अपने व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करके, हम बहुत दूर तक जा सकते हैं।

लंबी दौड़ में मनुष्य सभी पशुओं से आगे है

हम अपने सामर्थ्य को कम करके आंकते हैं| मैराथन की दूरी होती है 42 किलोमीटर से कुछ अधिक| क्या हम जानते हैं मैराथन दौड़ में मनुष्य सभी पशुओं से आगे निकल सकता है—यहाँ तक कि घोड़ों से भी? मनुष्यों और घुड़सवारों के बीच मैराथन का आयोजन 1980 से लगातार किया जा रहा है| इसमें केवल दो बार मनुष्यों ने जीत हासिल की है| लेकिन इस मैराथन की लंबाई लगभग 35 किलोमीटर ही है, जो घोड़ों के लिए अनुकूल है| और सबसे तेज-तर्रार मैराथन धावकों ने इस दौड़ में कभी हिस्सा नहीं लिया है|

छोटी दौड़ में हम कुत्ते-बिल्ली जैसे छोटे जानवरों का भी मुकाबला नहीं कर पाएंगे| खरगोश और चूहों से भी पीछे छूट जाएंगे|

यह उदाहरण केवल लंबी दौड़ का महत्व समझने के लिए है

हम इस मार्गदर्शिका के अंतिम अध्याय पर पहुंच गए हैं। इसे हम, इस मार्गदर्शिका का, उपसंहार मान सकते हैं। यहां हम केवल इतना ही समझेंगे कि बहुआयामी परिवर्तन के द्वारा हम अपने व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास कर सकते हैं, और बहुत दूर तक जा सकते हैं।

मुझसे अकसर पूछा जाता है: क्या बहुआयामी परिवर्तन के द्वारा, हम आई आई टी, मेडिकल, या आई ए एस जैसी परीक्षाओं में पक्की सफलता पा सकते हैं? इस प्रश्न का उत्तर नकारात्मक ही होगा। हर वर्ष दो सौ से भी कम आई ए एस की रिक्तियां होती हैं—ऐसे में दो सौ से कम लोग ही आई ए एस में सफलता हासिल कर सकते हैं—जबकि बहुआयामी परिवर्तन अपनाने वालों की संख्या हजारों और लाखों में हो सकती है। यही बात आई आई टी और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं पर भी लागू होती है। बहुआयामी परिवर्तन अपनाने वाले कुछ विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में लाभ हो सकता है| लेकिन लंबे समय में हर व्यक्ति बहुआयामी परिवर्तन का लाभ उठा सकता है|

बहुआयामी परिवर्तन जीवन भर के लिए है

किसी विशेष उद्देश्य के लिए हम बहुआयामी परिवर्तन को अपनाते हैं। वह उद्देश्य तम्बाकू का प्रयोग छोड़ना हो सकता है, अस्थमा पर काबू पाना हो सकता है, या कमर-दर्द से छुटकारा हो सकता है। कुछ दिन में, हमारा यह उद्देश्य पूरा हो जाता है—मतलब हम तम्बाकू छोड़ देते हैं, या कमर-दर्द से छुटकारा पा लेते हैं। इसके बाद क्या हम बहुआयामी परिवर्तन को भूलकर,उसे अपने जीवन से निकाल देते हैं? हम एक और उदाहरण को देखेंगे: बुखार होने पर, हम बुखार के लिए दवाई लेते हैं—परंतु बुखार ठीक होने के बाद, उस दवाई को लेना बंद कर देते हैं। इस मायने में, बहुआयामी परिवर्तन अलग है। लाभ उठाने के बाद, और उद्देश्य पूरा होने के बाद, हम बहुआयामी परिवर्तन को छोड़ नहीं पाते हैं।

हम बहुआयामी परिवर्तन के साथ हमेशा के लिए जुड़ जाते हैं| क्योंकि जो कुछ भी हमने सीखा है, उसे हम भूल नहीं पाते हैं|

बहुआयामी परिवर्तन जीवन भर आगे बढ़ते जाने के लिए है

हम बहुआयामी परिवर्तन को अपनाते समय बीच में रुक सकते हैं| नीचे लिखे कुछ या सभी अध्यायों को हो सकता है कि हमने अपने जीवन में लागू न किया हो| अगर लागू कर लिया है तो इन्हें भी हम भूलने वाले नहीं है| इस परिवर्तन के साथ हमारा जीवन भर का रिश्ता बन जाता है। हमें एक सच्चा मित्र या सलाहकार मिल जाता है, और रात हो या दिन जीवन के अंतिम मोड़ तक वह हमारे साथ रहता है।

हम अपनी दिशा अपने आप तय करेंगे

इस परिशिष्ट में, स्थिरता और शांति का व्यावहारिक महत्व बताया गया है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए स्थिरता जरूरी है। परिवर्तन तो जीवन का नियम है। लेकिन इस परिवर्तन की क्या दिशा होगी? यह परिवर्तन हमारे लिए लाभकारी होगा, या हानिकारक होगा? जाहिर है कि परिवर्तन की दिशा हमें खुद ही तय करनी पड़ेगी, और परिवर्तन की गाड़ी को अपने अनुसार चलाने के लिए, स्थिरता जरूरी है। अन्यथा हम दो कदम आगे जाएंगे, और फिर तीन कदम पीछे लौट जाएंगे हम कभी दाहिनी ओर जाएंगे, तो कभी मुड़कर बाईं ओर चले जाएंगे हमारी स्थिति बेपैंदी के लोटे जैसी हो जाएगी। और ऐसा होता भी है। हम में से बहुत सारे लोग, अपने जीवन की दिशा तय नहीं कर पाते हैं। अथवा तय करने के बाद, उस दिशा में बढ़ नहीं पाते हैं।

