विधिपूर्वक अपनाने की जरूरत

बहुआयामी परिवर्तन के अंतर्गत बहुत सारी एक्टिविटीज को एक साथ और एक सोची समझी रणनीति के अनुसार बदलने की कोशिश की जाती है| बहुआयामी परिवर्तन अनेक बीमारियों और दूसरी परेशानियों का मुकाबला करने के लिए अपना सकते हैं, जिनमें गंभीर बीमारियाँ भी शामिल हैं| जाहिर है कि बहुआयामी परिवर्तन को सावधानी पूर्वक अपनाने की जरूरत है|बहुआयामी परिवर्तन को विधिपूर्वक अपनाने की जरूरत है, तभी हम बहुआयामी परिवर्तन अपनाने की प्रक्रिया पूरी कर पाएँगे| सबसे पहले हमें बहुआयामी परिवर्तन पर विश्वास होना चाहिए|

 

विश्वास के साथ अपनाने की जरूरत

बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के लिए, यह मार्गदर्शिका बनाई गई है| इस मार्गदर्शिका के पहले चरण का यह दूसरा अध्याय है। इस मार्गदर्शिका को मैं पूरा कर सका, क्योंकि मुझे विश्वास था—इसकी मदद से हम बहुआयामी परिवर्तन अपना सकेंगे। इसी विश्वास की जरूरत होगी अगर हम बहुआयामी परिवर्तन अपनाने की प्रक्रिया पूरी करना चाहते हैं, और मार्गदर्शिका का लाभ उठाना चाहते हैं|

कोई भी नया काम करने के लिए विश्वास जरूरी है| जैसे एक लेखक नई पुस्तक लिख रहा है| उसे विश्वास होना चाहिए कि वह पुस्तक पूरी कर सकेगा, और लोग उसे पढ़कर लाभ उठा सकेंगे| जैसे एक डॉक्टर अपनी पत्नी, पुत्र या पुत्री, या किसी और निकट व्यक्ति की सर्जरी करने वाला है| उसे विश्वास होना चाहिए कि उसके हाथ नहीं कांपेंगे| चाहे तैर कर इंग्लिश चैनल पार करना हो या हिमालय की चोटी पर चढ़ना हो, विश्वास तो जरूरी है|...

आम तौर पर लम्बे और मुश्किल कामों को पूरा करने के लिए विश्वास जरूरी माना जाता है| परन्तु बहुआयामी परिवर्तन अपनाना न लंबा है और न मुश्किल, फिर विश्वास की जरूरत क्यों है? कुछ उदाहरणों के द्वारा, मैं इसे स्पष्ट करने की कोशिश करूंगा|

एक सज्जन बहुत बार सिगरेट छोड़ने की कोशिश कर चुके थे लेकिन असफलता ही हाथ लगी थी, उनसे मैंने सिगरेट बंद करने के लिए कहा। वे बोले, “छोड़ तो दूंगा, लेकिन कुछ दिन के बाद फिर से शुरू कर दूंगा।” मैंने कहा, “अबकी बार आप फिर शुरू नहीं करेंगे। आज ही से छोड़ दीजिये, और अभी से छोड़ दीजिये। सारी सिगरेट और माचिस अभी फेंक दीजिये और देखिये। अभी आपको सिगरेट छोड़ने के लिए जोर लगाना पड़ेगा। पर कुछ दिन के बाद, यदि कोई व्यक्ति आपसे सिगरेट पीने के लिए आग्रह करेगा, तो आप वहां से भाग खड़े होंगे। मतलब आप ज़िंदगी भर के लिए सिगरेट और किसी भी प्रकार के तंबाकू से नफरत करने लगेंगे।” और ऐसा ही हुआ। उन्होंने मेरा विश्वास किया, और उनका सिगरेट पीना पूरी तरह से छूट गया।

