कुछ और महत्वपूर्ण सलाह

पिछले अध्यायों में हमने सांस और सेक्स पर नियंत्रण से लेकर, तम्बाकू छोड़ने और शारीरिक व्यायाम अपनाने के बारे में चर्चा की| इस अध्याय में हम नीचे लिखे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे|

  • शराब और दूसरे नशों का परित्याग
  • मानसिक रोगों की दवाइयाँ छोड़ने का रास्ता
  • खान-पान और दिनचर्या में बदलाव
  • होम्योपैथी, एक्यूपंचर, और आयुर्वेदिक औषधियां
  • रोजाना का काम करते हुए और रोजाना की परिस्थिति के दौरान ही बहुआयामी परिवर्तन अपनाएँ|
  • हमें पहले चरण को दोबारा लागू करने की भी जरूरत हो सकती है|
  • पहले चरण के दौरान भी अपना काम कुशलता से करने की कोशिश करें|
  • परिवार या किसी संस्था के एक से अधिक सदस्य एक-साथ बहुआयामी परिवर्तन अपनाएँ|

क्या हम शराब (या दूसरे नशों) के आदी हैं?

या फिर कोई नशा करते हैं, लेकिन आदी नहीं हैं।

❐ स्पष्टीकरण—आदी होने का मतलब है कि हम सवेरे उठने के कुछ देर के बाद ही शराब पीना शुरू कर देते हैं—और थोड़ी-थोड़ी देर में एक-दो पैग लेते रहते हैं। मतलब सारे दिन ही नशे में रहते हैं। क्या हमारे लिए एक-दो दिन भी शराब के बिना रहना लगभग असंभव है? क्या शराब न पीने पर हमारे हाथ-पैर कांपने लगते हैं? अगर ऐसा है, तो हम शराब के आदी हैं।

कुछ लोग रोजाना एक-दो या अधिक पैग लेते हैं, लेकिन शराब के बिना कुछ दिन आराम से निकाल सकते हैं—उन्हें शराब का आदी नहीं माना जा सकता।

शराब के आदी व्यक्ति को पहचानना जरूरी है। अगर वह एकाएक शराब छोड़ दे—ऐसे आदी व्यक्ति को जान का खतरा होता है। इसलिए ऐसे व्यक्ति की शराब डॉक्टर की देखरेख में ही छुड़ाई जाती है।

जो शराब के आदी व्यक्तियों पर लागू होता है, वही दूसरे नशों जैसे गांजा, अफीम, चरस इत्यादि के आदी लोगों पर भी लागू होता है। लेकिन वह तंबाकू के आदी व्यक्तियों पर लागू नहीं होता है, क्योंकि तंबाकू का प्रयोग एकाएक छोड़ना पूर्णतः हानि-रहित है।

डॉक्टर की सलाह लेना कब जरूरी है?
  • शराब के आदी लोग डॉक्टर की सलाह लें—और डॉक्टर की देखरेख में ही इस मार्गदर्शिका में दी गई बातों को अपनाएं।
  • दूसरे प्रकार का नशा करने वाले लोग (चाहे वे नशे के आदी न भी हों) डॉक्टर की सलाह लें—और डॉक्टर की देखरेख में ही इस मार्गदर्शिका में दी गई बातों को अपनाएं।
  • अगर हमें शंका है कि हम शराब के आदी हो सकते हैं, तब भी डॉक्टर की सलाह ले लें|
कब डॉक्टर की सलाह जरूरी नहीं है?

हम अगर शराब पीते हैं, लेकिन उसके आदी नहीं हैं—ऐसी स्थिति में हम शराब का प्रयोग, पहले चरण की समाप्ति तक के लिए, पूरी तरह से छोड़ दें। बहुआयामी परिवर्तन शराब और दूसरे नशों से मुक्त होने का बहुत अच्छा उपाय है।

क्या हम किसी मानसिक रोग के लिए दवाइयां खाते हैं?

और इन दवाइयों का सेवन छोड़ना चाहते हैं?

