तम्बाकू छोड़ने का बेहतर रास्ता क्या है?

सवाल उठेगा कि बहुआयामी परिवर्तन तम्बाकू छोड़ने का सबसे अच्छा उपाय क्यों है? इसे गहराई से समझना पड़ेगा। तंबाकू एक प्रकार का नशा है। इस नशे की लत पड़ जाती है। इस लत को कैसे छोड़ा जा सकता है? बहुआयामी परिवर्तन की मजबूती और अच्छाई, इसी प्रश्न के उत्तर में छुपी है। तंबाकू की लत के बारे में विस्तार से जानकर ही, हम बहुआयामी परिवर्तन की श्रेष्ठता को समझने के नजदीक पहुंच सकते हैं।

तम्बाकू छोड़ पाने के लिए मन की ताकत काफी नहीं है

क्यों बन जाते हैं हम तम्बाकू के गुलाम?

तलब के बारे में, हमने जरूर सुना होगा, जिसे हम लालसा या वासना भी कह सकते हैं। तम्बाकू की भी तलब होती है। सिगरेट पीने वाले को थोड़ी-थोड़ी देर में सिगरेट सुलगाने की इच्छा होती है। यही बात गुटका और खैनी खाने वालों के ऊपर भी लागू होती है। तंबाकू छोड़ने के कौन-कौन से रास्ते हैं? और उन रास्तों में से कौन सा रास्ता बेहतर है? मन की ताकत का इस्तेमाल करना और तंबाकू का प्रयोग छोड़ देना, यह एक रास्ता है। इस रास्ते का प्रयोग हम अकसर करते हैं। मन की ताकत लगाकर तंबाकू का प्रयोग बंद कर देते हैं। लेकिन तंबाकू की इच्छा बनी रहती है। कुछ दिन के बाद मन की ताकत तलब के सामने घुटने टेक देती है, और हम तंबाकू का प्रयोग फिर शुरू कर देते हैं। बार-बार असफल होने के बाद हम प्रयत्न करना भी बंद कर देते हैं। इसीलिए हम यह कहते हैं कि तंबाकू का प्रयोग छोड़ना मुश्किल है।

एक बेहतर रास्ता

तंबाकू छोड़ने का एक और भी रास्ता है—तंबाकू की तलब को पूरी तरह से समाप्त कर देना। इस रास्ते पर चलकर हर कोई तंबाकू का प्रयोग बंद कर सकता है। कुछ समय में तंबाकू की तलब समाप्त हो जाती है, और इसके बाद तंबाकू का प्रयोग करना संभव ही नहीं रहता है। हमने देखा होगा, बीड़ी सिगरेट न पीने वाले, इसके धुएं को सहन नहीं कर पाते हैं—हमारी भी कुछ ऐसी ही हालत हो जाती है, और एक चेन स्मोकर के लिए भी तंबाकू का प्रयोग असहनीय हो जाता है।

तंबाकू की तलब समाप्त करने के लिए, कई बार दवाइयों का प्रयोग किया जाता है। लेकिन इस मार्गदर्शिका में दवाइयों के प्रयोग वाला रास्ता नहीं अपनाया गया है। केवल बहुआयामी परिवर्तन द्वारा आसानी से तम्बाकू छोड़ा जा सकता है। इसके लिए थोड़ी सी मन की ताकत भी चाहिए, जो हम सभी के पास होती है।

तम्बाकू की तलब के दो प्रकार

हमने तम्बाकू की तलब के बारे में तो जरूर सुना होगा, लेकिन हम यह नहीं जानते हैं कि यह तलब दो प्रकार की होती है। एक तलब निकोटीन नामक रसायन से जुड़ी हुई है। दूसरी तलब हमारी आदत से जुड़ी हुई है—मतलब हाथ में सिगरेट पकड़कर उसे फूंकना हमें अच्छा लगता। एक विशेष मजा इस काम में हमें मिलता है। तम्बाकू के प्रयोग की यादें, हमारे मस्तिष्क में बस जाती हैं| इन यादों का निकोटीन से कुछ लेना देना नहीं है, लेकिन इन यादों को निकाले बिना तम्बाकू छोड़ना असंभव हो जाता है| अब विस्तार से दोनों प्रकार की तम्बाकू की तलब को समझते हैं|