एक सेवानिवृत्त डी आई जी ने सिगरेट छोड़ दी। कुछ दिन के बाद, मैं उनके घर गया| मैं पहुंचा, तभी टेलीफोन की घंटी बज उठी| वे अपने बेटे के पास ऑस्ट्रेलिया जाने वाले थे, और उसी का फोन था। बेटे की फरमाइश थी कि पिता अपनी पसंदीदा सिगरेट साथ लेकर आयें, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में वैसी सिगरेट बहुत महंगी थी। पिता बार-बार समझा रहे थे, कि उन्होंने सिगरेट छोड़ दी है, पर बेटे को विश्वास नहीं हो पा रहा था। बेटा भी सिगरेट पीता था।

मैंने डी आई जी से कहा, “मैं आपके बेटे की सिगरेट नहीं छुड़वा पाता—क्योंकि आपका बेटा मेरा विश्वास नहीं करता।” डी आई जी उस समय तो कुछ नहीं बोले, लेकिन कुछ महीनों के बाद उनका टेलीफोन ऑस्ट्रेलिया से मेरे पास आया। उनके बेटे ने सिगरेट छोड़ दी थी। मैंने पूछा कि कैसे छोड़ी? पिता को देखकर, बेटे को भी सिगरेट छोड़ने की प्रेरणा हुई। पिता ने बहुआयामी परिवर्तन समझाया, और बेटे ने उसका पालन विश्वास के साथ और विधिपूर्वक किया।

पति-पत्नी और घर के अन्य सदस्यों को, एक साथ बहुआयामी परिवर्तन अपनाने की सलाह दी जाती है। अब ऐसे ही एक पति-पत्नी की बात करूंगा।मनोहर को तंबाकू खाने की आदत थी। उसकी पत्नी रचना को कमर-दर्द की शिकायत थी। एक ही साथ दोनों ने बहुआयामी परिवर्तन अपनाया। रचना की कमर-दर्द की शिकायत पुरानी थी। अनेक वर्षों से इलाज चल रहा था, लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा था। आश्चर्य जनक रूप से उसका दर्द ठीक हो गया, लेकिन मनोहर की तंबाकू की आदत न छूटी।

तंबाकू की आदत क्यों नहीं छूटी? इस बात का परीक्षण किया गया—और यह पाया गया कि रचना ने बहुआयामी परिवर्तन को विधिपूर्वक अपनाया था, जबकि मनोहर ने लापरवाही दिखाई थी। मनोहर ने अपनी सफाई दी, “मुझे इन बातों पर विश्वास नहीं था। लेकिन अब हो गया है।” मनोहर का विश्वास रचना का कमर-दर्द ठीक होने से जमा था। विश्वास जमने के बाद, उसने दूसरा प्रयत्न किया—और विधिपूर्वक बहुआयामी परिवर्तन को अपनाया। अबकी बार तंबाकू की आदत पूरी तरह से छूट गई।

बहुआयामी परिवर्तन पर विश्वास, हम कैसे पा सकेंगे?

इन वीडिओ क्लिप्स को देखिए ...

नब्बे वर्ष की आयु में चमत्कारिक लाभ

नब्बे वर्ष की उम्र में इस व्यक्ति के कूल्हे की हड्डी बदली गई| सर्जरी के उपरांत चार महीने तक बिस्तर में पड़े रहने के बाद, जमीन पर पैर रखने की, और एक सामान्य जीवन व्यतीत करने की कोई आशा नहीं बची थी| लेकिन बहुआयामी परिवर्तन अपनाने से चमत्कार हुआ, और मिनटों में ही चलना-फिरना, सीढ़ी चढ़ना शुरू हो गया|


अनेक वर्षों के बाद तम्बाकू से छुटकारा

छयालीस वर्ष का यह व्यक्ति, अपने गुजरे हुए कल पर और तम्बाकू की लत पर नजर डालता है| शुरुआत सिगरेट पीने से हुई| बारह सालों के बाद, उसे खयाल आया कि सिगरेट का धुआं उसके बच्चोँ के लिए भी हानिकारक है| इसके बाद उसने सिगरेट छोड़कर गुटके का प्रयोग शुरू कर दिया, लेकिन तम्बाकू की लत न छूटी| बहुत साल बीत गए| इस बीच पत्नी और बच्चे, तम्बाकू छोड़ने के लिए उसे लगातार कुरेदते रहते थे| फिर उसने बहुआयामी परिवर्तन अपनाकर तम्बाकू का प्रयोग छोड़ दिया|