कई प्रकार के मानसिक रोगों के लिए दवाइयां दी जाती हैं, जैसे की अवसाद (डिप्रैशन), चिंता (एंग्जाइटी), और पी टी एस डी। कई कारणों से, बहुत लोग इन दवाइयों को छोड़ना चाहते हैं।

  • दवाइयां महंगी हैं, और इन पर लगातार खर्च करना पड़ता है।
  • दवाइयों के दुष्प्रभाव (साइड इफैक्ट्स) होते हैं, जो कई बार गंभीर भी हो सकते हैं।
  • लंबे समय तक दवाइयों के सेवन के बाद भी, उनसे कुछ लाभ नजर नहीं आता है।
  • दवाइयों पर निर्भरता बन जाती है, जो हमारे आत्मसम्मान को ठोकर पहुंचाती है।
  • दूसरों के सामने ये दवाइयां लेते हुए हमें अच्छा नहीं लगता है।
  • हम गंभीरता पूर्वक इन दवाइयों के बारे में पढ़ चुके हैं, और हमें विश्वास हो चला है कि ये दवाइयां निष्क्रिय हैं।
  • हम बिना दवाइयों वाले इलाज में विश्वास रखते हैं।

❐ स्पष्टीकरण—अगर हम इन दवाओं के प्रयोग को बंद करना चाहते हैं, बहुआयामी परिवर्तन इसके लिए एक अत्यंत कारगर उपाय है।

इन सावधानियों को ध्यान में रखें।

  • हम बहुत समय से लगातार दवाइयां ले रहे हैं, इस स्थिति में एकाएक दवाइयों का प्रयोग न छोड़ें—मतलब दवाइयों का प्रयोग धीरे-धीरे कम करें और फिर बंद कर दें। बहुआयामी परिवर्तन की शुरुआत करें, जैसे-जैसे इसका लाभ हमें अनुभव हो, दवाई की मात्रा कम करते जाएं। इस प्रकार से चार से आठ सप्ताह में दवाओं का प्रयोग बंद किया जा सकता है।
  • स्किटजोफ्रेनिया के रोगी अपने आप दवाओं के बारे में निर्णय न लें। वे डॉक्टर की देखरेख में ही दवाओं को कम करें। लचीलापन रखने की सलाह दी जाती है—मतलब अगर लक्षण बढ़ें, तो दवा की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। अधिकतर रोगी कम दवा लेने पर ही अच्छा महसूस करते हैं।
  • अगर हम लोराजेपाम, अल्प्राजोलाम या डायजेपाम जैसी नींद या घबराहट की गोलियां लंबे समय से ले रहे हैं, उन्हें भी धीरे-धीरे कुछ हफ्तों या महीनों में कम करें, और फिर पूरा बंद कर दें। बहुआयामी परिवर्तन इन गोलियों को छुड़वाने में मददगार होगा। जरूरी हो तो डॉक्टर की सलाह लें।
  • डिप्रैशन या नींद की गोलियां कुछ लोग कभी लेते हैं, और कभी छोड़ देते हैं—जैसे एक महीने लिया और एक महीने छोड़ दिया, या चार-पाँच दिन लिया फिर दस दिन छोड़ दिया। ऐसे में एकाएक इन दवाओं को छोड़ा जा सकता है।

बहुआयामी परिवर्तन सफलतापूर्वक अपनाने के लिए इन दवाओं को बंद करना या कम करना जरूरी हो सकता है—खास तौर पर जब हम इन दवाओं के साइड इफैक्ट्स का अनुभव कर रहे हैं।

कुछ और सावधानियाँ

खान-पान और दिनचर्या में परिवर्तन—अगर हमारा वजन सामान्य या उससे अधिक है, तो आठ दिन एक दो रोटी कम खाएं, और सादा खाना खाएं। आठ दिन के बाद अपने लिए खाने की मात्रा तय करें। केवल छह से आठ घंटा सोएँ। अपने मन को जहां तक हो सके शांत रखें।

होम्योपैथी, आयुर्वेद, एक्यूपंचर जैसे उपचार बहुआयामी परिवर्तन के साथ-साथ न करें। ध्यान रखें, इन उपचारों के बंद होने के बाद ही बहुआयामी परिवर्तन को अपनाएं।

गैर-जरूरी एलोपैथी दवाइयों को भी बंद कर दें—जैसे कि विटामिन, कैल्सीयम, या ताकत की गोलियां|

बहुआयामी परिवर्तन किसी रिसॉर्ट में न अपनाएँ

इसे रोजाना का काम करते हुए और रोजाना की परिस्थिति में ही अपनाएं

बहुआयामी परिवर्तन का हमारे काम में आने वाली अड़चनों पर कैसा प्रभाव होता है? यह जानना हो तो बहुआयामी परिवर्तन की शुरुआत हमारे नियमित काम-धंधे के दिनों में और घर में रहते हुए ही करें। अपने जीवनसाथी या घर के किसी अन्य सदस्य से अनबन हो तब उसके साथ रहना ही अच्छा होगा। ऑफिस या काम के स्थान पर अगर किसी से अनबन हो तो काम पर जाते रहना ही अच्छा होगा। आखिरकार बहुआयामी परिवर्तन का उद्देश्य कठिनाइयों का सामना करना है न कि उनसे भागना।

