पुराने सारे किस्से भूल जाना, और जीवन में एक नई शुरुआत करना

छोटी उम्र में हुई घटना को, समीक्षा कई दशकों तक अपने से चिपकाए रही

बहुत सारी घटनाओं और बुरे समय की बातों को हम भूल नहीं पाते हैं। हम हर समय उन्हीं किस्सों को दोहराते रहते हैं। वे किस्से हमारे व्यक्तित्व का भाग बन जाते हैं। जीवन में एक नई शुरुआत करने के लिए इन किस्सों को भूलना जरूरी होता है। ऐसा एक उदाहरण नीचे दिया गया हैं।

समीक्षा का जीवन सुखी नहीं था। उसका पति छोटा दुकानदार था, और बेटा खुद का व्यवसाय जमाने की कोशिश कर रहा था। समीक्षा खुद भी एक कंपनी में स्टेनो थी, जहां उसे अच्छी पगार मिलती थी। समीक्षा पांच बजे घर लौटती। उसे खाली घर काटने को दौड़ता, क्योंकि उसका बेटा और पति देर रात घर वापस आते थे—समीक्षा तब तक सो चुकी होती थी। और वह नौ बजे जब काम पर निकलती, उस समय उसका बेटा और पति सो रहे होते थे। जाहिर है, पति और बेटे के साथ समीक्षा बहुत कम समय बिताती थी। घर का काम करने के लिए नौकर थे, इसलिए समीक्षा का समय काटे नहीं कटता था। वह आर्थिक रूप से स्वतंत्र थी। उसने कई बार पति से अलग होने का सोचा, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाई।

समीक्षा अपनी सेहत को लेकर भी परेशान रहती थी। उसे डायबिटीज थी—लेकिन वह अपने खान-पान पर नियंत्रण नहीं रख पाती थी, और घूमने से उसके पैरों में दर्द होता था। उसका वजन बढ़ता जा रहा था, और उसकी डायबिटीज कंट्रोल से बाहर रहने लगी थी। समीक्षा बेटे को लेकर भी चिंतित रहती थी, क्योंकि उसका काम जम नहीं पा रहा था। बाप-बेटे के बीच भी अकसर झगड़ा होता था। समीक्षा चिड़चिड़ी रहती थी, और उसे नींद ठीक से नहीं आती थी। वह डिप्रैशन के लिए गोलियां ले रही थी।

सत्रह साल की उम्र में, पड़ौस के एक आदमी ने, समीक्षा के साथ बलात्कार किया था। ऑफिस में या घर में, समीक्षा जब भी किसी से मिलती, उस घटना को लेकर रोना-धोना शुरू कर देती थी। समीक्षा की इस आदत को कोई भी पसंद नहीं करता था—लेकिन वह मजबूर थी, और उसे लगता था कि उसकी सारी परेशानियों की जड़ लड़कपन की वह घटना थी। उसे लगता था कि जब तक वह अपनी परेशानियों की जड़ लोगों को नहीं बताएगी, कोई उसे ठीक से समझ नहीं पाएगा। पुराने किस्से भूलकर एक नई शुरुआत करना समीक्षा को सम्भव नहीं लगता था। वह सारी कोशिशें करके हार चुकी थी।

बहुआयामी परिवर्तन अपनाने से समीक्षा को लाभ हुआ। उसे नींद ठीक से आने लगी, और डिप्रैशन की गोलियां बंद हो गईं। उसने खान-पान पर नियंत्रण किया और घूमने जाना शुरू कर दिया, जिससे डायबिटीज नियंत्रित हो गई। समीक्षा पिछले जीवन की तकलीफों को भूलने लगी थी, और उसे लगने लगा था कि अब पहले जैसी तकलीफ फिर कभी उसे नहीं होगी—फिर भी वह अपने साथ लड़कपन में हुई जबरदस्ती को भूलने के लिए तैयार नहीं थी, और उस घटना का वर्णन करने से अपने को रोक नहीं पाती थी। उसे कुछ और सूझता ही नहीं था।

