोग था| इस पूर्ण नियंत्रण के दौरान हमें कैसा अनुभव आया? यह पूर्ण नियंत्रण हमारे लिए मुश्किल था या आसान? दूसरा चरण शुरू होने के साथ, क्या हमारे लिए पूर्ण नियंत्रण और मुश्किल होता जा रहा है? और क्या हमें लग रहा है कि हम और अधिक रुक नहीं पाएंगे?

हममें से ज्यादातर लोगों के लिए सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण आसान होता है। और वे इस नियंत्रण को जारी रख पाने की स्थिति में होते हैं। कुछ लोग, मुश्किल था या आसान, यह नहीं बता पाते हैं। दूसरे चरण में हमें अपनी सेक्स क्रियाओं में बारीकी लाने का प्रयोग करना है| इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले पूर्ण नियंत्रण के दौरान आए अनुभव का विश्लेषण करना जरूरी है|

क्या सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण हमारे लिए आसान था?

हममें से अधिकतर लोगों के लिए, सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण कोई मुश्किल काम नहीं होता है। हम इसे एक प्रयोग की दृष्टी से देखते हैं—क्योंकि हमने पहले कभी ऐसा नियंत्रण नहीं किया होता है, जिसमें भावनाएं और विचार भी शामिल हों।

क्या सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण हमारे लिए मुश्किल था?

हममें से कुछ लोग सेक्स की जरूरत अधिक महसूस करते हैं—वे थोड़ी-थोड़ी देर में सेक्स के बारे में सोचते हैं। ऐसी हालत में, सेक्स क्रियाओं पर पूरा नियंत्रण मुश्किल होता है। बार-बार हमारा ध्यान सेक्स की ओर जाता है, और अपने काम में हमारा मन नहीं लगता है। कुछ दिनों तक इस परेशानी पर किसी हद तक काबू रखा जा सकता है। लेकिन उसके बाद नियंत्रण रखना बहुत मुश्किल हो सकता है| कुछ लोग निश्चित रूप से कह सकते हैं कि सेक्स पर नियंत्रण उनके लिए मुश्किल था|

क्या हम बता नहीं पाएंगे कि हमारे लिए मुश्किल था या आसान?

कल्पना करिए, अभी हमें लग रहा है, सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण बेकार की बात है—उस समय हमें सेक्स क्रियाओं पर नियंत्रण मुश्किल लगेगा। थोड़ी देर के बाद हमें लग सकता, सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण हमारे लिए जरूरी है—तब हमें सेक्स क्रियाओं पर नियंत्रण आसान लगने लगेगा। इस प्रकार से हमारा मन डांवाडोल हो सकता है।

ऐसा भी होता है, सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण शुरू में आसान लगता है, लेकिन कुछ दिन के बाद मुश्किल लगने लगता है। या इसका उलटा भी हो सकता है कि शुरू में आसान लगे और कुछ दिन के बाद मुश्किल लगे।

जरूरत पड़ने पर, क्या हम अपने इस अनुभव को दोहराना चाहेंगे?

जीवन में स्थिरता और शांति का व्यावहारिक महत्व — इस परिशिष्ट में मौलिक स्थिरता का महत्व बताया गया है। इस स्थिरता को पाने के लिए, सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण आवश्यक है। इस स्थिरता को पाना, हममें से अनेक लोगों के लिए एक विशेष अनुभव होता है—और यह अनुभव केवल सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण से ही पाया जा सकता है| नीचे कुछ उदाहरण दिए गए हैं। क्या हमारा अनुभव भी कुछ इसी प्रकार का है? लेकिन एक बार सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण केवल एक अनुभव है, और इस अनुभव को आगे ले जाने के लिए सेक्स क्रियाओं में बारीकी लाना होगा।

✓ एक सज्जन लेखा विभाग में काम करते थे। एक दिन वे मेरे पास आए और बोले; मेरा सारा शरीर दर्द करता है, और डॉक्टर लोग इसका कुछ भी इलाज नहीं कर पा रहे हैं। मैंने उन्हें सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण की सलाह दी। कुछ हफ्ते बाद वे मुझसे मिलने आए। उन्होने स्वीकार किया, उन्हें दर्द में पूरा आराम था।