इस चरण का अंतिम अध्याय देखें: पहले चरण का समापन। हमारे रोजमर्रा के जीवन के अनुभवों में आने वाले बदलाव के आधार पर ही हम यह कह सकेंगे कि हमने बहुआयामी परिवर्तन का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यहां पर रोजमर्रा के जीवन का महत्व है। इसका अर्थ हुआ, हमें बहुआयामी परिवर्तन रोजमर्रा की जिंदगी बसर करते हुए ही अपनाना चाहिए। पिछले जीवन से जुड़े दर्द को भूल जाना: दूसरे चरण के लगभग आरम्भ में ही, हम इस विषय पर बात करेंगे। यह भी उन्हीं अनुभवों के आधार पर हो सकेगा जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े होंगे।

हमारी रोजमर्रा की जिंदगी के भी कई आयाम हो सकते हैं, और अलग-अलग आयाम हमारे सामने अलग-अलग प्रकार की चुनौतियां लेकर आते हैं। सुनीता एक ऑफिस में काम करती है। उसका उदाहरण देखें तो उसके सास-ससुर साल में करीब छह माह उसके पास रहते हैं, और बाकी समय उसके देवर के पास रहने के लिए चले जाते हैं। जब सास-ससुर उसके पास रहते हैं, सुनीता को अपनी स्वतंत्रता में बाधा महसूस होती है। जब वे सुनीता के पास नहीं होते हैं, सुनीता को अपने स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों की फिक्र होने लगती है। बच्चों की लम्बी छुट्टियां और उनकी परीक्षाएँ सुनीता के लिए अलग-अलग तरह की समस्याएँ लेकर आती हैं।

हमारे जीवन में भी अकसर अलग-अलग दिनों में अलग-अलग समस्याएँ होती हैं। अब सवाल यह उठेगा कि हम बहुआयामी परिवर्तन को कब अपनाएंगे? इस प्रश्न का उत्तर मुश्किल नहीं है, क्योंकि हम बहुआयामी परिवर्तन को, अपनी सामान्य जिंदगी जीते हुए, कभी भी अपना सकते हैं। अगले अध्यायों में हम देखेंगे, बहुआयामी परिवर्तन से हमारा नजरिया बदलता है, और हम सभी समस्याओं को एक अलग दृष्टि से देखने लगते हैं।

पहले चरण को दोबारा लागू करना

हमें पहले चरण को दोबारा लागू करने की भी जरूरत हो सकती है| नीचे के उदाहरणों से यह स्पष्ट हो जाता है कि हम बहुआयामी परिवर्तन को छोड़ सकते हैं और फिर से अपना सकते हैं। इसी प्रकार से अगर हम छुट्टी के दिनों में बहुआयामी परिवर्तन अपनाते हैं, तब हमें मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए कि हमें काम शुरू करने पर फिर से बहुआयामी परिवर्तन अपनाने की जरूरत हो सकती है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि दूसरी बार बहुआयामी परिवर्तन अपनाना सरल होता है, लेकिन दूसरी बार भी पूरी सावधानी रखनी चाहिए।

नीलिमा को कमर-दर्द हुआ। उसके बहुआयामी परिवर्तन अपनाया, जिससे दर्द ठीक हो गया। नीलिमा किसी बात को बहुत गंभीरता से नहीं लेती थी। नतीजा उसने पहले की तरह लापरवाही से रहना शुरू कर दिया। अबकी बार उसकी गरदन में दर्द शुरू हो गया। नीलिमा ने बहुआयामी परिवर्तन के पहले चरण को फिर से अपनाया।

विनोद बहुत चिड़चिड़ा और उदास रहता था। उसे नींद भी ठीक से नहीं आती थी, और काम में मन नहीं लगता था। बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के बाद वह ठीक हो गया। इसके बाद वह लापरवाह हो गया, जिससे उसकी तबीयत फिर से बिगड़ गई। उसे बहुआयामी परिवर्तन दोबारा लागू करना पड़ा।

