सेक्स क्रियाओं और भावनाओं पर एक सप्ताह तक पूर्ण नियंत्रण

सेक्स क्रियाओं में परिवर्तन, बहुआयामी परिवर्तन का हिस्सा

सेक्स बंद दरवाजों के पीछे होता है। विशेषकर पूर्वी सभ्यताओं में, जिनमें भारत शामिल है, सेक्स क्रियाओं का खुला प्रदर्शन तिरछी नजर से देखा जाता है। हमारे देश की फिल्मों में सेक्स दिखाने की खुली छूट नहीं है। सेक्स के बारे में कुछ भी पूछना और बताना मुश्किल होता है। स्कूली छात्रों को दी जाने वाली सेक्स संबंधी शिक्षा पर रोक लगाने की मांग होती है। आम तौर पर डॉक्टर भी मरीजों से सेक्स के बारे में खुलकर बात नहीं करते हैं। परंतु इस मार्गदर्शिका में सेक्स संबंधी सलाह ब्योरेवार दी गई है—और ऐसे शब्दों में दी गई है, जिससे वह ठीक तरह से अपनाई जा सके। यह अध्याय विशेष रूप से ऐसी सलाह के बारे में है, लेकिन आगे के अध्यायों में भी ऐसी सलाह जारी रहेगी। हम में से कुछ लोगों को यह सलाह आपत्तिजनक और चौंकाने वाली लग सकती है। अगर हम इस पूरी मार्गदर्शिका को ध्यान देकर पढ़ेंगे तो हमारा उद्वेग कम हो जाएगा।

सेक्स क्रियाओं और भावनाओं पर एक सप्ताह तक पूर्ण नियंत्रण

बहुआयामी परिवर्तन के अंतर्गत सेक्स केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं है।

हम अकसर सेक्स का मतलब केवल शारीरिक संबंध समझते हैं। परंतु जब हम सिनेमाहाल के रुपहले पर्दे पर हीरो-हीरोइन को छोटे कपड़ों में नाचते गाते हुए देखते हैं, हमारे अंदर सेक्स की भावनाएं जागृत हो जाती हैं। उसके बाद हम घर जाते हैं, और रोशनी बंद करके सो जाते हैं। हमारा मन चलायमान रहता है, और आंखें बंद किए-किए हम हीरो-हीरोइन का विचार करते हैं। उनके नृत्य को कल्पना में फिर से देखते हैं, और केवल विचार और कल्पना से ही हमारी सेक्स की भावनाएं जागृत हो जाती हैं।

इस अध्याय में सेक्स पर पूर्ण नियंत्रण की बात कही गई है—इसका अर्थ समझना यहां जरूरी है। इसका अर्थ सेक्स की क्रियाओं पर नियंत्रण तो है ही। साथ में हमें सेक्स संबंधी विचारों और भावनाओं पर भी नियंत्रण रखना है।

यह पूरा नियंत्रण कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है।

हमें लग सकता है कि यह पूरा नियंत्रण बहुत मुश्किल काम होगा। लेकिन यह हर किसी के लिए संभव है। पहले चरण की बाकी की क्रियाएँ (पैरासिटामौल का प्रयोग, सांस का व्यायाम, और तनाव-मुक्ति का आसन) सेक्स पर पूरे नियंत्रण को बहुत आसान बना देती हैं—और इस नियंत्रण को एक सप्ताह तक खींचना संभव हो जाता है। ध्यान रखें—केवल पहले दो तीन दिन कुछ अधिक मुश्किल भरे हो सकते हैं।

पूर्ण नियंत्रण को कैसे सफल बनाएंगे?

