शांति से जुड़ी गतिविधियों की एक नई बगिया लगाएं

हमारे घर में एक बगिया हो, यह इच्छा हम सब की होती है। आइए शांति से जुड़ी गतिविधियों की एक नई बगिया अपने जीवन में लगाएं। इस बगिया में उगे फूल और फल, हमारे जीवन को आनंद से भर देंगे।

इस बगिया में क्या-क्या लगायेंगे?

किसी भी बगिया में सारे फूल-पौधे, एक साथ न लगाकर, कई चरणों में लगाए जाते हैं। हम भी ऐसा ही करेंगे और तीन चरणों में आगे बढ़ेंगे। पहले चरण के दौरान नीचे के चित्र में दिखलाई गई गतिविधियाँ, हम अपने जीवन में जोड़ेंगे। इन्हें हम शांति से जुड़ी गतिविधियों का गुलदस्ता कह सकते हैं। या फिर गुलदस्ते की गतिविधियाँ भी कह सकते हैं। अलग-अलग तरह की गतिविधियों के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

गुलदस्ते की गतिविधियाँ

पहला चरण समाप्त होने तक लगभग आठ से दस दिन का समय लगेगा। इस दौरान गुलदस्ते की गतिविधियाँ जुड़ेंगी। ये बेहतर शां गतिविधियाँ हैं, जो हमारी वर्तमान शां गतिविधियों का स्थान ले सकेंगी। इस प्रकार से शां गतिविधियों की जरूरत कम हो जाएगी, और सामंजस्य और विकास से जुड़ी गतिविधियों के लिए समय और सामर्थ्य बढ़ जाएगा। एक उदाहरण द्वारा इसे समझते हैं। एक व्यक्ति दस घंटे सोता है। दूसरा व्यक्ति केवल सात घंटे सोकर काम चला लेता है, क्योंकि उसकी नींद की गुणवत्ता अधिक है। जाहिर है कि दूसरे व्यक्ति को काम करने के लिए तीन घंटे का अतिरिक्त समय मिलेगा। हमारा मन भटकता है और बहुत सारा समय चिन्ता, उदासी, टीवी देखने और मोबाईल में भी चला जाता है। शां गतिविधियों की गुणवत्ता बढ़ाकर, हम बहुत सारा समय बचा सकते है, जिसका बेहतर उपयोग संभव है।

चित्र 1: गुलदस्ते की गतिविधियाँ

ऊपर का चित्र देखें। धीमा और नियंत्रित सांस, तनाव-मुक्ति का आसन, पैरासिटामोल का उपयोग, तम्बाकू का पूर्ण निषेध, भावनाओं पर (यौन भावनाओं पर भी) नियंत्रण, और शारीरिक व्यायाम―यही मुख्य रूप से वे गतिविधियाँ हैं जिन्हें हम गुलदस्ते की गतिविधियाँ कह रहे हैं। इन सभी गतिविधियों को हमें एक साथ शुरू कर देना है। इन गतिविधियों को अपनाने के बारे में पूरा विवरण इस वेबसाईट पर उपलब्ध है।

गुलदस्ते की गतिविधियाँ अपनाने के तत्काल प्रभाव

नीचे के चित्र में देखें। गुलदस्ते की गतिविधियाँ अपनाने के बाद, हमारी कौन-कौन सी गतिविधियाँ बदलेगी―कम होंगी या समाप्त हो जाएंगी? इन गतिविधियों को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जा सकता है। और ये तीनों गतिविधियाँ बहुत तेजी से केवल पांच-सात दिनों में ही बदल जाएंगी

चित्र 2: बदली जाने वाली गतिविधियाँ

  1. हम कुछ न कुछ मानसिक परेशानियों से घिरे रहते हैं, और इसमें हमारा बहुत सारा समय जाता है। इन को हम चिन्ता, परेशानी, घबराहट, और उदासी जैसे नाम देते हैं। हर व्यक्ति में ये मानसिक लक्षण मौजूद रहते हैं। गुलदस्ते की गतिविधियाँ बहुत तेजी से और बहुत प्रभावशाली ढंग से चिन्ता, परेशानी, घबराहट, और उदासी को हटाने में समर्थ हैं।
  2. बहुत सारे शारीरिक लक्षणों से भी हमारा सामना होता है। डॉक्टर के अनुसार कोई बीमारी नहीं होती है फिर भी ये लक्षण कम होने का नाम नहीं लेते हैं। कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं: सिर दर्द, कमर दर्द, हाथ-पैर में दर्द, पेट दर्द, पेट में जलन, बदहजमी, गैस, खट्टी डकार, सीने में दर्द, खांसी आना, सांस फूलना, दिल धड़कना, और कमजोरी। गुलदस्ते की गतिविधियाँ बहुत तेजी से और बहुत प्रभावशाली ढंग से इन लक्षणों को भी हटाती हैं।
  3. हमारी जीवन शैली में शां गतिविधियों की अधिकता हो सकती है। चित्र 1 देखें: बहुआयामी परिवर्तन के प्रारम्भ में ही तम्बाकू का प्रयोग पूरी तरह से छोड़ देना जरूरी है। इसके अलावा नींद और आराम की जरूरत कम हो जाती है। टीवी मोबाईल और इन्टरनेट पर बिताया जाने वाला समय कम हो जाता है, क्योंकि सोशल नेटवर्किंग जैसे यूट्यूब व्हाटसएप और फेसबुक के प्रति आकर्षण कम हो जाता है।