निकोटीन से जुड़ी तलब

तम्बाकू में निकोटीन नाम का एक रसायन होता है। तम्बाकू का किसी भी रूप में प्रयोग करने से यह हमारे रक्त में मिल जाता है। यहां सिगरेट का उदाहरण ले लेते हैं। हम सिगरेट सुलगाते हैं, और कश लगाना शुरू कर देते हैं। तुरंत ही निकोटीन फेफड़ों से होता हुआ हमारे रक्त में मिलने लगता है। जितनी देर हम सिगरेट पीते हैं, रक्त में निकोटीन का स्तर बढ़ता जाता है। कुछ देर बाद हमारी सिगरेट खत्म हो जाती है, इसलिए खून में निकोटीन का प्रवेश बंद हो जाता है, और रक्त में निकोटीन की मात्रा कम होनी शुरू हो जाती है। मान लीजिए हम निकोटीन के इस बढ़े हुए स्तर के आदी हैं। कुछ ही देर में, निकोटीन के कम हुए स्तर का हमें पता चल जाता है, और हमारी इच्छा सिगरेट सुलगाने की होने लगती है। यही निकोटीन से जुड़ी तम्बाकू की तलब है।

तम्बाकू छोड़कर ई-सिगरेट का प्रयोग

जो बात सिगरेट के इस्तेमाल पर लागू होती है, वही बात बीड़ी, चिलम, हुक्का, गुटका या किसी भी और प्रकार के तम्बाकू पर लागू होती है| यह सिगरेट या बीड़ी की तलब नहीं है| क्योंकि सिगरेट की तलब बीड़ी से भी शांत हो जाती है| यह तम्बाकू में मौजूद निकोटीन की तलब है, क्योंकि निकोटीन देने से भी यह तलब मिट जाती है| तम्बाकू का प्रयोग करने वाले लोग, तम्बाकू छोड़कर ई-सिगरेट का प्रयोग शुरू कर सकते हैं, जिसमें केवल निकोटीन है| मतलब हम तम्बाकू में मौजूद निकोटीन के बदले ई-सिगरेट में मौजूद निकोटीन का प्रयोग आसानी से शुरू कर सकते हैं| 

निकोटीन विड्रावल के लक्षण

कुछ देर बाद हमारी फिर से बीड़ी सिगरेट की इच्छा होने लगती है| अब हम समझ गए होंगे कि इस तलब का कारण, निकोटिन की मात्रा में गिरावट है, अंग्रेजी में जिसे निकोटीन विड्रावल कहते हैं। इसके कई लक्षण हो सकते हैं—जैसे कि चिड़चिड़ापन, गुस्सा, निराशा और कुंठा, बेचैनी, एकाग्रता में कमी, नींद न आना, घबराहट इत्यादि । निकोटीन न मिलने से कुछ समय के लिए हृदय गति कम हो सकती है। तम्बाकू का प्रयोग करने की इच्छा तेज होने लगती है, या तो इसके बदले कुछ तला-भुना या मीठा खाने का दिल करता है। सिर दुखना और पसीना आना जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। लेकिन इन लक्षणों के कारण कोई खतरा नहीं होता है। निकोटीन न मिल ने के ये लक्षण एक सप्ताह में पूरी तरह से समाप्त हो जाते हैं। मतलब एक सप्ताह बाद हमारा शरीर तम्बाकू की कमी को महसूस करना पूरी तरह से बंद कर देता है, या कह लीजिए शरीर तम्बाकू को भूल जाता है। निकोटीन की तलब, लगभग एक सप्ताह में पूरी तरह से समाप्त हो जाती है। मतलब निकोटीन की तलब से छुटकारा पा लेना आसान है। फिर क्यों तम्बाकू छोड़ना इतना मुश्किल माना जाता है?

इस तलब के बारे में दो बातें दोहराना जरूरी है। पहली बात—निकोटीन की तलब को नजर-अंदाज करने में कोई भी खतरा नहीं है, इसलिए तम्बाकू का प्रयोग एकाएक छोड़ देना पूरी तरह से सुरक्षित है। दूसरी बात—निकोटीन की तलब कुछ दिन तक ही रहती है। लगभग एक सप्ताह के बाद निकोटीन की तलब पूरी तरह से मिट जाती है, इसलिए इच्छा-शक्ति द्वारा एक सप्ताह के लिए तम्बाकू का प्रयोग बंद कर देना इस तलब को मिटा देने का पर्याप्त उपाय है।

सिगरेट या तम्बाकू के उपयोग से जुड़ी तलब

यह तलब तम्बाकू के उपयोग की लम्बी आदत का परिणाम है। निकोटीन की तलब से अलग है, क्योंकि यह तलब किसी कैमिकल पर आधारित नहीं है। कुछ हद तक यह व्यवहारजन्य है, जैसे किसी व्यक्ति को दांतों से नाखून कुतरने की आदत पड़ जाती है। काफी हद तक यह तलब तम्बाकू के प्रयोग से भूतकाल में मिले हुए मानसिक संतोष से जुड़ी है। यह संतोष ही हमें तम्बाकू की याद दिलाता है। यही संतोष हमें बार-बार तम्बाकू के उत्पादों का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करता है। यही संतोष हमें कई दूसरे तम्बाकू से बेहतर तरीकों से भी मिल सकता है। नीचे देखें—हम तम्बाकू का प्रयोग क्यों करते हैं?