सबसे पहले पूर्ण नियंत्रण का मतलब समझ लें।

हमें समाज में रहना है, इसलिए हम सेक्स से जुड़ी बाहरी क्रियाओं पर नियंत्रण रखना सीखते हैं—लेकिन सेक्स से जुड़े आंतरिक विचारों और भावनाओं पर नियंत्रण करना कम लोग सीख पाते हैं। बहुआयामी परिवर्तन अपनाते समय हमें इन आंतरिक विचारों और भावनाओं को भी नियंत्रित करना है|इसलिए सेक्स संबंधी विचारों और भावनाओं पर यह नियंत्रण हमें कुछ नया लग सकता है। बहुआयामी परिवर्तन का लाभ उठाने के लिए, यह नया सीखना जरूरी है| यानी सेक्स पर पूरा नियंत्रण सीखना जरूरी है|

किसी भी प्रकार के भावनात्मक स्पर्श या शारीरिक नजदीकी से दूर रहें

सेक्स क्रियाओं और भावनाओं पर एक सप्ताह तक पूर्ण नियंत्रण अपनाते समय किसी भी भावनाओं को जगाने वाले स्पर्श या शारीरिक नजदीकी से दूर रहना अच्छा होगा| उदाहरण के लिए, हमें अपने भाई, बहिन, माँ, पिता, या किसी भी अन्य व्यक्ति से दूरी बनाए रखने की सलाह है| इसका अर्थ इस प्नकार के स्पर्श का गलत या अनैतिक होना बिलकुल नहीं है| माँ-बेटे के बीच की नजदीकी भी, उनकी भावनाओं को जगाती है और मन और शरीर में कुछ बदलाव लाती है — यह बदलाव भी हमें स्वीकार्य नहीं है| सेक्स क्रियाओं और भावनाओं पर पूर्ण नियंत्रण के बाद, हम जो अनुभव पाना चाहते हैं, उस अनुभव में इससे रुकावट आ सकती है| इसलिए एक सप्ताह तक सावधानी रखना जरूरी है|

किसी भी प्रकार की तीव्र भावनाओं से दूर रहें

इसके ऊपर भावनात्मक स्पर्श या शारीरिक नजदीकी से दूर रहने की बात हुई है| हमें बाकी की भावनाओं पर भी नियंत्रण रखना है| मतलब हमें गुस्सा, डर, या चिंता जैसी भावनाओं से भी दूरी बनाए रखने की जरूरत होगी|

कुछ सावधानियों पर ध्यान दें

सेक्स की भावनाओं और विचारों से दूरी बनाए रखने के लिए नीचे लिखी सावधानियों को ध्यान में रखना पड़ेगा| सफलता के लिए कुछ प्रतिबंध अपने ऊपर लागू करने पड़ेंगे| इस अध्याय के कुछ महत्वपूर्ण अंशों का यह पीडीएफ डाउनलोड करें| इसका प्रिंटआउट लेकर, उसे टेबल पर कांच के नीचे रखें, और दीवार पर चिपकाएं — जिससे ये सावधानियाँ हमारे ध्यान में रह सकें|

बहुआयामी परिवर्तन की सफलता के लिए यह एक सप्ताह लंबा सेक्स पर पूर्ण नियंत्रण अत्यंत महत्वपूर्ण है|

  • सेक्स के बारे में न सोचें। मन को दूसरी तरफ हटा लें।
  • सेक्स की सोच या भावनाओं को जागृत करने वाला स्पर्श न करें—जैसे किसी के पास या सटकर बैठना
  • सेक्स की सोच या भावनाओं को जागृत करने वाला व्यवहार न करें—जैसे चूमना।
  • सेक्स की सोच या भावनाओं को जागृत करने वाला दृश्य न देखें—जैसे टीवी और फिल्मों से बचें।
  • सेक्स की सोच या भावनाओं को जागृत करने वाला कुछ न पढ़ें—जैसे सेक्सी कहानियाँ या फोटो
  • सेक्स की सोच या भावनाओं को जागृत करने वाला कुछ न सुनें—जैसे कुछ चुटकुले
  • इंटरनेट पर हम क्या कर रहे हैं, इसका ध्यान रखें।
  • हल्का खाना खाएं|
  • इस लिस्ट में, अपनी ओर से भी कुछ जोड़ लें—जैसे पति-पत्नी सात दिन अलग कमरे में सोयें|

 

मन को दूसरी तरफ कैसे हटाएं?

