जीवन के बहुत सारे कायदे-कानून पीछे छोड़कर आगे चल पड़ना

क्या हम अपने बनाए कैदखाने में बंद हैं?

हम अपने लिए कुछ कायदे-कानून बनाते हैं, और बहुत करके इन कानूनों के हिसाब से ही अपना जीवन चलाने की कोशिश करते हैं। इतना ही नहीं, हम चाहते हैं कि हमारे आस-पास के लोग भी इन कानूनों का पालन करें। ऐसे कुछ आम उदाहरण नीचे दिए गए हैं।

चालीस वर्षीय नरेश, स्कूल में शिक्षक था। उसकी दो बेटियां थीं, जो स्कूल में पढ़ रही थीं। नरेश को लगता था कि लड़के-लड़कियों को आपस में अधिक बातें नहीं करना चाहिए। खास तौर पर लड़कियों को इस बारे में अधिक सजग रहना चाहिए। इसलिए वह अपनी बेटियों पर तरह-तरह के प्रतिबंध लगाता था। उन्हें अकेले घर से बाहर निकलने की मनाही थी। किसी पार्टी या समारोह में लड़कियां, अपने माता-पिता के साथ ही जा सकती थीं। उन्हें भड़कीले कपड़े पहनने की भी मनाही थी। कम्प्यूटर और इंटरनेट पर लड़कियां क्या कर रही थीं, इस पर भी नरेश की कड़ी नजर रहती थी।

पचास वर्षीय वसुधा, एक कम पढ़ी-लिखी घरेलू स्त्री थी। उसके बेटे का विवाह सरिता से हुआ, जो एम ए पास थी और समझदार थी। वसुधा के बेटे की मासिक आय साधारण थी—इसलिए सरिता चाहती थी कि वह भी कोई नौकरी कर ले। उसे एक पास के स्कूल में शिक्षिका की नौकरी मिल भी गई। काम अधिक नहीं था, और वेतन भी अच्छा था। पर वसुधा ने मना कर दिया, क्योंकि उसे घर की बहू का नौकरी करना पसंद नहीं था।

मीना को लगता था कि सभी सास खराब होती हैं, और अपनी बहुओं से बुरा व्यवहार करती हैं। उसकी बेटी कामना की शादी होने वाली थी। मीना ने कामना के कान भरने शुरू कर दिए: “अपनी सास से बचकर रहना, और उससे अधिक बातें मत करना। वह तुम्हारे पति को तरह-तरह से तुम्हारे खिलाफ भड़काएगी। घर के काम से अलग रहना, और अपने पति को समझाना कि वह दूसरा घर लेकर अपने माता-पिता से अलग हो जाए।” कामना ने अपनी मां की बातों का पालन किया। उसके वैवाहिक जीवन की मधुरता सदा के लिए समाप्त हो गई।

शांताकुमार एक दफ्तर में क्लर्क था। उसकी दो बेटियां और दो बेटे थे, परंतु उसका ध्यान केवल अपने बेटों पर था। एक बेटा आई ए एस और दूसरा आई पी एस बन गया, जबकि बेटियां केवल दसवीं तक ही पढ़ पाईं। शांताकुमार ने अपनी बेटियों और बेटों के बीच एक खाई पैदा कर दी थी, जो बड़ी होती गई, और धीरे-धीरे भाइयों और बहिनों के बीच सारे संबंध समाप्त हो गए।

पूर्वाग्रह सामाजिक बुराइयां पैदा करते और पनपाते हैं

ऊपर दिए गए उदाहरण, हमारे समाज में फैली हुई बुराइयों को दर्शाते हैं। वही उदाहरण, यह भी दिखाते हैं कि हम जीवन में कुछ सिद्धांत या कायदे-कानून बनाते हैं, और अपना जीवन उसी हिसाब से चलाते हैं। जाहिर है कि ये सिद्धांत अच्छे भी हो सकते हैं, और बुरे भी। लेकिन हम इन सिद्धांतों को ठीक मानते हैं, और इनकी अच्छाइयों और बुराइयों को जांचने की कोशिश नहीं करते हैं। जब हम किसी बात को जांचे बिना उस पर विश्वास करते हैं, इसे ही पूर्वाग्रह कहते हैं। जाहिर है कि कुछ पूर्वाग्रहों के कारण सामाजिक बुराइयां पैदा होती हैं और पनपती हैं।

इस प्रकार के पूर्वाग्रहों के, और भी बहुत सारे उदाहरण दिए जा सकते हैं। रजत केवल एक गोरे रंग की लड़की से विवाह करेगा, अन्यथा विवाह करेगा ही नहीं। पूर्णिमा की जाति में कोई अधिक पढ़ा लिखा नहीं मिल पाया, इसलिए उसने कम पढ़े लिखे व्यक्ति से ही विवाह कर लिया। हमारे देश में बहुत से लोग, जाति के आधार पर वोट देते हैं—इसलिए जाति और धर्म पर आधारित राजनीति चल रही है।

