क्या बहुआयामी परिवर्तन हृदय रोग के उपचार का सबसे अच्छा उपाय है?

हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियां|

शरीर के बाकी अंगों की तरह, हृदय को भी जिन्दा रहने के लिए रक्त प्रवाह चाहिए|निरंतर धड़कने और रक्त संचार जारी रखने के लिए, हृदय को बाकी अंगों से अधिक ऑक्सीजन चाहिए| हृदय तक रक्त पहुंचाने का काम हृदय की धमनियां या कोरोनरी आर्टरीज करती हैं| हृदय रोग का, यहां, अर्थ है हृदय की धमनियों का रोग, जिसे अंग्रेजी में कोरोनरी आर्टरी डिजीज कहा जाता है। इस रोग में हृदय की धमनियाँ बीमार होने लगती हैं, जिससे हृदय की मांसपेशियों के रक्तसंचार में बाधा आती है। इस बाधा के कारण कई लक्षण पैदा होते हैं, जिनमें एंजाइना, हार्ट अटैक, तथा एकाएक मृत्यु प्रमुख हैं| सबसे अधिक डर हमें हार्ट अटैक और एकाएक मृत्यु से लगता है|

हार्ट अटैक और एकाएक मृत्यु का असली कारण

ब्लॉक और प्लॉक का फर्क समझना जरूरी है|

हृदय रोग विशेषज्ञ हृदय की धमनियों में अस्सी और नब्बे प्रतिशत ब्लॉक की बात करते हैं। हम डर जाते हैं, और एन्जियोप्लास्टी और बाईपास सर्जरी जैसे उपचारों के लिए हामी भर देते हैं। इन उपचारों के बाद ब्लॉक खत्म हो जाता है, और हमें संतोष मिलता है। परंतु हम असलियत से अनजान बने रहते हैं। ब्लॉक के कारण हार्ट अटैक और मृत्यु होते ही नहीं हैं। इसलिए इन उपचारों से हार्ट अटैक और मृत्यु का खतरा कम नहीं होता है, और न ही जीवन की लंबाई बढ़ती है। हमें पता ही नहीं चल पाता है कि हम ठगे गए हैं। इसी सच्चाई को यहां कुछ बिंदुओं द्वारा स्पष्ट किया जा रहा है।

ब्लॉक का कारण एथिरोस्क्लेरोसिस है। इसलिए ब्लॉक को समझने से काम नहीं चलेगा, बल्कि हमें एथिरोस्क्लेरोसिस को ही समझना होगा। यहां पर हम इस विषय को सरलता से समझने की कोशिश करेंगे। एक पेड़ की कल्पना करें, जिस पर दो प्रकार के फल लगे हैं। नब्बे प्रतिशत से अधिक फल छोटे और कच्चे हैं, और दस प्रतिशत से कम फल बड़े-बड़े और पके हुए हैं। कुछ फल बीच के आकार के भी हो सकते हैं। वृक्ष के फलों की कल्पना के बाद हम एथिरोस्क्लेरोसिस को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। एथिरोस्क्लेरोसिस एक रोग है, जिसमें धमनियों के अंदर की सतह पर अनेक धब्बे बन जाते हैं। नए बने हुए धब्बे छोटे आकार के होते हैं, जिन्हें प्लॉक कहा जाता है। पुराने धब्बे बड़े हो जाते हैं, और धमनी के भीतर रक्त प्रवाह में रुकावट पैदा करते हैं—इसलिए इन्हें ब्लॉक कह दिया जाता है। अधिकतर धब्बे छोटे होते हैं, इसका अर्थ हुआ कि प्लॉकों की संख्या कहीं अधिक होती है, जबकि ब्लॉक एक या दो ही होते हैं।

एकाएक प्लॉक फटता है, और बड़ा सा रक्त का थक्का बनाता है, जो रक्त प्रवाह को पूरी तरह रोक देता है|