✓ एक विद्यार्थी ने स्वीकार किया; सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण के बाद उसका पढ़ाई में मन लगा, और उसने परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन किया।

✓ एक सज्जन गले में पट्टा बांधकर मेरे पास आए थे। उन्हें स्पोंडीलाइटिस बताई गई थी। सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण के बाद चार-पाँच दिनों में दर्द ठीक हो गया, और उनकी गर्दन का पट्टा निकल गया।

✓ एक और विद्यार्थी को कुछ दिन अच्छा लगा, लेकिन उसके बाद सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण उसके लिए असंभव हो गया। सेक्स क्रियाओं में बारीकी से उसे भी लाभ हुआ।

अपनी सेक्स क्रियाओं पर यह दूसरा प्रयोग

एक नई सोच के बारे में कुछ बिन्दु

अपनी सेक्स क्रियाओं पर हम प्रयोग करते रहते हैं। इन प्रयोगों का उद्देश्य सेक्स के दौरान आनंद को बढ़ाना और सेक्स क्रियाओं की लंबाई को बढ़ाना होता है। परंतु यहाँ इन प्रयोगों का उद्देश्य अलग है। हमें सेक्स क्रियाओं के समुचित प्रयोग के द्वारा अपनी स्थिरता को बढ़ाना है। आनंद की प्राप्ति अपनी जगह है, और स्थिरता की प्राप्ति का अपना महत्व है। हमारे लिए दोनों जरूरी हो सकते हैं।

दूसरे प्रयोग के सिद्धांत: सेक्स क्रियाओं की बारीकी क्या है?

हमें किस प्रकार से यह दूसरा प्रयोग करना हैं? यहां हम इस दूसरे प्रयोग के सिद्धांतों के बारे में जानेंगे, जो नीचे दिए गए हैं। एक हफ्ते के पूर्ण नियंत्रण के बाद सेक्स क्रियाओं को हमें फिर से शुरू करना है। इस शुरुआत में सावधानी की जरूरत है। अगर सावधानी नहीं रखी जाएगी—अधूरा लाभ होगा, या हमारा प्रयत्न पूरी तरह से निष्फल हो सकता है। आपके और आपके जीवनसाथी के बीच सहमति हो जाने के बाद, अपनी सेक्स क्रियाओं को बदलने और उनमें बारीकी लाने के बारे में पहले प्रयोग करें। 

  • अधिक बारीकी का अर्थ है, हम कम से कम तीव्रता की सेक्स क्रिया को कम से कम देर के लिए अपनाएं, और उसके बाद अपने आप को रोक दें। इसके बाद सेक्स क्रियाओं को कई दिनों के लिए शून्य कर दें, जब तक कि छोटी सी सेक्स क्रिया का प्रभाव भी हमारे ऊपर से पूरी तरह से समाप्त न हो जाये।
  • अधिक बारीकी का अर्थ है, पूर्ण सेक्स क्रिया को जहां तक हो सके टालें।
  • अधिक बारीकी का उद्देश्य कम से कम सेक्स क्रियाओं के द्वारा अधिक से अधिक मौलिक स्थिरता पाना है। मौलिक स्थिरता के बारे में अधिक जानकारी के लिए यह परिशिष्ट देखें: जीवन में स्थिरता और शांति का व्यावहारिक महत्व