एक और बात यहां समझ लेना जरूरी है। हम अपने आस-पास देखते हैं, और हमें अपने जैसे ही लोग दिखलाई देते हैं। मतलब ऐसे लोग ही दिखाई देते हैं जो जीवन में कुछ खास कर नहीं पा रहे हैं। हमें यह मानव जीवन की त्रासदी लगने लगती है। और हमें यह मानव जीवन की नियति लगने लगती है। कवियों ने इस विषय पर काव्य लिखे हैं, और उपन्यासकारों ने उपन्यास लिख डाले हैं। राजनेता हमें सुख-सुविधाएं देने का विश्वास दिलाने की कोशिश करते हुए दिखलाई देते हैं। कुछ गिने-चुने लोग ही, हमें आगे बढ़ने का रास्ता खुद बनाने की प्रेरणा देते हुए प्रतीत होते हैं, परंतु उनकी आवाज धीमी है, और उनके बताए रास्ते में हमें विश्वास कम है या वह रास्ता हमें अड़चन भरा लगता है। ऐसी स्थिति में बहुआयामी परिवर्तन एक नई उम्मीद की तरह लगता है। बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के कुछ दिनों के अंदर ही हमें यह अहसास हो जाता है कि यह परिवर्तन सबसे अलग है। एक सीधा रास्ता है। इस रास्ते में अड़चनें तो आती हैं, लेकिन एक विश्वास भी जगता है कि उन अड़चनों को हम पार कर पाएंगे।

अभी हमने देखा है कि बहुआयामी परिवर्तन अपनाने वाले सभी लोग आई ए एस या आई आई टी की प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त नहीं कर सकते हैं। परंतु बहुआयामी परिवर्तन की मदद से हम डॉक्टर या इंजीनियर बन सकते हैं। शिक्षक या सफल उद्योगपति बन सकते हैं, और राजनेता भी बन सकते हैं। इतना ही नहीं, बहुआयामी परिवर्तन की मदद से हम डिक्टेटर या स्मगलर भी बन सकते हैं। कहने का अर्थ है कि हम अपने बारे में निर्णय करने के लिए स्वतंत्र होते हैं, और जो भी चाहते हैं उस दिशा में बढ़ सकते हैं। और वहाँ एक के बाद एक सफलताएं हासिल कर सकते हैं। एक डॉक्टर, बहुआयामी परिवर्तन की मदद से, कई क्षेत्रों में अधिक सफलता के साथ आगे बढ़ सकता है—लोगों की सेवा कर सकता हैं, बहुत अधिक धन पैदा कर सकता हैं, अथवा किसी बीमारी के लिए एक नया और अच्छा उपचार खोज सकता है। एक इंजीनियर भी, बहुआयामी परिवर्तन की मदद से, कई क्षेत्रों में अधिक सफलता से आगे बढ़ सकता है—नई तकनीक विकसित करने में अधिक सफल हो सकता है और नए उत्पाद बनाने में अधिक सफल हो सकता है, उदाहरण के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाली कार जो पर्यावरण के लिए लाभकारी है। एक राजनेता देश की व्यवस्था को सुधारने में अधिक सफलता हासिल कर सकता है। बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के बाद जाहिर है कि अपने-अपने क्षेत्र में हरेक व्यक्ति अधिक तेजी से और अधिक विश्वसनीयता के साथ आगे बढ़ने में समर्थ हो सकता है। और यह प्रक्रिया जीवन भर जारी रहती है। बहुआयामी परिवर्तन अपनाने वालों का एक महत्वपूर्ण भाग, जीवन भर आगे बढ़ते जाने में समर्थ हो पाता है।

क्या हम जीवन में अधिक खुशी पाने के लिए है?

हम बहुत बार जीवन में आगे बढ़ते हैं, लेकिन उसके लिए अकसर एक बड़ी कीमत चुकाते हैं। कई बार हम परिवार को समय नहीं दे पाते हैं, और पारिवारिक जीवन में वैमनस्य का सामना करते हैं। सामाजिक संबंधों के लिए, हम समय नहीं निकाल पाते हैं, और समाज से कट जाते हैं। कुल मिलाकर हम अपने आपको सफल समझते हैं, और दुनिया भी हमें सफल व्यक्तियों में गिनती है, लेकिन हम जीवन में खुशी हासिल नहीं कर पाते हैं। बहुआयामी परिवर्तन को अपनाकर हम सफलता के साथ अधिक खुशी भी हासिल कर सकते हैं। बहुआयामी परिवर्तन को अपनाकर हम न केवल अपने जीवन में बल्कि दूसरों के जीवन में भी अधिक खुशी पैदा कर सकते हैं। हम जान लेते हैं कि दूसरों को खुशी देने में ही हमारी खुशी निहित है।

क्या हम पर्यावरण की समस्याओं से जुड़ने के लिए है?

बहुआयामी परिवर्तन को अपनाकर हम पर्यावरण की समस्याओं से जुड़ जाते हैं। हम इस विश्व और ब्रह्मांड से जुड़ जाने की कोशिश करने लगते हैं। क्योंकि इसके महत्व को हम जान पाते हैं, और उस ओर बढ़ने की ताकत अपने अंदर पैदा करने की कोशिश करने लगते हैं।


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