साधारण भाषा में कहें तो बहुत सारे गैर-जरूरी या हानिकारक काम छूट जाते हैं, और जरूरी कामों के लिए समय और शक्ति निकल आते हैं।

गुलदस्ते की गतिविधियों को जीवन में सजाने के दूरगामी प्रभाव

गुलदस्ते की गतिविधियों को जीवन में सजाने के बाद, तुरंत होने वाले बदलावों की चर्चा ऊपर हो चुकी है। अब दूरगामी प्रभावों को भी समझने की कोशिश करते हैं। नीचे के चित्र को कुछ ध्यान से देखने और समझने की जरूरत है।

चित्र 3: गुलदस्ते की गतिविधियों का प्रभाव


टिप्पणियाँ:

  1. सामंजस्य से जुड़ी (सा), विकास से जुड़ी (वि), और शांति से जुड़ी (शां) गतिविधियाँ; इसके अतिरिक्त शांति का गुलदस्ता (शां-गु), जो हम पहले चरण में अपनाते हैं। मूल अवस्था में केवल शां, सा, और वि गतिविधियाँ हैं। पहले, दूसरे, और तीसरे चरण में शां-गु गतिविधियाँ भी जुड़ जाती हैं। शां और शां-गु गतिविधियों को एक साथ दिखाया गया है, क्योंकि ये दोनों ही शां गतिविधियाँ हैं।
  2. पहले चरण में, शां-गु गतिविधियाँ जुड़ती है―लेकिन शां गतिविधियों की कुल मात्रा तुरंत ही कम हो जाती हैं, जिससे सा एवं वि गतिविधियाँ बढ़ जाती हैं। मूल अवस्था में शां गतिविधियाँ अधिक होने पर यह प्रभाव नाटकीय प्रतीत होगा, अन्यथा यह प्रभाव सामान्य या मामूली लगेगा। कह सकते हैं कि जिसे परेशानी अधिक है, उसे शुरू में अधिक लाभ मिलता हुआ प्रतीत होगा।
  3. दूसरे और तीसरे चरण में, शां और शां-गु गतिविधियाँ और कम होती हैं, और सा एवं वि गतिविधियाँ बढ़ती हैं।
  4. बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के बाद, हमारी गतिविधियाँ बहुआयामी परिवर्तन अपनाने से पहले की अवस्था में कभी नहीं लौटती हैं। मूल अवस्था और पहले चरण के बीच का तीर केवल एक दिशा में है।
  5. पहले, दूसरे, और तीसरे चरण के बीच के तीर दोनों दिशाओं में हैं। इसका अर्थ इतना है कि शां-गु गतिविधियों को लगातार बढ़ाने और कम करने की जरूरत होती है। इन्हें एक बार अपनाकर काम ख़त्म नहीं हो जाता है। अनुभव के आधार पर, गुलदस्ते की गतिविधियों में हम लगातार परिवर्तन करते हैं। पैरासिटामौल का प्रयोग, नियंत्रित सांस, और तनाव-मुक्ति का आसन―ये तीनों गतिविधियाँ धीरे-धीरे पूरी तरह से बंद हो जाती हैं, लेकिन इन्हें भी फिर शुरू करने की जरूरत हो सकती है। यौन क्रियाओं पर नियंत्रण, तम्बाकू का पूर्ण निषेध, और शारीरिक व्यायाम―इन तीनों को लगातार जारी रखना पड़ता है। यौन क्रियाओं पर नियंत्रण अकसर छूटता है, और इसे फिर से लागू करना पड़ता है।
  6. ऊपर गुलदस्ते की गतिविधियों को अपनाने के तत्काल प्रभाव बताए गए हैं। कई प्रकार की तकलीफें कम होती हैं या समाप्त हो जाती हैं। गुलदस्ते की गतिविधियों को लगातार जारी रखना हमारे हाथ में है, और हम चित्र 2 में बताए गए लक्षणों को काबू में रख सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप, पहले जैसी तकलीफ होना बंद हो जाती है―और यह विश्वास जम जाता है कि अब पहले जैसी तकलीफ नहीं होगी। पहले जैसी तकलीफ नहीं होगी, इसलिए पहले की तकलीफों को भूला जा सकता है।
  7. पहले की तकलीफ भूलने का मतलब पहले की घटनाओं को भूलना नहीं है―बल्कि हमें घटनाओं से जुड़े दर्द को भूलना है। इसका मतलब अगर पहले जैसी घटना हो भी जाए तो भी पहले जैसी तकलीफ नहीं होगी, और हम उस घटना को सहन कर लेंगे, और अपना काम करते रहेंगे। मतलब सा एवं वि गतिविधियाँ कम नहीं होंगी। पिछली जिंदगी से जुड़े दर्द को भूलने के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लिक करें
  8. हम समझ सकते हैं कि पिछली घटनाओं से जुड़े दर्द को भूलना सचमुच एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। असफल होने का डर भी इसमें शामिल है, जिस डर के कारण हम प्रयत्न करना ही छोड़ देते हैं| असफल होने का डर चले जाने पर हम फिर से प्रयत्न करना शुरू कर सकेंगे।
  9. यह सफलता/ या असफलता किसी भी क्षेत्र में हो सकती है: पढ़ाई में, नौकरी में, किसी बीमारी को नियंत्रित करने में, या फिर किसी और क्षेत्र में।




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