पहला चरण अपनाने के दौरान आने वाली कठिनाइयां

इतने सारे परिवर्तनों को एक साथ अपनाने के लिए आगे कैसे बढ़ेंगे?

बहुआयामी परिवर्तन एक बड़ा परिवर्तन है, और किसी भी बड़े परिवर्तन के रास्ते में दिक्कतें आना स्वाभाविक है| कुछ दिक्कतें शुरू में ही आ सकती है| इन शुरू में आने वाली दिक्कतों की चर्चा, हम इस अध्याय में करेंगे|पहले चरण में प्रवेश—इस अध्याय में,पहले चरण के दौरान जरूरी माने जाने वाले बहुत सारे परिवर्तनों की बात हुई है|इन परिवर्तनों में सांस पर नियंत्रण, पैरासिटामौल का उपयोग, तनाव-मुक्ति के लिए आसन, तम्बाकू का पूर्ण निषेध, और सेक्स क्रियाओं पर नियंत्रण शामिल हैं| इन परिवर्तनों को अपनाते समय कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं, जिनकी चर्चा इन परिवर्तनों के साथ ही की जाएगी| और इतने सारे परिवर्तनों को एक साथ अपनाने के लिए आगे कैसे बढ़ेंगे? इस बात की चर्चा यहाँ की जा रही है|

इस चरण में हम क्या हासिल करेंगे?

पहले चरण में इतने सारे परिवर्तनों को अपनाने के पीछे, हमारा क्या उद्देश्य है? उद्देश्यों को समझे बिना कठिनाइयों को समझना संभव नहीं है| पिछले अध्याय के इस वीडिओ को दोबारा देखते हैं|

स्थिरता: बिना रुकावट काम करते रहने की क्षमता

इस वीडियो से स्थिरता की दो प्रमुख विशेषताएं पता चलती हैं| पहली विशेषता है कि यह स्थिरता खोई जा सकती है और फिर से पाई जा सकती है| दूसरी विशेषता है कि इस स्थिरता के दौरान हमें तकलीफ हो सकती है| परन्तु वह तकलीफ कम होती है, और इतनी कम होती है कि हमारे हाथ का काम नहीं छूटता है| काम चलता रहता है तो हम तकलीफ को भूल जाते हैं|

कुछ उदाहरणों द्वारा, यह बात स्पष्ट हो जाएगी| मान लीजिए कोई व्यक्ति हमारे साथ गाली-गलौज करता है| जाहिर है कि हमें बुरा लगेगा| कुछ लोगों को इतना बुरा लगेगा कि वे अपने हाथ का काम छोड़ देंगे| हाथ का काम छोड़ देने से उन्हें नुकसान होगा, और वे उस गाली-गलौज वाली घटना को कभी भूल नहीं पाएंगे| कुछ लोगों को कम बुरा लगेगा, और वे अपने हाथ का काम जारी रख सकेंगे| जिससे उनको कोई नुकसान नहीं होगा, और वे गाली-गलौज वाली घटना को कुछ ही दिनों में भूल जायेंगे| अब स्थिरता पर आते हैं| हम कम तकलीफ होने की विशेषता को स्थिरता कहेंगे| हाथ का काम न छोड़ने की विशेषता को स्थिरता कहेंगे| और गाली-गलौज वाली घटना को भूल पाने की क्षमता को स्थिरता कहेंगे|

एक और उदाहरण की बात करते हैं| एक व्यक्ति सैर पर जाता है| लेकिन एक-दो दिन के बाद थकान हो जाती है, और सैर बंद हो जाती है| वह व्यक्ति बहुआयामी परिवर्तन अपनाता है, और रोजाना सैर करना शुरू कर देता है| रोजाना सैर कर पाने की इस क्षमता को भी स्थिरता कहेंगे| एक विद्यार्थी रोजाना पढ़ाई नहीं कर पाता है| परन्तु बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के बाद वह रोजाना पढ़ाई करना शुरू कर देता है| रोजाना पढ़ाई कर पाने की इस क्षमता को भी स्थिरता कहेंगे| कुल मिलाकर बिना रुकावट, अपना काम कर पाने की क्षमता को स्थिरता कहेंगे|

इस स्थिरता को पाने के लिए औजार

सांस पर नियंत्रण, पैरासिटामौल का उपयोग, तनाव-मुक्ति के लिए आसन, तम्बाकू का पूर्ण निषेध, और सेक्स क्रियाओं पर नियंत्रण—ये सभी और इसके अलावा भी जो उपाय हम पहले चरण के दौरान अपनाते हैं—उन्हें इस स्थिरता को पाने के औजार समझना पड़ेगा| इन औजारों का उपयोग सोच समझ कर करना पड़ेगा, जिससे हम जो कुछ बनाना चाहते हैं, वह बना सकें|