हार्ट अटैक और मृत्यु प्लॉक फटने से होते हैं।

ब्लॉक के कारण हार्ट अटैक और मृत्यु नहीं होते हैं। ब्लॉक से नहीं तो फिर कैसे? इसका उत्तर है कि हार्ट अटैक और मृत्यु प्लॉक फटने से होते हैं। प्लॉक अचानक बिना किसी चेतावनी के फटता है—इसलिए प्लॉक फटने की तुलना बम विस्फोट होने या भूकंप आने से की गई है। इसीलिए हृदय रोग में हार्ट अटैक और मृत्यु अचानक होती है, और बिना किसी चेतावनी के अच्छा भला व्यक्ति काल का ग्रास बन जाता है। एथिरोस्क्लेरोसिस से पीड़ित व्यक्ति के हृदय की धमनियों में छोटे बड़े दर्जनों प्लॉक हो सकते हैं—इसका मतलब हुआ कि दर्जनों बम हमारे हृदय के अंदर रखे हुए हैं। कब कौन सा फूटेगा, इसका कोई भरोसा नहीं है।

ऊपर का वीडियो देखिए| धमनी के अन्दर एकाएक प्लॉक फटता है, और बड़ा सा रक्त का थक्का बनाता है, जो रक्त प्रवाह को पूरी तरह रोक देता है| यह रुकावट हार्ट अटैक और मृत्यु का कारण बन जाती है|

इस एंजियोग्राफी में हृदय की धमनियां नार्मल हैं| कहीं कोई रुकावट नहीं है, मतलब ब्लॉक नहीं है—मगर प्लॉक हो सकते हैं|

प्लॉक एंजियोग्राफी द्वारा पकड़ में नहीं आते हैं।

प्लॉक का आकार छोटा होता है। प्लॉक धमनियों के अंदर रुकावट पैदा नहीं करते हैं। एंजियोग्राफी द्वारा हम धमनियों के अंदर की रुकावट जानने की कोशिश करते हैं। जाहिर है, जब प्लॉक रुकावट पैदा करते ही नहीं हैं, तो वे एंजियोग्राफी द्वारा पकड़ में नहीं आएंगे। और सच्चाई यही है कि प्लॉक एंजियोग्राफी द्वारा पकड़ में आते भी नहीं हैं। प्लॉक के विपरीत ब्लॉक धमनियों में रुकावट पैदा करते हैं, और वे आसानी से एंजियोग्राफी द्वारा पकड़ में आ जाते हैं। प्लॉक दर्जन भर भी हो सकते हैं, इसके विपरीत पूरे हृदय के अंदर अधिकतर मामलों में एक या दो ही ब्लॉक होते हैं। और धीरे-धीरे ब्लॉक की रुकावट बढ़ने से, मतलब अस्सी प्रतिशत से नब्बे प्रतिशत या पंचानवे प्रतिशत होने से हार्ट अटैक और मृत्यु होने की संभावना नहीं पाई गई है।

एंजियोग्राफी नार्मल आने के तुरन्त बाद हार्ट अटैक हो सकता हैं।

ऊपर दिखाई गई एंजियोग्राफी में हृदय की धमनियां नार्मल हैं| कहीं कोई रुकावट नहीं है, मतलब ब्लॉक नहीं है—मगर प्लॉक हो सकते हैं| और एंजियोग्राफी नार्मल होने के बावजूद हमें हार्ट अटैक हो सकता है|

एक आधुनिक हॉस्पिटल में एंजियोग्राफी के उपकरण

फिर भी हम एंजियोग्राफी पर ही भरोसा करते हैं।

खतरा प्लॉक से है, जो एंजियोग्राफी से पकड़ में नहीं आते हैं। फिर भी हृदय रोग विशेषज्ञ हृदय रोग की जांच के लिए एंजियोग्राफी पर भरोसा करते हैं। आम आदमी भी एंजियोग्राफी पर ही भरोसा करता है। इसलिए प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में एंजियोग्राफी हमारे देश में की जाती हैं।

एक एंजियोग्राफी के बाद, हमें पता चलता है कि हमारे हृदय की धमनी में अस्सी प्रतिशत या नब्बे प्रतिशत ब्लॉक है। हम डर जाते हैं, और जल्दी से जल्दी एंजियोप्लास्टी और बाईपास सर्जरी जैसे उपचारों के लिए हामी भर देते हैं। नतीजा—हमारे देश में लाखों लोगों की एंजियोप्लास्टी और बाईपास सर्जरी अनावश्यक रूप से की जाती है। ये महंगे उपचार प्लॉक के लिए कुछ भी नहीं करते हैं। नतीजा प्लॉक जो असली खतरे की जड़ हैं, वे वैसे के वैसे ही बने रहते हैं।