तम्बाकू के उपयोग से जुड़ी इन यादों को अपने मस्तिष्क के सन्दर्भ में समझने की कोशिश करते हैं|ये यादें मस्तिष्क के दो अलग-अलग हिस्सों में रहती हैं। एक हिस्सा है, प्री-फ्रंटल-कोर्टेक्स। मस्तिष्क के सामने का यह हिस्सा हमें मनुष्य बनाता है। यह हिस्सा हमारे विचारों, विवेक, भाषा, और निर्णय लेने की क्षमता से जुड़ा है। इस हिस्से में, तंबाकू से होने वाली हानियों की पूरी जानकारी रहती है। इस हिस्से में हमें अपनी लत के बारे में भी पूरी जानकारी रहती है। इस हिस्से में हमारे अपने बारे में भी जानकारी रहती है। जैसे कि हमें तंबाकू का प्रयोग छोड़ देना चाहिए। तंबाकू का प्रयोग छोड़ने के पिछले प्रयत्नों की विस्तृत जानकारी भी मस्तिष्क किसी भाग में रहती हैं। घर के अन्य सदस्यों पर, हमारे धूम्रपान के संभावित दुष्परिणामों की जानकारी भी यही रहती है। मस्तिष्क का यह भाग चाहता है की हम तम्बाकू का प्रयोग सदैव के लिए, और बिना देरी किए छोड़ दें।

तम्बाकू से जुड़ी यादें अमिगडाला में संग्रहीत रहती हैं

ऊपर के चित्र में नीले रंग से दिखाया गया मस्तिष्क का एक दूसरा हिस्सा है, अमिगडाला—जहां हम केवल तीव्र भावनाओं से जुड़ी यादें संजोकर रखते हैं। मस्तिष्क किसी हिस्से में हम तंबाकू की गंध, उसका स्वाद, और तंबाकू जुड़ी वस्तुओं जैसे कि लाइटर, एशट्रे, एवं सिगरेट के पैकेट के चित्र संजोकर रखते हैं। जैसे ही तंबाकू की गंध हमारी नाक तक पहुंचती है, या तंबाकू से संबंधित कोई वस्तु हमारी नजरों के सामने आती है, हमारे हाथ और लब सिगरेट पकड़ने के लिए मचलने लगते हैं। विरोधाभास की हद, हमें यहाँ देखने को मिल सकती है। वैधानिक चेतावनी - सिगरेट पीना और तंबाकू का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है - ये शब्द किसी बोर्ड पर लिखे होने पर भी हमारे कदम खुद-ब-खुद उस ओर बढ़ने लगते हैं।

तंबाकू से जुड़ी तीव्र भावनाएं और भी है जो हम अमिगडाला मे संजोकर रखते हैं। दोस्तों की महफिल जमी हो और सिगरेट या तंबाकू ना हो - यह संभव नहीं है। शराब का दौर चल रहा हो, तो सिगरेट की याद आना लाजमी है। मतलब दोस्तों की महफिल के साथ, और शराब के दौर के साथ, सिगरेट और तंबाकू की यादें जुड़ी हुई है। एक सामने हो तो दूसरा याद आता है। इसी प्रकार से तनाव भरी स्थितियां भी तंबाकू और सिगरेट के प्रयोग से जुड़ी है। इन सब बातों का मतलब समझना जरूरी है। तंबाकू का प्रयोग सामाजिक संबंधों का निर्वाह करने के लिए, सामाजिक संबंधों को मजबूती प्रदान करने के लिए, किया जाता है। सिगरेट पीने वाले दोस्त की केवल मौजूदगी भर, हमें सिगरेट पीने के लिए उकसा देती है। किसी रेस्टोरेंट में सिगरेट के धुए की गंध भी, हमें सिगरेट पीने के लिए प्रेरित कर देती है। अमिगडाला में ये यादें, लंबे समय तक जिंदा रहती हैं। और इनके परिणाम स्वरूप, तंबाकू छोड़ने के दस-बीस साल के बाद भी, हम तंबाकू का प्रयोग फिर से अपना सकते हैं। इन यादों के कारण ही तम्बाकू छोड़ना कठिन हो जाता है। तीव्र भावनाएँ न मिटने वाली यादों को जन्म देती हैं—इसकी अधिक जानकारी के लिए पढ़िए: पिछले जीवन से जुड़े दर्द को भूल जाना

निकोटीन की तलब से छुटकारा आसान है, लेकिन तम्बाकू के उपयोग से जुड़ी तलब का सामना मुश्किल है, इसीलिए तम्बाकू का प्रयोग छोड़ने के बाद फिर से शुरू हो जाता है।

हम तम्बाकू का प्रयोग क्यों करते हैं?