पूर्वाग्रहों के कुछ और उदाहरण

कुछ पूर्वाग्रह हमारे निजी होते हैं, जिनका कोई सामाजिक संदर्भ नहीं होता है।

रेखा को संदेह है कि उसके पति का किसी और स्त्री से संबंध है। इसका कोई भी प्रमाण रेखा को अभी तक नहीं मिल पाया है, फिर भी वह अपने शक को सही मानती है। वह अपने पति पर कड़ी नजर रखती है, और उसे टोकती है, जिससे उसका पति किसी भी महिला से सहज होकर बात नहीं कर पाता है।

साठ वर्षीय महिमा बचपन से ही अपने पिता से नफरत करती आ रही है—क्योंकि उसकी मां भी उसके पिता से नफरत करती थी। मां ने कभी अपनी इस नफरत का कारण महिमा को नहीं बताया। आज महिमा की मां नहीं है और उसके पिता लगभग नब्बे वर्ष के हैं। महिमा मां-पिता की इकलौती संतान है। जाहिर है कि पिता को अपनी इकलौती बेटी के प्यार की जरूरत है, लेकिन महिमा अपनी उस नफरत छोड़ने के लिए तैयार नहीं है, जिसका कारण भी उसके पास नहीं है।

करीना की अठारह वर्ष की दो जुड़वां बेटियां हैं। करीना खुद एक बैंक में काम करती है, और उसे घर लौटने में काफी देर हो जाती है। लौटने के बाद वह घर के सारे काम अकेले निबटाती है, और बेटियां उसकी कोई भी मदद नहीं करती हैं। करीना को लगता था—बेटियां काम में मदद करेंगी, तो उनकी पढ़ाई पर बुरा असर होगा। बेटियों को भी लगने लगा है कि घर के काम उनकी जिम्मेदारी नहीं हैं। खाना बनाना, बरतन और कपड़े धोना, और घर की सफाई—बेटियों को ये सब नौकरों के काम लगते हैं; इसलिए वे अपनी मां को भी इन सब कामों से अलग हो जाने की सलाह देती रहती हैं। बेटियां बड़ी हैं, लेकिन वे घर के बाहर के कामों में भी अपने माता-पिता की कोई मदद नहीं करती हैं। बेटियों के इस व्यवहार में करीना को कोई भी बुराई नजर नहीं आती है। बेटियों को स्कूटर या कार चलाना सीखने की भी जरूरत नहीं लगती है—क्योंकि बड़े होकर उन्हें अच्छी नौकरी मिलेगी, और ड्राइवर उनकी गाड़ी चलाएगा।

मुकेश हमेशा से केवल होम्योपैथी की दवाइयां लेता था। एक दिन वह बीमार पड़ गया, और उसे अस्पताल ले जाया गया। वहां ब्लड प्रैशर और डायबिटीज दोनों बीमारियां निकलीं, और उसे कई प्रकार की गोलियां बताई गईं, लेकिन मुकेश को होम्योपैथी छोड़कर कोई और दवाई लेना मंजूर नहीं था। परिणामस्वरूप मुकेश का ब्लड प्रैशर और डायबिटीज काबू में नहीं आया, और उसकी तबीयत खराब बनी रही।

डेविड साठ साल का रिटायर्ड व्यक्ति है। वह अपने घर में अकेला रहता है। उसकी एक बेटी है रत्ना, जो पास के शहर में रहती है, और कभी-कभी डेविड का हाल लेने के लिए उसके पास आती है। रत्ना को सबसे पहले बाथरूम का रुख करना पड़ता है, जहां वह नहाती है और सारे कपड़े धोती है। उसके बाद ही वह घर में प्रवेश कर सकती है। डेविड के घर कोई भी आए, उसे पहले बाथरूम में जाकर नहाना और कपड़े धोना पड़ेगा। इसलिए डेविड के घर, रत्ना को छोड़कर, कोई दूसरा व्यक्ति आने की हिम्मत नहीं ही करता है।