आत्महत्या का विचार मन से पूरी तरह से निकल गया

नौकरी से निकाल दिए जाने के बाद, इस व्यक्ति को आत्महत्या के अतिरिक्त कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था| अवसाद और चिंता की दवाइयाँ कुछ काम नहीं कर रही थीं| बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के बाद उसे लगाने लगा कि नौकरी फिर से मिल जाएगी, और अबकी बार नौकरी नहीं छूटेगी| आत्महत्या का खयाल भी, उसके मन से निकल गया|


पैंतीस सालों से इरीटेबल बावेल सिंड्रोम से ग्रस्त व्यक्ति की कहानी

तिरपन वर्ष का यह शिक्षक पैंतीस सालों से इरीटेबल बावेल सिंड्रोम से जूझ रहा था| वह नई दिल्ली स्थित आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेंस में भी इलाज करवा चुका था| अनेक वेबसाइटों के चक्कर लगाने और किताबें पढ़ने के बाद भी उसे कोई राहत नहीं मिली थी| उसका पारिवारिक और सामाजिक जीवन ध्वस्त हो चुका था|बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के साथ ही असाध्य लगने वाली बीमारी ठीक होनी शुरू हो गई|


मोटापा कम होना शुरू हो गया

यह महिला मोटापे से परेशान थी| मोटापे के कारण सांस फूलता था, और घुटनों में दर्द रहता था| दो माह में ही वजन कम होना शुरू हो गया, और बाकी तकलीफें भी कम होने लगीं|


बीस साल पुरानी शराब की आदत को विदाई

जवाहर सैनी पिछले दस महीनों से पेटदर्द से परेशान था| उसने इस बीच कम से कम दस डॉक्टरों को दिखाया था|उसे कोई फायदा नहीं था| डॉक्टर बीड़ी और शराब छोड़ने के लिए कहते थे, जो जवाहर से जम नहीं पा रहा था| बहुआयामी परिवर्तन अपनाकर, जवाहर के लिए बीड़ी और शराब छोड़ना, दोनों संभव हो गए|


कैलाश चंद्र... अपनी पंद्रह साल से चली आ रही परेशानियों के बारे में

पिछले पंद्रह सालों से कैलाश चंद्र डिप्रैशन की दवाइयां खा रहा था| वह अपनी तकलीफों के बारे में इस वीडियो में बताता है. कैलाश चंद्र, यह उसका असली नाम नहीं है|

केवल ग्यारह दिनों के बाद...

केवल ग्यारह दिनों में, कैलाश चंद्र के जीवन में आए परिवर्तन को यह वीडियो दिखाता है| यह परिवर्तन अनेक दिशाओं में हैं, सचमुच में बहुआयामी है|


कैलाश चंद्र... केवल दो महीने के बाद

केवल दो महीने में कैलास चंद्र के जीवन में आए परिवर्तन को देखिए...


कैलाश चंद्र... साढ़े तीन महीने के बाद—एक महापरिवर्तन

केवल साढ़े तीन महीने में, कैलाश चंद्र के जीवन में आए परिवर्तन को देखिए|


अस्थमा के दौरे पड़ना बंद

दलाल शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय, नागपुर में स्टेनो के पद पर कार्यरत हैं| इस वीडियो में दलाल अपने अस्थमा के बारे में बताती हैं—जिसके लक्षण २००१ में शुरू हुए| हर साल खासकर जाड़ों में अस्थमा का दौरा पड़ना लाजमी था| वर्ष २०११ के बाद समस्या बढ़ गई| वर्ष २०१५ के दौरान बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के बाद, अस्थमा के दौरे पड़ना बंद हो गया|


क्या आपके अस्थमा के इनहेलर में सालमेटेरोल या फोरमोटेरोल है?