अगर ऊपर बताए गए प्रतिबंधों का पालन करने की कोशिश के बावजूद, सेक्स की भावनाएं जागृत हो जाती हैं—ऐसी दशा में हमें तुरंत (बिना कोई देरी किए) मन को दूसरी तरफ हटाना पड़ेगा। इसके कुछ तरीके यहां दिये गए हैं।

  • अगर अकेले हों तो दूसरे स्थान पर चले जाएं जहां चार लोग बैठे हों।
  • अगर रात में नींद न आ रही हो, तो उठकर कुछ काम करें। थोड़ी देर में नींद आ जाएगी।
  • अगर बीच रात में नींद खुल जाये, तो उठकर पेशाब जाएं और हाथ-मुंह धोएं| अगर इसके बाद भी नींद न आए तो कुछ काम करें| बिस्तर पर पड़े न रहें|
  • सेक्स हमारी बाकी जरूरतों से अलग या कुछ खास नहीं है—इसके बारे में यह परिशिष्ट पढ़ें: क्या सैक्स हमारी बाकी जरूरतों से अलग या कुछ खास नहीं है?
  • कुछ नया करने या सीखने की कोशिश करें—जैसे इस मार्गदर्शिका के आगे के पन्नों को पढ़ें।
  • आम उपाय अपनाएं—जैसे गहरा सांस लेना, पानी या चाय पीना इत्यादि।
  • डाकखाने से पोस्टकार्ड खरीद लाएं, और अपने संबंधियों को पत्र लिखें जैसे कि मैंने तंबाकू छोड़ दिया है, या मैंने शारीरिक व्यायाम शुरू किया है। इससे, बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के प्रति, हमारी दृढ़ता बढ़ेगी, और हम इसके लिए जो भी जरूरी होगा करेंगे।
  • पुरुषों के लिए ढीले अंदर के कपड़े पहनना एक अच्छा उपाय है—कुछ महिलाओं के लिए भी।

क्या यह पूर्ण नियंत्रण हर किसी पर लागू होता है?

कुछ लोग स्वाभाविक रूप से सेक्स के प्रति अनासक्त हो सकते हैं। छोटे बच्चे और बहुत बूढ़े भी इनमें शामिल हैं। बीमारी के समय पर भी सेक्स के प्रति अनासक्ति हो जाती है। ऐसी स्थितियों को छोड़कर, बाकी लोगों को सेक्स की भावनाओं और क्रियाओं पर नियंत्रण की जरूरत होगी। इस प्रकार से देखें तो सेक्स की भावनाओं और विचारों पर पूर्ण नियंत्रण हर किसी पर लागू होगा|

यह पूरा नियंत्रण कितने दिन तक चलेगा, और उसके बाद क्या होगा?

पूरा नियंत्रण पहले चरण की समाप्ति तक (लगभग सात दिन) चलेगा। उसके बाद दूसरा चरण शुरू होगा, जिसमें सेक्स क्रियाओं को नियंत्रित ढंग से फिर शुरू किया जा सकेगा। जोर सेक्स क्रियाओं की गुणवत्ता पर रहेगा, उनकी गिनती पर नहीं। स्थिरता आगे ले जाने के लिए, यौन क्रियाओं में बारीकी लाना — दूसरे चरण के इस अध्याय में इस विषय पर अधिक जानकारी दी गई है।

अलग (और सामान्य रूप से आरामदेह) बिस्तर।

बहुआयामी परिवर्तन की प्रक्रिया की सफलता के लिए, अपनाने वाले व्यक्ति को अलग (और सामान्य रूप से आरामदेह) बिस्तर मिलना जरूरी है, चाहे वह जमीन पर ही क्यों न हो। आर्थिक रूप से कमजोर लोग प्रायः एक या दो कमरे के घर में रहते हैं| घर बड़ा हो तब भी एक पलंग पर घर के दो लोगों का साथ-साथ सोना आम बात है। यह किसी अनैतिकता या यौन संबंध की ओर इशारा नहीं है, लेकिन सबसे छोटे बेटे या बेटी का माँ के साथ बिस्तर साझा करते रहना आम बात है| बहुआयामी परिवर्तन के अनुसार (बहुत छोटे बच्चे को छोड़कर), हर व्यक्ति को अलग बिस्तर और अलग ओढ़ने की चादर या कंबल मिलना जरूरी है| बिस्तर जमीन पर भी लगाया जा सकता है| इस सावधानी को नकारने की हालत में, बहुआयामी परिवर्तन का कोई लाभ मिलने की संभावना शून्य के बराबर समझी जानी चाहिए|





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