पुराने कायदे-कानूनों को छोड़, आगे बढ़ चलें

हम अपने जीवन में स्थिरता लाने के लिए कई तरह के कायदे-कानून बनाते हैं, और कई बार बिना सोचे समझे उन पर चलते रहते हैं। इनमें से कुछ कानून शुरू से ही ठीक नहीं होते हैं। ये कानून अच्छे भी हों तब भी समय के साथ इन कायदे-कानूनों की उपयोगिता समाप्त हो सकती है, लेकिन फिर भी हम इन कानूनों से चिपके रहते हैं। अकसर उनसे होने वाली हानियों को हम समझ ही नहीं पाते हैं। बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के बाद, हम पुराने कायदे-कानूनों और रीति-रिवाजों को एक अलग नजरिये से देख सकते हैं। और हानिकारक कायदों और रिवाजों को छोड़ने की कोशिश कर सकते हैं। इस मार्गदर्शिका के दूसरे भाग का उद्देश्य है, अपनी स्थिरता को आगे ले जाना। इस प्रकार के प्रतिबंधों को छोड़कर ही, हम अपनी स्थिरता को आगे ले जा सकते हैं। बहुआयामी परिवर्तन अपनाने वाले व्यक्तियों के लिए यह काम मुश्किल नहीं है।

 इन बंधनों को तोड़ने के लिए क्या करें?

इस पृष्ठ पर दिए गए उदाहरणों पर फिर से एक नजर डालें। डेविड और मुकेश के लिए अपने को बदलना आसान है। मुकेश को डायबिटीज और ब्लड प्रैशर की दवाइयां खाना शुरू कर देना है, और डेविड को अपने मन को कड़ा करके रत्ना को कह देना है कि उसे अब बाथरूम में जाकर नहाने और कपड़े धोने की जरूरत नहीं है।

महिमा के लिए भी अपने पिता से नफरत बंद करना बहुत मुश्किल काम नहीं है। वह धीरे-धीरे अपने पिता से बातचीत करना शुरू कर सकती है, और फिर स्वयं या किसी और के माध्यम से पिता को यह संदेश पहुंचा सकती है कि वह अब पिता से नाराज नहीं है।

करीना के लिए, अपने को और अपनी बेटियों को बदलना एक मुश्किल काम साबित हो सकता है। बेटियों को घर का और बाहर का काम करने की आदत नहीं है, और वे माता-पिता से अपने सब काम करवाना अपना अधिकार मानने लगी हैं। करीना की बेटियां भी अगर बहुआयामी परिवर्तन अपना लें तो करीना का रास्ता आसान हो सकता है—लेकिन इसकी संभावना कम है, क्योंकि बेटियों को आज की परिस्थिति में कोई तकलीफ नहीं है। ऐसी स्थिति में करीना को अपनी बात दृढ़ता और प्यार से अपनी बेटियों के सामने रखना होगा। उसको धीरे-धीरे एक-एक जिम्मेदारी बेटियों के कंधे पर डालनी होगी। बेटियां एक के बाद एक जिम्मेदारी उठाना शुरू करेंगी, तभी करीना के घर की समस्या सुलझ सकेगी।

परिवार में अगर बेटे और बेटियों में भेदभाव होता है, यह अच्छी स्थिति नहीं है। घर के सभी सदस्य मिलकर अगर प्रयास करें, तभी इसका निराकरण सम्भव है।

अपने कायदे-कानूनों पर लगातार नजर

पिछले अध्यायों में सेक्स क्रियाओं और भावनाओं पर लगातार नजर रखने की बात कही गई है। इसी प्रकार से हमें अपने जीवन के कायदे-कानूनों पर भी लगातार नजर रखना आवश्यक है। हमें हर कायदे-कानून पर नजर रखने के बाद यह फैसला करना है कि वह कायदा-कानून हमारी स्थिरता को आगे ले जा रहा है या स्थिरता में बाधक है। यहाँ स्थिरता का मतलब विस्तृत स्थिरता समझना पड़ेगा|

पुराने छोड़ना आसान, लेकिन नए बनाना मुश्किल

यह मार्गदर्शिका नए कायदे कानून बनाने के बारे में है

पुराने कायदे कानून छोड़ने के लिए, हमें नए कायदे बनाने पड़ेंगे — क्योंकि बिना किसी कानून के जीवन चलाना मुश्किल है| इस मार्गदर्शिका में शुरुआत से ही, हम पुराने कानूनों को छोड़ने और नए कानून बनाकर उनका पालन करने की बात कर रहे हैं| सांस कैसे लेना है? आसन कैसे करना है? तम्बाकू और शराब का प्रयोग बंद कर देना है| सेक्स क्रियाओं में बारीकी लानी है| शारीरिक व्यायाम शुरू कर देना है| पुराने जीवन से जुड़े दर्द और तकलीफ को भूल जाना है| विचारों और भावनाओं का सही चुनाव करना है| ये सभी नए कानून हमें अपनी जिंदगी में शामिल करने की सलाह है| इन्हें जिंदगी में शामिल करने के लिए व्यावहारिक जानकारी भी दी जा रही है|

जैसे-जैसे हम नए कानून बनाकर उन्हें अपनाते जाएँगे, हमें पता ही नहीं चलेगा और पुराने कानून खुद-बखुद पीछे छूटते जाएँगे|





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