नई सोच के बारे में कुछ व्यावहारिक बिंदु

  • सबसे महत्वपूर्ण यह जान लेना है कि हमारे अधिकतर प्रयोग पूर्ण सेक्स क्रियाओं पर होते हैं। परंतु दूसरे चरण के इस प्रयोग में हमें अपूर्ण सेक्स क्रियाओं को ही अधिक महत्व देना है। इसका अर्थ यह भी है कि हमें अधिकतर (या पूरी तरह से) अपूर्ण सेक्स क्रियाओं को ही अपनाना है, और पूर्ण सेक्स क्रियाओं को कम (या लंबे समय के लिए बंद) कर देना है।
  • सेक्स क्रियाओं के बारे में लिखे गए ये शब्द हमारे लिए नए हैं। इसके अलावा भी इस अध्याय में बहुत कुछ नया है। इन नई बातों को जानना जरूरी है। ऊपर का बॉक्स पढ़ें, “यौन क्रियाओं में बारीकी का अर्थ” । इस बारीकी का अर्थ समझकर ही आगे बढ़ें।
  • दूसरा बॉक्स भी पढ़ें, “यौन क्रियाओं के पूर्ण नियंत्रण के दौरान हमें कैसा अनुभव आया?”। अगर यौन क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण हमें मुश्किल लगता है, या कभी मुश्किल और कभी आसान लगता है—तब हमें अधिक बारीकी से काम लेना होगा।
  • तीसरा बॉक्स भी पढ़ें, “मनोहर और बीना ने अपनी सेक्स क्रियाओं में बारीकी लाने का काम किया”। क्या हम इस उदाहरण को अपनाने के लिए तैयार हैं?
  • केवल पढ़ने से कुछ नहीं होगा। इसे कदम दर कदम अपने ऊपर लागू करना होगा। और हम अकेले कुछ नहीं कर पाएंगे। इसलिए अपने जीवन साथी के साथ चर्चा करें। क्या हमारा जीवन साथी भी सेक्स क्रियाओं में बारीकी लाने के लिए राजी है? बॉक्स में दी गई जानकारी अपने जीवनसाथी के साथ भी शेयर करें, और एक दूसरे की जरूरतों और अनुभवों को समझने की भी कोशिश करें।
  • आपके और आपके जीवनसाथी के बीच सहमति हो जाने के बाद, अपनी सेक्स क्रियाओं को बदलने और उनमें बारीकी लाने के बारे में पहले प्रयोग करें।

छोटे-छोटे कदम बढ़ाकर सावधानी से आगे बढ़ें

पहले प्रयोग कुछ इस प्रकार से किए जा सकते हैं|

हम एक सप्ताह के पूर्ण नियंत्रण के बाद आगे बढ़ रहे हैं| हमारी इच्छा अपने साथी में डूब जाने की हो सकती है, लेकिन धीमे और छोटे कदम बढ़ाने में ही समझदारी है|

  • क्या हमारा मन एकाग्र नहीं हो पा रहा है? क्या बार-बार सेक्स की ओर हमारा ध्यान जा रहा है? अगर ऐसा हो तो हम आगे बढ़ें, और अपने साथी के नजदीक जाकर बैठने का कोई अवसर निकालें| मान लीजिए, हम साथ बैठकर चाय पी रहे हैं| कोई उतावलापन न दिखाएं, लेकिन अपने साथी को किसी बहाने से स्पर्श करें| सटकर बैठने का कोई रास्ता निकालें।  सोफा पर साथ बैठकर टीवी देख सकते हैं, या दोपहिया वाहन पर एक साथ बैठ सकते हैं| सामान्य रूप से बातें करते रहें, और ऐसा व्यवहार करें, जैसे कुछ हुआ ही नहीं है| एक दो मिनट के बाद अलग हटकर इस क्रिया का प्रभाव अपने ऊपर देखें। कुछ काम करने की कोशिश करें| क्या अब हमारा मन एकाग्र हो पा रहा है?
  • अगर मन नहीं भी एकाग्र हो रहा है, तब भी मन को एकाग्र करने की कोशिश करें। किसी भी सेक्स क्रिया को कम से कम तीन चार घंटे के लिए टालें।
  • अगर मन एकाग्र हो जाता है, उस दशा में सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण फिर से अपनाएं। पूर्ण नियंत्रण के साथ अपना काम करते रहें।
  • कई दिनों के बाद, जब मन एकाग्र होना फिर से बंद हो जाये, फिर से ऊपर जैसी छोटी सी अपूर्ण सेक्स क्रिया करें। इसके बाद फिर से सेक्स पर पूर्ण नियंत्रण अपनाएं।
  • कभी भी उतावलापन न दिखाएं, और कुछ न कुछ बहाना बनाकर ही शारीरिक नजदीकी का अवसर निकालें|
  • ऊपर के क्रम को जारी रखें।
  • बहुत कमजोर या बहुत बारीक सेक्स क्रिया के बाद कुछ लोग ठीक रहते हैं, परंतु बाकी के लोगों को कुछ परेशानी आ सकती है। अगर हमें परेशानी हो रही है, और बार-बार सेक्स की तरफ ध्यान जा रहा है, ऐसी दशा में हमें अपूर्ण सेक्स क्रियाओं की तीव्रता को बदलने की जरूरत है| कम से कम तीव्रता की सेक्स क्रिया द्वारा अधिक से अधिक स्थिरता पाने की कोशिश करें। यह प्रयोग कई महीने भी चल सकता है।
  • बीच-बीच में पूर्ण सेक्स क्रिया को भी अपना सकते हैं। पूर्ण सेक्स क्रियाओं की संख्या कम रखें। लेकिन पूर्ण सेक्स क्रिया की लंबाई और उसकी गुणवत्ता बढ़ाने का प्रयत्न करें। बॉक्स में मनोहर और बीना का उदाहरण देखें।

