एक बड़े परिवर्तन का वैज्ञानिक और सैद्धांतिक परिपेक्ष्य

बहुआयामी परिवर्तन कोई मेडिकल इंटरवेंशन न होकर एक सामाजिक हस्तक्षेप है| फिर भी इस हस्तक्षेप का वैज्ञानिक और सैद्धांतिक आधार समझने के लिए, यहाँ हम एक मेडिकल मॉडल का प्रयोग करेंगे|

बीमारी पैदा होने और इसमें सुधार के चार महत्वपूर्ण स्तर हैं


हमें अपनी एक्टीविटीज को बदल पाना मुश्किल लग सकता है, और हम बहुआयामी परिवर्तन को संदेह भारी नजर से देख सकते हैं, लेकिन इसके सिवा हमारे पास कोई रास्ता नहीं है|

बीमारी का मुकाबला चारों स्तरों पर संभव है?

  • जनसाधारण की सामाजिक, शैक्षणिक, और आर्थिक स्थिति को सुधारना| वातावरण का संरक्षण करना|

और हरेक व्यक्ति में इन तीन स्तरों पर

  • हमारी एक्टीविटीज को बदलकर, जिसे हम आम तौर पर जीवनशैली में सुधार के नाम से जानते हैं|
  • मस्तिष्क, प्रतिरोधक क्षमता, और हारमोंस—इन तीनों को मिलाकर नियंत्रक कह सकते हैं| नियंत्रकों की विकृतियाँ अनेक प्रकार की बीमारियों का कारण बनती हैं| नियंत्रकों को सुधार कर बीमारियों का मुकाबला संभव हैं|
  • अंत में हरेक बीमारी का अलग-अलग निदान और उपचार, जैसा आधुनिक अस्पतालों में होता है|

किस स्तर पर हमने कितनी तरक्की हासिल कर ली है?

  • मनुष्य की सामाजिक, शैक्षणिक, और आर्थिक स्थिति को सुधार हुआ है| लेकिन वातावरण का संरक्षण नहीं हुआ है| एक प्रकार की बीमारियाँ कम हुई हैं, लेकिन दूसरी बीमारियों ने उनका स्थान ले लिया है|
  • सामाजिक असमानता बढी है| इसके कारण, जनसंख्या के एक समृद्ध भाग में बीमारियाँ कम हुई हैं, परन्तु दूसरे भागों में कम नहीं हुई हैं, या बढी हैं|
  • एक्टीविटीज को बदलने का महत्त्व हम हजारों सालों से जानते हैं| लेकिन आज भी अपनी एक्टीविटीज को बदल पाने का कोई ठोस रास्ता हमारे पास नहीं है|
  • मस्तिष्क, प्रतिरोधक क्षमता, और हारमोंस: इन नियंत्रकों की विकृतियाँ कम करने का कोई सीधा रास्ता हमारे पास अब तक नहीं है|
  • हरेक बीमारी का अलग-अलग निदान और उपचार, इस दिशा में काम हुआ है—जो आधुनिक चिकित्सा प्रणाली की सफलता मानी जाती हैं|

हमारे लिए एक्टीविटीज के स्तर पर आगे बढ़ना जरूरी है

एक्टीविटीज को बदलकर हम सामाजिक और आर्थिक स्थिति और सुधार सकते हैं| एक्टीविटीज को बदलकर हम पर्यावरण की सुरक्षा कर सकते हैं|

एक्टीविटीज को बदलकर हम सामाजिक असमानता को कम करने का प्रयत्न कर सकते हैं|

एक्टीविटीज को बदलकर हम जीवनशैली सुधार सकते हैं|

एक्टीविटीज को बदलकर हम नियंत्रकों (मस्तिष्क, प्रतिरोधक क्षमता,हारमोंस) को मजबूत बना सकते हैं|

एक्टीविटीज को बदलकर हम तनाव का मुकाबला कर सकते हैं|

एक्टीविटीज को बदलना सस्ता है, या इसमें कोई खर्च नहीं होता है| एक्टीविटीज को बदलने का रास्ता विना भेदभाव हर किसी के लिए सुलभ हो सकता है|

इसलिए हम मान सकते हैं कि चिकित्सा के क्षेत्र में अगला बड़ा आन्दोलन, एक्टीविटीज को बदलने वाले किसी हस्तक्षेप के रूप में आएगा|





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