पहले चरण में भी अपने काम पूरी कुशलता से करने की कोशिश करें

बहुआयामी परिवर्तन हमारी कार्यकुशलता को बढ़ाता है। इसके बारे में दूसरे और तीसरे चरण में अधिक जानकारी दी गई है। लेकिन हम खुद भी समझदार हैं, और पहले चरण के दौरान भी अपनी बुद्धि का प्रयोग करें और अपने सभी कामों को अच्छे ढंग से करना शुरू कर दें। इसके लिए हम मार्गदर्शिका के आगे के अध्याय भी पढ़ सकते हैं, और उनका पालन कर सकते हैं। मतलब इस मार्गदर्शिका का चरणों में विभाजन केवल वर्णन की सुविधा के लिए है।

परिवार या संस्था के कई सदस्य एक साथ इस परिवर्तन को अपनाएं

एक नए काम में सफलता पाने की अधिक संभावना है, अगर कई लोग इस काम को मिलकर करें। बहुआयामी परिवर्तन पर भी यह लागू है, और इसीलिए एक साथ रहने वाले या एक साथ काम करने वाले कई लोगों को, इसे साथ-साथ अपनाने की सलाह दी जाती है। एक परिवार या एक संस्था के लोगों द्वारा बहुआयामी परिवर्तन एक साथ अपनाना किस प्रकार से जरूरी या लाभकारी हो सकता है? खास बात है कि हम एक दूसरे की गलतियों और अच्छे अनुभवों से सीख ले सकते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए, मिल जुलकर बहुआयामी परिवर्तन को अपनाना और भी अधिक जरूरी हो सकता है।

परिवार के लोग इस परिवर्तन को साथ-साथ अपनाएं

परिवार के कई सदस्यों को, एक साथ मतलब एक ही समय पर, इन परिवर्तनों को अपनाने की जरूरत हो सकती है। एक सज्जन जरदा छोड़ना चाहते थे, उनकी पत्नी भी साथ में आई थीं, और बातों-बातों में उन्हें लंबी अवधि के कमर दर्द की शिकायत निकली। इस प्रक्रिया से दोनों को लाभ हुआ। दूसरे व्यक्ति को हृदय रोग था और वह सिगरेट छोड़ना चाहता था। उसकी बेटी कॉलेज में थीं, लेकिन उसका पढ़ाई में मन नहीं लगता था, और घबराहट होती थी। इस प्रक्रिया से दोनों को लाभ हुआ। इस परिवर्तन के द्वारा हम अपनी कार्यकुशलता भी बढ़ा सकते हैं।

विशेषकर पति-पत्नी इस परिवर्तन को साथ-साथ अपनाएं

पति-पत्नी एक साथ इस परिवर्तन को अपनाएं। इसका मुख्य कारण है—इस परिवर्तन में उन्हें अपने सैक्स सम्बन्धों को बदलना पड़ेगा, जिसके लिए दोनों की तैयारी होनी चाहिए।

सैर करना (या दूसरा कोई शारीरिक व्यायाम), सांस का व्यायाम, और तनाव-मुक्ति का आसन—यह सभी पहले चरण के परिवर्तन हैं, जिन्हें पति-पत्नी और घर के दूसरे सदस्य भी साथ-साथ कर सकते हैं। एक-दूसरे की कमियों को देख सकते हैं और सुधार सकते हैं। और एक-दूसरे को उत्साहित कर सकते हैं।

दूसरे ओर तीसरे चरण के परिवर्तनों को भी घर के सदस्य साथ-साथ अपना सकते हैं।

किसी समूह या टोली, संस्था, ऑफिस, या फैक्ट्री के लोग भी इस परिवर्तन को साथ-साथ अपनाएं

ऊपर लिखे कारण किसी संस्था, ऑफिस, या फैक्ट्री के लोगों पर भी लागू होते हैं। इसलिए वे भी इस परिवर्तन को साथ-साथ अपनाएं। इंटरनेट और मोबाइल के इस युग में, किसी भी ग्रुप (जैसे गूगल या व्हाट्सऐप) से जुड़े लोग भी, इस परिवर्तन को साथ-साथ अपना सकते हैं। इन ग्रुप्स के माध्यम से, हम वीडियो जैसे शक्तिशाली माध्यमों द्वारा भी अपने अनुभवों को शेयर कर सकते हैं। बहुआयामी परिवर्तन के लिए, हम वेबसाइट या ग्रुप बना सकते हैं, जहां इस परिवर्तन को अपनाने वालों को जोड़ा जा सकता है।





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