छोटी-बड़ी बीमारी या तनाव की स्थिति में क्या करें?

बीमारी के समय पर या किसी तनाव की स्थिति में सेक्स क्रियाओं को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर देना अच्छा हो सकता है। छोटी-मोटी बीमारियों जैसे सर्दी-खांसी, सिरदर्द, बुखार इत्यादि के समय भी पूरा नियंत्रण अपनाएं, जब तक कि पूरी तरह से स्वस्थ न हो जाएं। माईग्रेन के दौरे के समय यह सावधानी विशेष रूप से लागू होती है।

 

अपने जीवन साथी के साथ बैठकर विश्लेषण

आपसी चर्चा जरूरी है

क्या हम सेक्स क्रियाओं के बारे में अपने जीवन साथी के साथ चर्चा करते रहते हैं? अगर नहीं तो अभी से शुरू कर दें। हमें क्या पसंद है और क्या नापसंद है, इसकी जानकारी आपस में होना जरूरी है। इस जानकारी के अनुसार आपस के व्यवहार को बदलें।

आजकल घर छोटे होते हैं। बच्चे बड़े हो जाने के बाद हमारी सेक्स क्रियाओं पर एक प्रतिबंध लग जाता है। इस समस्या का समाधान अकसर बच्चों की अनुपस्थिति में, जल्दी में की गई, पूर्ण सेक्स क्रिया द्वारा निकाला जाता है। इसे न अपनाकर कोई बेहतर समाधान निकालें। बॉक्स में दिया गया मनोहर और बीना का उदाहरण फिर से देखें।

आपसी चर्चा जरूरी है: इसका मतलब केवल सेक्स के बारे में चर्चा से नहीं है| हमें कुछ समय अपने जीवनसाथी के साथ गुजारना चाहिए| अगर हम सचमुच के जीवनसाथी बनने का प्रयत्न करेंगे, हमारी सेक्स की जरूरतें कम हो जायेंगी|

आम तौर पर आने वाली परेशानियाँ

पति-पत्नी के बीच कुछ गंभीर मसला है

कई बार पति-पत्नी के बीच गंभीर झगड़ा होता है। ऐसी स्थिति में अगर दोनों पक्ष समझौता करने के लिए तैयार हैं, बहुआयामी परिवर्तन एक-दूसरे के प्रति प्यार की भावना पैदा करने का एक अच्छा उपाय हो सकता है।

पति-पत्नी दोनों ही इस मार्गदर्शिका को पढ़ें। दोनों ही अगर अपने जीवन में स्थिरता ले आएंगे, झगड़े अपने आप समाप्त हो जाएंगे।

एक से दो हफ्तों तक सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण को अपनाएं। इसके बाद, पति-पत्नी दोनों ही अपूर्ण सेक्स क्रियाओं को अपनाएं, जैसा इस अध्याय में बताया गया है। रात को अलग-अलग सोएँ, परंतु साथ-साथ सो रहे हैं यह कल्पना करें।

क्या हमारा ट्रैफिक सिगनल अचानक काम करना बंद कर देता है?