अस्वाद वाघमारे, उम्र 31 वर्ष, नागपुर निवासी, पेशे से सोफ्टवेयर इंजीनियर, अस्थमा की दवाओं के बारे में अपना अनुभव शेयर कर रहे हैं. सोफ्टवेयर के अतिरिक्त, अस्वाद फोटोग्राफी, गायन, क्रिकेट, और भी कई दूसरे शौक रखते हैं. वे चाहते हैं कि अस्थमा उनके जीवन को किसी प्रकार से भी बाधित न करे. अस्वाद को 9 महीने की उम्र से अस्थमा की तकलीफ है. इस प्रकार से उन्होंने अपना सारा जीवन ही अस्थमा के साथ गुजारा है.

अस्वाद लगभग तीन वर्ष से फोरमोटेरोल नाम की दवाई इनहेलर के रूप में ले रहे थे. यह इनहेलर उन्हेंं स्टीरॉयड के साथ मिलाकर ही दिया जाता था. फिर भी फोरमोटेरोल बंद करने का क्या असर हुआ, यह इस वीडियो में देखिए. फोरमोटेरोल बंद करने से अस्वाद का अस्थमा ठीक प्रकार से काबू में आ गया. और वे अस्थेलिन इनहेलर भी ले रहे थे, वह भी बंद हो गया. साथ ही साथ, अस्वाद को लगता है कि उनके अस्थमा का कंट्रोल बेहतर हुआ है—इस हद तक कि उन्हें लगता है अब अस्थमा का अटैक नहीं आयेगा. केवल आठ दिन में, उनका डर खतम हो गया है.

चेतावनी: बिना डॉक्टरी सलाह के, केवल अपनी मर्जी से दवाऐं न बदलें. ऐसा करना खतरनाक हो सकता है. अस्वाद ने भी डॉक्टर की निगरानी में ही अपनी दवाऐं बंद कीं. इसके साथ-साथ, अस्वाद बहुआयामी परिवर्तन को भी अपना रहे हैं. दवाइयाँ कम करने में बहुआयामी परिवर्तन का भी बड़ा हाथ है|


बहुआयामी परिवर्तन द्वारा स्थिरता

राज मुने को आठ साल गुजरने के बाद भी इन्जीनियरिंग की डिग्री हासिल न हो पा रही थी| बहुत सारे कोर्स और सेमीनार अटैंड करने और किताबें पढ़ने के बाद भी कुछ हासिल नहीं हुआ था| फिर राज ने वर्ष २०१७ में बहुआयामी परिवर्तन अपनाया| इसके बाद राज को इन्जिनीरिंग की डिग्री भी मिल गई| उसका एम बी ए भी हो गया, और नौकरी भी लग गई| यहाँ राज बहुआयामी परिवर्तन से आने वाली स्थिरता के बारे में बता रहा है|


बहुआयामी परिवर्तन पर विश्वास, हम कैसे पा सकेंगे?

बहुआयामी परिवर्तन का आधार

बहुआयामी परिवर्तन का एक मजबूत वैज्ञानिक और सैद्धांतिक आधार है|वर्तमान में और अलग-अलग बीमारियों के सन्दर्भ में बहुआयामी परिवर्तन का क्या स्थान हैं? इसके बारे में हम विस्तार से जान सकते हैं: यहाँ क्लिक करें ...परिपेक्ष्य और परिशिष्ट|

हमारे नजदीकी लोगों के अनुभव

क्या हमारे नजदीकी लोगों में से किसी ने बहुआयामी परिवर्तन अपनाया है? हमें उनके अनुभवों को जानने और गहराई से समझने की जरूरत है| इन अनुभवों के आधार पर भी हम बहुआयामी परिवर्तन पर विश्वास करने का निश्चय कर सकते हैं|

बहुआयामी परिवर्तन हानिरहित है|

बहुआयामी परिवर्तन में कुछ भी हानिकारक नहीं है| इसलिए भी हम इसे अपना सकते है| हो सकता है कि हमारा कमर-दर्द या फिर और कोई रोग किसी उपचार से ठीक न हो पा रहा हो| ऐसी स्थिति में भी हम बहुआयामी परिवर्तन अपना कर देख सकते हैं|

क्या बहुआयामी परिवर्तन पूरी तरह से सुरक्षित है?