हम ईमानदारी से विचार करें कि हम तंबाकू का प्रयोग क्यों करते हैं? हममें से कुछ मन को विचलित होने से बचाने या स्थिरता बनाए रखने के लिए तंबाकू का प्रयोग करते हैं। कुछ एकाग्रता बनाए रखने के लिए करते हैं। कुछ अकेलापन के अहसास को दूर करने के लिए करते हैं। कुछ समय काटने के लिए करते हैं। कुछ मनोभावों को नियंत्रित करने के लिए तंबाकू का प्रयोग करते हैं। कुछ के लिए तंबाकू या सिगरेट पेश करना एक सामाजिक व्यवहार है, और सामाजिक सम्बन्धों को दृढ़ करने का साधन है। कुछ को सिगरेट या तंबाकू का प्रयोग, सवेरे मलत्याग करने के लिए, जरूरी है—इसलिए वे उठने के तुरंत बाद गुटका खाते हैं या सिगरेट सुलगा लेते हैं। यहां हम तंबाकू का प्रयोग क्यों करते हैं, इसके कुछ ही कारण दिये गए हैं। कई और भी कारण हो सकते हैं।

हम चाहे किसी भी कारण से तंबाकू का प्रयोग करते हों, बहुआयामी परिवर्तन के द्वारा भी हमारी वह जरूरत पूरी हो सकती है। हम मन की एकाग्रता और दृढ़ता को बढ़ा सकते हैं। हम सामाजिक सम्बन्धों को मजबूत कर सकते हैं। हम अकेलापन का अहसास समाप्त कर सकते हैं, और अपने मनोभावों को भी नियंत्रित कर सकते हैं। साथ ही साथ, हमें सवेरे-सवेरे तंबाकू के प्रयोग की जरूरत भी नहीं रहती है। इस प्रकार से बहुआयामी परिवर्तन तंबाकू का एक बहुत अच्छा पर्याय है, जो तंबाकू की जरूरत और उसकी तलब को समाप्त कर देता है। इसीलिए बहुआयामी परिवर्तन द्वारा, तम्बाकू छोड़ने वाला व्यक्ति कभी भी तम्बाकू का प्रयोग फिर से शुरू नहीं करता है। इसीलिए बहुआयामी परिवर्तन तम्बाकू छोड़ने का बेहतर उपाय है।

देशों के अनुसार धूम्रपानकर्ताओं का प्रतिशत - २०१६

विश्व में तम्बाकू की समस्या का आकार और प्रकार

पिछली शताब्दी में तम्बाकू के प्रयोग के कारण विश्वभर में लगभग 10 करोड़ मौतें हुई थीं। आज के रुझानों के अनुसार इक्कीसवीं शती में यह संख्या बढ़कर 100 करोड़ तक जाने की संभावना है। तम्बाकू के बारे में ये आंकड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन की देन हैं। तम्बाकू से होने वाली ये मौतें, भारत में सबसे तेज गति से बढ़ रही हैं। और भारत में ये मौतें मध्यआयु बर्ग के कामकाजी लोगों में सबसे अधिक बढ़ रही हैं—जिससे मृतकों के परिवार आर्थिक रूप से टूटते हैं, और देश का भी आर्थिक नुकसान होता है। सबसे चिंताजनक बात है कि तम्बाकू नियंत्रण के आधुनिक तरीकों के बावजूद गरीबों में तम्बाकू के प्रयोग का प्रतिशत बढ़ रहा है। हमारे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की 2004 में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य द्वारा स्थापित सबसे अच्छे केंद्रों में जाकर भी लगभग सोलह प्रतिशत लोग ही तम्बाकू छोड़ने में सफल हो पाते हैं। जाहिर है ये तरीके सफल नहीं हैं। हमें दूसरे तरीके दरकार हैं, और एक नई कोशिश की जरूरत है।

तम्बाकू छोड़ने के लिए बहुआयामी परिवर्तन का प्रयोग, हमें कहीं अधिक आगे ले जा सकता है।

 





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