इन औजारों के इस्तेमाल में कोई खर्च नहीं है| इसलिए हम एक बार असफल हो सकते हैं| दो बार, तीन बार, या कितनी ही बार असफल हो सकते हैं| लेकिन अंत में हम सफल होंगे, और स्थिरता को पा लेंगे| स्थिरता पाने के लिए, हम सबके पास एक जैसे औजार हैं| लेकिन उन औजारों के उपयोग का अनुभव हम सबके लिए एक जैसा नहीं होगा| किसी के लिए इन औजारों का उपयोग आसान होगा तो किसी के लिए कठिन हो सकता है| किसी को इन औजारों के उपयोग के लिए अधिक तो किसी को कम समय और शक्ति लगाने पड़ेंगे|अधिक समय और शक्ति लगने का मतलब है कि बहुआयामी परिवर्तन की हमारी जरूरत अधिक है| और हमें अधिक लाभ होने की संभावना है|

स्थिरता पाने के बाद खोना, और खोने के बाद फिर से शुरू करना

हमें इन औजारों का उपयोग लक्ष्य हासिल होने तक करते रहना पड़ेगा| मान लीजिए हमारा लक्ष्य अस्थमा पर काबू पाना है| इस लक्ष्य को पाने में कुछ महीने का समय लग सकता है| इस दौरान हमें स्थिरता की जरूरत होगी, जिससे हम स्वस्थ होने की तरफ बढ़ सकें| कुछ महीनों तक लगातार स्थिरता को बनाए रखना बहुत कम लोगों के लिए संभव हो सकेगा| इन कुछ महीनों में अधिकतर लोग, इस स्थिरता को कई बार खोएंगे—जैसा कि ऊपर के वीडिओ में बताया जा रहा है| लेकिन खोने के बाद, हमें पता है कि हमें क्या करना है| हम उसी तरीके से अपनी स्थिरता को वापस पा सकते हैं| लेकिन इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि हम जानबूझकर लापरवाही करें, और स्थिरता को खो दें| क्योंकि खोने के बाद फिर से स्थिरता पाने के लिए चार-पांच दिन का समय लगने की संभावना है|

साधना का अर्थ है निरंतर सावधान रहना

हम स्थिरता को खोते हैं और फिर से पा लेते हैं (ऊपर देखें)| कई बार खोने और पाने के बाद, हमें यह लगने लगता है बार-बार खोना और पाना एक बहुत महंगा सौदा है| हमें यह पता चल जाता है कि खोने के बाद दोबारा पाने में काफी समय और मेहनत लगती है| इसके बाद हम यह कोशिश करने लगते हैं कि स्थिरता को लगातार बनाए रखें| इसके लिए लगातार सावधान रहने की जरूरत होती है| यही साधना है| साधना कोई धार्मिक क्रिया नहीं है| साधना का शाब्दिक अर्थ है निरंतर सावधान रहना| बहुआयामी परिवर्तन अपनाकर हम निरंतर सावधान रहना और अपनी स्थिरता बनाए रखना सीखते हैं| कोई भी काम अगर लगातार सावधानी रखते हुए किया जाए, तो वह साधना है—जैसे कि ऊपर के चित्र की महिला, जो मनोयोग से सिलाई कर रही है|

कठिनाइयों का वर्णन आगे के अध्यायों में आएगा

सांस पर नियंत्रण, पैरासिटामौल का उपयोग, तनाव-मुक्ति के लिए आसन, तम्बाकू का पूर्ण निषेध, और सेक्स क्रियाओं पर नियंत्रण—इनको अपनाने में कई कठिनाइयाँ आ सकती हैं, इसका विस्तृत वर्णन संबंधित अध्यायों में दिया गया है| कुछ लोगों के लिए सांस पर नियंत्रण बहुत मुश्किल हो सकता है| तम्बाकू का प्रयोग छोड़ने में अधिकतर लोग किसी बड़ी मुश्किल का सामना नहीं करते हैं| तनाव-मुक्ति का आसन सीखना भी आसान है| कुछ लोग विशेषकर युवा सेक्स क्रियाओं और भावनाओं पर नियंत्रण पाना मुश्किल पाते हैं| परिवार के कई सदस्यों को विशेषकर पति-पत्नी को बहुआयामी परिवर्तन एक साथ अपनाने की सलाह इसीलिए दी जाती है, क्योंकि पति-पत्नी को मिलकर सेक्स क्रियाओं पर नियंत्रण पाना आसान है| अधिक जानकारी के लिए आगे के अध्याय पढ़ें|

दूसरा रास्ता: पहले चरण को दो भागों में बांटकर अपनाना

पहले चरण के इन सभी औजारों का प्रयोग एक साथ शुरू करने की जोरदार सिफारिश की जाती है| इसे पहला रास्ता कह सकते हैं| इसके विपरीत पहले चरण को दो भागों में बांटकर भी अपनाया जा सकता है| इसे दूसरा रास्ता कह सकते हैं|

दूसरा रास्ता कैसे अपना सकते हैं?