अब समीक्षा को समझ आ रहा था—उसे पुराने किस्से छोड़कर एक नई शुरुआत करने की जरूरत थी, और उसने वही किया। वह रसोईघर में समय देने लगी। वह कुछ नया बनाकर ऑफिस ले जाती, और दूसरों के साथ मिलकर खाती—साथ-साथ उस व्यंजन को बनाने का तरीका भी सबको बताती। धीरे-धीरे समीक्षा ने और भी नई चीजें शुरू कीं। अब उसके पास बात करने के लिए बहुत कुछ था, और वह पुराने किस्से छोड़ चुकी थी। उसका जीवन पूरी तरह से बदल रहा था।

❐ स्पष्टीकरण—हम दूसरों के साथ बैठते हैं, बातें करते हैं, और अकसर पुरानी बातों को दोहराते रहते हैं। इसका कारण समझना जरूरी है। हम जीवन में कुछ भी नया नहीं करते हैं। बहुत से व्यक्ति कुछ नया करने से घबराते हैं। कुछ नया करने में उन्हें खतरा लगता है। पुरानी बातों को दोहराते रहना, और जो भी करते आ रहे हैं, उसे ही करते रहना आसान है। परंतु क्या यह ठीक कार्य-नीति है?

हम जीवन में हुई किसी बुरी घटना को दोहराते रहते हैं

समीक्षा जैसे और भी अनेक लोग हैं, जो जीवन में हुई किसी बुरी घटना को दोहराते रहते हैं। बुरी घटना माता, पिता, भाई, बहिन, पुत्र, पुत्री, पति, पत्नी, या और किसी परिजन की मृत्यु हो सकती है। या किसी परिजन की गम्भीर बीमारी हो सकती है, जैसे कि लकवा या कैंसर। बुरी घटना कोई प्राकृतिक आपदा हो सकती है, जैसे कि बाढ़, आग, या भूकंप| बुरी घटना कोई अपराध हो सकता है, जैसे कि हत्या, अपहरण, डाका इत्यादि। बुरी घटनाओं के और भी बहुत सारे उदाहरण दिए जा सकते हैं। कोई अपना या पराया व्यक्ति हमारे साथ बहुत बड़ा धोखा कर सकता है। आज के युग में बहुत सारी धोखाधड़ी ऑनलाइन होती है। हमारा बैंकिग पासवर्ड या ए टी एम कार्ड चोरी हो सकता है, या सोशल नेटवर्किंग साइट पर हमारे साथ कोई धोखा कर सकता है। हमारा फर्जी प्रोफाइल बनाकर कोई हमें बदनाम कर सकता है।

हमारे जीवन में चाहे कैसी भी बुरी घटना हुई हो, हमें उस घटना से ऊपर उठना चाहिए, और उसकी चर्चा बंद कर देनी चाहिए। इस चर्चा को बंद करने का एक ही उपाय है—हम जीवन में कुछ नया करें, और उस नए की चर्चा करना शुरू करें। यहां भी बात कुछ नया करने पर पहुंचकर ही समाप्त होती है।

क्या हमने जीवन में सब-कुछ पा लिया है?

अब हमारा बुढ़ापा शुरू हो जाएगा

शरीर ठीक बना रहने के लिए मस्तिष्क का स्वास्थ्य ठीक बना रहना जरूरी है। मस्तिष्क तभी ठीक रहेगा जब हम कुछ नया करेंगे। इसलिए नया-नया कुछ करते रहना हम सभी के लिए जरूरी है।नई चुनौतियों का सामना किए बिना मस्तिष्क ढीला पड़ने लगता है। पचास- पचपन का होने पर हमें लगने लगता है कि हमने सब कुछ पा लिया है, और अब हमें कुछ नया करने की जरूरत नहीं है—उसी समय हमारा मस्तिष्क ढलान की ओर चल पड़ता है, और हम बुढ़ापे की ओर बढ़ने लगते हैं। इसका अर्थ हुआ, हरेक आयु-वर्ग के व्यक्ति को जीवन में कुछ नया-नया करते रहना अच्छा है।

नई शुरुआत सभी के लिए जरूरी है

समीक्षा जैसे लोगों के लिए तो जरूरी है ही, जिनके साथ जीवन में कुछ बुरा हुआ है|

बाकी लोगों के लिए भी जरूरी है—जिन्हें हम सामान्य समझते हैं, और जो अपने बारे में यह सोचते हैं कि उन्होंने जीवन में सब कुछ पा लिया है। एक ही वाक्य में कहना हो तो जीवन में हमें एक नई शुरुआत के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए, और कुछ नया करते रहना चाहिए।





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