हम बिना सोचे आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन पूर्ण सेक्स क्रिया का असर खराब होता है

इस अध्याय में पूर्ण सेक्स क्रियाओं पर रोक लगाने और सेक्स क्रियाओं में बारीकी लाने की बात कही गई है। लेकिन यह काम कुछ लोगों के लिए बहुत मुश्किल हो सकता है। इसका मतलब है कि वे अपने आप को पूर्ण सेक्स क्रिया से रोक ही नहीं पाते हैं। और पूर्ण सेक्स क्रिया के बाद उनकी स्थिरता गायब हो जाती है, इसलिए वे अपने आप को अपराधी महसूस करने लगते हैं।

ऐसी हालत में पूर्ण सेक्स क्रिया के बाद, एक सप्ताह का पूर्ण नियंत्रण फिर से अपनाना पड़ सकता है| हमें अपने अनुभव के हिसाब से फैसला लेना पड़ेगा|

पति-पत्नी अलग बेडरूम में या अलग बिस्तर पर सोकर देखें| अगर इतना सब भी हमारे लिए काफी नहीं है तो क्या करें? इस अध्याय में कुछ सुझाव दिए गए हैं। हम उन सुझावों को अपना सकते हैं, और कोशिश कर सकते हैं कि पूर्ण सेक्स क्रियाओं के बिना अपना काम चला सकें। अगर पूर्ण सेक्स क्रियाओं के बिना काम नहीं चलता है, तो भी अपने आप को अपराधी समझने की गलती न करें — क्योंकि पूर्ण सेक्स क्रिया कोई अपराध नहीं है| स्वयं पर नियंत्रण रखने की कोशिश करें, और जो भी अपने लिए बेहतर समझें वही करने की कोशिश जारी रखें|

बहुआयामी परिवर्तन और निरंतर सावधान रहने की जरूरत

शायद हमें नहीं मालूम: निरंतर सावधान रहने की क्रिया ही साधना कहलाती है| सड़क पर गाड़ी चलाते समय साधना जरूरी है| बहुआयामी परिवर्तन अपनाने वाले व्यक्ति को हर पल साधना करना सीखना है — क्योंकि उसे हर काम कुशलता से करना है|  यौन क्रियाओं में बारीकी लाने के लिए तो सावधान रहने की जरूरत है ही — परन्तु यह साधना का अंत नहीं है, और दूसरे चरण के आगे के अध्यायों में हम देखेंगे कि हर पल सावधान रहने से छुटकारा नहीं है| निरंतर सावधान रहना, यह बहुआयामी परिवर्तन का एक अभिन्न अंग है|

ऊपर का चित्र एक वीडियो से लिया गया है| यूट्यूब पर ऐसे भड़कीले वीडियो की कोई कमी नहीं है| इन्टरनेट पर क्या करते हैं, हमें इस बारे में सावधान रहने की जरूरत है| इसके बिना यौन क्रियाओं में बारीकी लाना संभव नहीं है|

अकेले व्यक्तियों के लिए कुछ सलाह

अकेले व्यक्ति से हमारा क्या मतलब है?

अकेले व्यक्ति से हमारा मतलब है अविवाहित व्यक्ति, ऐसा व्यक्ति जो अपने जीवनसाथी से अलग रह रहा है, या ऐसा व्यक्ति जिसका जीवनसाथी उसके प्रति अनासक्त है — या ऐसा व्यक्ति जो आपने जीवनसाथी के प्रति अनासक्त है| ऐसे और भी व्यक्ति हो सकते हैं, जो अपने आप को अकेला समझेंगे| अकेला होने की स्थिति के बारे में हमें खुद निर्णय करना है|

यह अध्याय विवाहित व्यक्तियों को ध्यान में रखकर लिखा गया है

यह अध्याय विवाहित व्यक्तियों को ध्यान में रखकर लिखा गया है। लेकिन अविवाहित और अकेले रह रहे व्यक्ति भी बहुआयामी परिवर्तन को अपनाते हैं, और यौन क्रियाओं में बारीकी लाना उनके लिए भी जरूरी होता है। इसलिए बहुआयामी परिवर्तन की दृष्टि से अकेले और विवाहित व्यक्ति में कोई विशेष अंतर नहीं है| लेकिन अकेले व्यक्तियों के लिए कुछ अतिरिक्त सुझाव देना जरूरी है।