यौन (सैक्स) क्रियाओं और भावनाओं पर नियंत्रण, तम्बाकू का निषेध, और पैरासिटामौल के उपयोग से शुरू करें—इसके बाद धीमा और नियंत्रित साँस जोड़ें,और अगले चार-पाँच दिन के दौरान बाकी के बदलाव भी जोड़ दें। इसके बाद और चार-पाँच दिन तक सभी बदलावों को एक साथ अपनाते हुए चलें। इस प्रकार से आठ-दस दिनों में पहला चरण पूरा हो जाएगा।

दूसरा रास्ता चुनने के लिए, अधिक दृढ़ता या मजबूत इच्छा-शक्ति की जरूरत है। लेकिन दूसरे रास्ते में सांस का व्यायाम और तनाव-मुक्ति का आसन कम बार करना पड़ता है—इसलिए समय कम देना पड़ता है। इसके साथ ही दूसरे रास्ते में, असफल होने की संभावना, पहले रास्ते के मुकाबले बहुत अधिक है। केवल मजबूत इच्छा-शक्ति वाले लोग ही दूसरे रास्ते को चुन सकते हैं।

दूसरा रास्ता कौन अपना सकता है?

मामूली समस्या का समाधान करने के लिए दूसरा रास्ता चुना जा सकता है| लेकिन समस्या गंभीर होने पर पहला रास्ता ही अपनाना जरूरी है| मामूली समस्याओं के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:

  • तम्बाकू का प्रयोग छोड़ना है, लेकिन उसके साथ कोई भी अन्य समस्या जुड़ी हुई नहीं है|
  • कोई बीमारी नहीं है| कुछ मामूली लक्षण हैं जैसे: शरीर के किसी हिस्से में दर्द|
  • कोई बीमारी नहीं है| कुछ मामूली लक्षण हैं जैसे: पेट में जलन, खट्टी डकार, अपचन, पेट फूलना, गैस इत्यादि|
  • पढ़ाई में मन न लगा पाने वाले ऐसे विद्यार्थी, जिन्हें और कोई भी तकलीफ नहीं है|

दूसरा रास्ता अपनाने के बाद लाभ न होने पर पहले रास्ते का रुख करें

राहुल ने सिगरेट छोड़ने के लिए दूसरा रास्ता चुना। दूसरे रास्ते के पहले हिस्से के समाप्त होने तक राहुल की सिगरेट पीने की इच्छा खत्म हो गई। राहुल को लगा कि उसे सफलता मिल गई है, और उसने बहुआयामी परिवर्तन को आधे रास्ते में ही छोड़ दिया। कुछ दिन के बाद उसका सिगरेट पीना फिर से शुरू हो गया। इसके बाद राहुल कई महीने तक सिगरेट पीता रहा, और सोचता रहा कि बहुआयामी परिवर्तन से उसके जीवन में तनिक सा भी परिवर्तन नहीं आया था। अंत में राहुल ने दोबारा कोशिश की। इस बार उसने बहुआयामी परिवर्तन को पहला रास्ता चुनकर ठीक ढंग से अपनाया, और हमेशा के लिए सिगरेट छोड़ने में सफल हुआ।

दूसरा रास्ता अपनाकर सफलता की संभावना क्यों कम हो जाती है?

दूसरे रास्ते में, हम एक सप्ताह के लंबे समय तक अपने पर नियंत्रण रखने में असफल रह सकते हैं। दूसरे रास्ते पर चलकर, दो तीन दिन के बाद ही, हमें ऐसा लग सकता है कि हमें सफलता मिल गई है, और बहुआयामी परिवर्तन अपनाने का हमारा उद्देश्य पूरा हो गया है। इसका कारण समझना जरूरी है| यौन (सैक्स) क्रियाओं और भावनाओं पर नियंत्रण, तम्बाकू का निषेध, और पैरासिटामौल के उपयोग—ये तीनों अपने आप में बहुत शक्तिशाली औजार हैं| केवल इनके द्वारा ही, लाभ मिल जाता है| इसके बाद बहुआयामी परिवर्तन हम बीच में ही छोड़ देते हैं। लेकिन कुछ समय के बाद परेशानी फिर से वापस आ जाती है, और हमें लगता है कि कुछ भी फायदा नहीं हुआ|





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