यहाँ बहुआयामी परिवर्तन के सुरक्षित होने के बारे में जान लेना जरूरी है|

कई दशकों लंबे अनुभव के दौरान, बहुआयामी परिवर्तन पूरी तरह से सुरक्षित पाया गया है।

तंबाकू से मुक्ति के लिये, बहुआयामी परिवर्तन पूरी तरह से सुरक्षित है। तंबाकू का प्रयोग करने वाले कई बीमारियों से पीड़ित हो सकते हैं—जैसे कि कैंसर, हृदय रोग, ब्रोंकाइटिस इत्यादि । ऐसे समय में, तंबाकू तुरंत छोड़ने की सलाह दी जाती है। इन परिस्थितियो में बहुआयामी परिवर्तन पूरी तरह से सुरक्षित है।

बहुआयामी परिवर्तन अपनाने वाले कई एक्यूट रोगों से भी पीड़ित हो सकते हैं, जैसे कि हार्ट-अटैक, अनियंत्रित ब्लड प्रैशर इत्यादि । ऐसे समय में, बहुआयामी परिवर्तन के साथ में उचित डाक्टरी सलाह जरूरी है। क्योंकि बहुआयामी परिवर्तन ऐसे एक्यूट रोगों का उपचार नहीं है।

पैरासिटामौल का प्रयोग: पांचवें अध्याय में, पैरासिटामौल के उपयोग की सलाह दी गई है। यह बुखार और दर्द में प्रयोग की जाने वाली आम दवाई है—जो डॉक्टर के पर्चे के बिना खरीदी जा सकती है।

धीमा और नियंत्रित सांस: चौथे अध्याय में, सांस को नियंत्रित करने की सलाह दी गई है। यही सलाह सांस के रोगों जैसे एक्यूट अस्थमा में भी दी जाती रही है, और पूरी तरह से सुरक्षित पाई गई है।

बहुआयामी परिवर्तन के बारे में शंकाऐं

इस परिवर्तन के सुरक्षित होने के बावजूद, कई प्रकार की निर्मूल शंकाऐं इस परिवर्तन के बारे में जाहिर की जाती हैं। इसका एक उदाहरण नीचे दिया जा रहा है।

राहुल रोजाना चालीस के करीब सिगरट पीता था। उसका पाँच साल का एक बेटा था। राहुल और उसकी पत्नी दूसरा बच्चा चाहते थे। “क्या इस स्थिति में, बहुआयामी परिवर्तन अपनाना उचित होगा?” राहुल की पत्नी ने पूछा। उसका मतलब था बहुआयामी परिवर्तन का गर्भधारण और होने वाले बच्चे पर क्या प्रभाव होगा?

“सिगरेट एकाएक छोड़ने का बच्चे पर क्या प्रभाव होगा?” राहूल भीे पूछ बैठा।

गर्भस्थ और नवजात शिशु पर, सिगरेट के धुऐं का हानिकारक प्रभाव होता है—इसलिए गर्भधारण से पहले माता-पिता का धूम्रपान छोड़ना बहुत अच्छा है। बहुआयामी परिवर्तन से होने वाले लाभों का वर्णन इस मार्गदर्शिका में किया गया है (देखें परिशिष्ट)। हम जान सकते है कि बहुआयामी परिवर्त्तन तनाव के दुष्प्रभावों से बचने का अच्छा उपाय है। इसके द्वारा गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है, और गर्भस्थ शिशु पर भी तनाव कम होने का अच्छा प्रभाव होता है।

बिना विश्वास पाए, बहुआयामी परिवर्तन अपनाने की कोशिश न करें

जब तक बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के बारे में हमारा मन पूरा पक्का न हो जाए, हमें इसे अपनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए| बिना विश्वास किए, हम बहुआयामी परिवर्तन ठीक ढंग से नहीं अपना पाएँगे, और लाभ की संभावना क्षीण हो जाएगी|





मार्गदर्शिका