इस बात को झुठलाया नहीं जा सकता है कि बहुत सारे अकेले व्यक्ति भी अनेक प्रकार की अपूर्ण और पूर्ण सेक्स क्रियाओं द्वारा अपनी इच्छाओं की पूर्ति करते हैं। इसलिए इस अध्याय में लिखी गईं बातें मोटे तौर पर अकेले व्यक्तियों के ऊपर भी लागू होती हैं। अकेले व्यक्ति अपनी सेक्स संबंधी जरूरतों को कैसे पूरा करते हैं, इसके नैतिक, सामाजिक, या कानूनी पहलुओं की जांच इस मार्गदर्शिका के दायरे से बाहर है| यहां पर कुछ सुझाव केवल बहुआयामी परिवर्तन की दृष्टि से दिए जा रहे हैं।

पूर्ण नियंत्रण बनाए रखना ही सबसे अच्छा उपाय है

  • अकेले व्यक्तियों के लिए सेक्स क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण बनाए रखना एक आदर्श हो सकता है| इस आदर्श का पालन मुश्किल हो सकता है| इसके बावजूद पूर्ण नियंत्रण बनाए रखना ही सबसे अच्छा उपाय मना जाना चाहिए| इसका कारण समझने की जरूरत है|
    हम बहुआयामी परिवर्तन अपना रहे हैं, इसका मतलब हमारे जीवन में कुछ कठिनाइयाँ हैं| क्या हम उन कठिनाइयों को जल्दी से जल्दी दूर करना चाहते हैं? यह उद्देश्य तभी प्राप्त हो सकेगा, अगर हम सेक्स क्रियाओं में बारीकी रखेंगे या पूर्ण नियंत्रण का पालन करेंगे|
  • अगर इतना सब भी हमारे लिए काफी नहीं है तो क्या करें? इस अध्याय में दी गई सलाह को भी अकेले व्यक्ति पढ़ें, और सेक्स क्रियाओं को जहां तक हो सके कम करने की कोशिश करें। यह सलाह विवाहित व्यक्तियों को दी गई सलाह से कुछ अलग नहीं है।
  • अविवाहित व्यक्ति अगर वे विवाह योग्य हैं तो विवाह के बारे में सोचें। सभी अकेले व्यक्ति ऐसी सेक्स क्रियाओं को अपनाएं, जिससे वे अपनी या कानून की नजरों में अपराधी न बनें। एच-आई-वी/ एड्स के खतरे से बचें।
  • सैद्धांतिक दृष्टि से अकेले व्यक्तियों पर भी, इस अध्याय में लिखी सभी बातें लागू होती हैं। अकेले व्यक्ति अनेक प्रकार की पूर्ण और अपूर्ण सेक्स क्रियाओं को अपनाकर अपनी जरूरतों को पूरा करने का प्रयत्न करते हैं, जिनका वर्णन यहाँ संभव नहीं है और जरूरी भी नहीं है| अकेले व्यक्ति जो भी सेक्स क्रियाएं आपना रहे हैं, उनमें बारीकी लाने की जरूरत होगी — तभी वे बहुआयामी परिवर्तन का लाभ उठा सकेंगे|

बारीकी और नियंत्रण धीरे-धीरे आएगा

धैर्य रखें और इस मार्गदर्शिका के सभी सुझावों को समझकर उनका पालन करते रहें

केवल सेक्स क्रियाओं में बारीकी और नियंत्रण से काम नहीं चलेगा। पूरा लाभ उठाने के लिए, हमें इस मार्गदर्शिका के सभी सुझावों को समझकर उन्हें आपनाने की कोशिश करनी पड़ेगी| यौन क्रियाओं में बारीकी और अपने पर नियंत्रण धीरे-धीरे ही आएगा| इसमें आसानी होगी अगर हम मार्गदर्शिका के बाकी के सुझावों को भी साथ-साथ अपनाएंगे|

इसकी पूरी संभावना है कि हमसे चूक होगी| इसलिए चूक होने से परेशान न हों| फिर से शुरू करें, और यह सोचना बंद कर दें कि हमसे नहीं जमेगा|





मार्गदर्शिका