प्लॉक का आधुनिक उपचार

आज भी यह मुकाबला केवल सरल तरीकों से ही संभव है|

प्लॉक के ऊपर की झिल्ली को मजबूत बनाया जा सकता है|प्लॉक के अंदर की सूजन भी कम हो जाती है, और प्लॉक फटने की संभावना कम हो जाती है—और फिर पूरी तरह से समाप्त हो जाती है। यह उसी प्रकार से है, जैसे एक फुंसी हमारे शरीर पर निकलती है| अगर हमारी प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होगी, वह फुंसी दब कर बैठ जाएगी| अगर प्रतिरोधक क्षमता कम होगी, तो फुंसी की सूजन बढ़ेगी, उसके ऊपर की खाल कमजोर होगी, और फिर फुंसी फूट जाएगी| फुंसी फूटने के बाद ठीक हो जाती है, लेकिन प्लॉक फटने के बाद हार्ट अटैक और अचानक मृत्यु का खतरा रहता है| प्लॉक के अंदर की सूजन कम करके, उसके फटने की संभावना और साथ-साथ हार्ट अटैक और मृत्यु का खतरा कम किया जा सकता है। प्लॉक का यह उपचार निम्न बिंदुओं पर आधारित है:

  • हमें स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए—नियमित शारीरिक व्यायाम, कम घी-तेल वाला सादा निरामिष भोजन, तम्बाकू से पूरा परहेज, और तनाव का सही तरीके से मुकाबला।
  • ब्लड प्रैशर, डाईबिटीज, मोटापा इत्यादि पर नियंत्रण आवश्यक है।
  • एस्पिरिन या उससे मिलती जुलती, प्लेटलेट की चिपकन कम करने वाली दवाइयां लें। ये दवाइयां हार्ट अटैक और मृत्यु की संभावना को कम करती हैं।
  • कोलेस्ट्रौल बहुत अधिक बढ़ा होने पर ही, इसे कम करने वाली दवाइयों की जरूरत है। थोड़ा बढ़ा होने पर केवल जीवन शैली में सुधार पर्याप्त है।
  • चिंता और डिप्रैशन जैसी बीमारियों का समाधान जरूरी है।
  • तीव्र भावनाओं को नियंत्रित करना जरूरी है। विशेष रूप से क्रोध के अतिरेक के दौरान प्लॉक फटने की संभावना हो सकती है।
  • तनाव की आग बुझाना जरूरी है| यह अध्याय देखिए: बहुआयामी परिवर्तन द्वारा तनाव का सामना

Courage Trial (2007): एंजियोप्लास्टी से हार्ट अटैक या अचानक मृत्यु की रोकथाम संभव नहीं

सरल तरीकों से किए जाने वाले उपचार का वैज्ञानिक आधार

यह मार्गदर्शिका भी सरल तरीकों का ही अनुमोदन करती है

यह कहना उचित होगा कि इस परिशिष्ट में बताए सिद्धांतों का प्रतिपादन करने वाले दूसरे हैं, और यह मार्गदर्शिका उन सिद्धांतों का केवल अनुमोदन भर कर रही है। सरल भाषा में कहना हो तो हृदय रोग के बारे में बताए गए ये सिद्धांत कोई नए नहीं हैं। वैज्ञानिक जगत में इन सिद्धांतों की जड़ें बहुत गहरी जमी हुई हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान को व्यापार बनाने वाले लोग, इन सिद्धांतों की पूरी तरह से अनदेखी कर रहे हैं। यहां हम देख सकते हैं कि कैसे इन सिद्धांतों का प्रतिपादन किया गया है।

  • अनेक प्रसिद्ध और प्रतिभावान चिकित्सक, केवल जीवन शैली में बदलाव और सामान्य दवाइयों द्वारा, हृदय रोग के उपचार पर प्रयोग कर चुके हैं, और वे इन प्रयोगों में सफल भी हुए हैं। सबसे मशहूर नाम डीन ओर्निश का है|
  • हजारों ऐंजाइना के मरीजों के ऊपर शोध की गई है, और यह परिणाम निकला है कि एंजियोप्लास्टी से जीवन की नहीं बढ़ती है और हार्ट अटैक का खतरा कम नहीं होता है। इन शोधों में पाया गया कि सामान्य मेडिकल उपचार में ऐंजियोप्लास्टी जोड़ देने से कोई भी अतिरिक्त लाभ मरीजों को नहीं हुआ। ऐसी सबसे मशहूर स्टडी वर्ष 2007 में, COURAGE Trial के नाम से प्रकाशित हुई थी। इसके बाद से इन महंगे उपचारों की उपयोगिता के बारे में अनेक प्रश्न उठाए जा चुके हैं।
  • प्लॉक और ब्लॉक के बारे में यहां दी गई कैफियत वैज्ञानिक खोजों पर आधारित है। प्लॉक के फटने से ही हार्ट अटैक होता है और एकाएक मृत्यु होने का खतरा होता है, यह बात आम तौर पर सभी इस क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिक मानते हैं। इसी व्याख्या के आधार पर, ब्लॉक का उपचार करने वाले उपायों की उपयोगिता पर प्रश्न चिन्ह लगाना स्वाभाविक है।
  • खतरा क्योंकि प्लॉक से है, इसलिए प्लॉक का उपचार जरूरी है। यह उपचार जीवनशैली में परिवर्तन और इस परिशिष्ट में बताए गए दूसरे बिंदुओं के द्वारा ही किया जा सकता है, इसलिए बहुआयामी परिवर्तन द्वारा हृदय रोग के उपचार को यहां प्रतिपादित किया जा रहा है। यह धारणा है कि आगे चलकर यह उपचार हृदय रोग का सबसे सस्ता और अच्छा उपचार साबित होगा।

बहुआयामी परिवर्तन द्वारा प्लॉक का उपचार

ऊपर दिए गए प्लॉक के उपचार के बिंदुओं को देखकर, हम आसानी से बहुआयामी परिवर्तन की गुणवत्ता को समझ सकेंगे। स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, चिंता और डिप्रैशन जैसी बीमारियों का समाधान, और तीव्र भावनाओं को नियंत्रण करना—ये सभी बिंदु बहुआयामी परिवर्तन का भाग हैं। इससे भी बढ़कर, बहुआयामी परिवर्तन इन सभी बिंदुओं पर बेहद प्रभावकारी है। डाईबिटीज, मोटापा, ब्लड प्रैशर, व बढ़े कोलेस्ट्रौल के उपचार में भी बहुआयामी परिवर्तन का अत्यंत सकारात्मक प्रभाव है।

कहा जाता है कि ब्लॉक के कारण हार्ट अटैक और मृत्यु का खतरा पैदा हो जाता है। हृदय की धमनियों में आए इन ब्लॉक्स को खोलने के लिए, एन्जियोप्लास्टी और बाईपास सर्जरी का सहारा लिया जाता है। इन उपचारों पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, और केवल बड़े-बड़े अस्पतालों में, बड़ी-बड़ी मशीनों की सहायता से, बड़े-बड़े विशेषज्ञों द्वारा ही इन उपचारों को अंजाम दिया जाता है। इसलिए यह अविश्वसनीय लगना लाजमी है कि साधारण से लगने वाले बहुआयामी परिवर्तन द्वारा इस प्रकार के गम्भीर रोग का उपचार सम्भव है। और यह दावा कि बहुआयामी परिवर्तन हृदय रोग का सबसे अच्छा उपचार है, कुछ लोगों को निरा पागलपन लग सकता है। इस सबके बावजूद भी, यहां प्रमाण दिए जा रहे हैं कि एन्जियोप्लास्टी और बाईपास सर्जरी से हार्ट अटैक और मृत्यु का खतरा कम नहीं होता है। और हृदय रोग होने पर बहुआयामी परिवर्तन ही हार्ट अटैक और मृत्यु के इन दोहरे खतरों को कम करने का सबसे अच्छा उपाय है।

क्या हमें एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है?

एंजाइना के दर्द पर बहुआयामी परिवर्तन का अत्यंत सकारात्मक प्रभाव होता है| बहुत कम लोग ही ऐसे होंगे, जिनका ऐंजाइना सौरबिट्रेट की गोलियों, प्लॉक के उपचार, और बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के बाद भी सीमा से अधिक बना रहेगा। इतना अधिक रहेगा कि वे रोजमर्रा के काम करने में काफी कठिनाई का अनुभव करेंगे। इन थोड़े से लोगों के लिए ऐंजियोग्राफी करा लेना उचित हो सकता है। इसके बाद ही एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी के बारे में सोचा जा सकता है।





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