अगर इतना सब भी हमारे लिए काफी नहीं है तो क्या करें?

क्या हम अभी भी निराशा के समुंदर में गोता लगा रहे हैं?

इस मार्गदर्शिका के पहले और दूसरे चरण में, शान्ति और स्थिरता को प्राप्त करने और उसे आगे ले जाने का रास्ता बताया गया है। क्या इन उपायों को अमल में लाने के बाद, हम अपने जीवन में शांति और स्थिरता प्राप्त कर पाए हैं, और उसे आगे ले जा पा रहे हैं? यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।

इस प्रश्न का उत्तर हां और नहीं दोनों ही हो सकते हैं। अगर हमारा उत्तर नहीं है, इसका अर्थ हुआ हम शांति और स्थिरता को पाने और उसे आगे ले जाने में असफल रहे हैं। हमें उदासी और निराशा लगती है, और हमारा मन विचलित रहता है, ऐसी दशा में हम पीछे दिए उपायों के अलावा कुछ और उपाय भी अपना सकते हैं। इस अध्याय में ऐसे ही कुछ उपायों का वर्णन किया जाएगा। ध्यान रखने की बात है—इस अध्याय में दिए गए उपाय, पहले दिए गए उपायों के साथ जोड़ने हैं। ये उपाय अपने आप में पर्याप्त नहीं हैं।

सबसे पहले हमें यह देखना चाहिए—क्या हमने अभी तक बताए गए उपायों पर पूरी तरह से अमल किया है? अगर नहीं किया है, तो हमें इन उपायों पर फिर से पूरा अमल करने की जरूरत हो सकती है। इसके लिए इस मार्गदर्शिका को फिर से पढ़ें। क्या हमने कुछ छोटा सा भी उपाय अमल में लाने से छोड़ दिया है? विश्वास के साथ अपनाने की जरूरत - इस अध्याय दोबारा पढ़ें| क्या हमने बहुआयामी परिवर्तन विधिपूर्वक अपनाया है? यह जानने के लिए नीचे लिखे गए बिंदुओं पर विशेष ध्यान दें।

सेक्स क्रियाओं में बारीकी लाने की ओर अधिक ध्यान दें|

सैक्स क्रियाओं पर नियंत्रण बहुआयामी परिवर्तन का एक अहम हिस्सा है। परंतु कुछ लोग सैक्स क्रियाओं को नियंत्रित करने में ही सबसे बड़ी कठिनाई अनुभव करते हैं। क्या अपूर्ण सैक्स क्रियाओं से हमारा मन नहीं भरता है?—मतलब हमारा ध्यान सैक्स की तरफ लगा ही रहता है। इसलिए हम पूर्ण सैक्स क्रिया की तरफ खिंच जाते हैं। क्या पूर्ण सैक्स क्रिया का हमारी क्षमता और स्थिरता पर बुरा असर होता है? क्या हम इस बुरे प्रभाव से कई दिनों तक निकल नहीं पाते हैं? पूर्ण सैक्स क्रिया करने से अपने को न रोक पाने के लिए क्या अपने आप को हम दोषी समझने लगते हैं? इस मार्गदर्शिका में दिए गए सुझावों को अपनाकर हम इन कठिनाइयों को कम कर सकते हैं। मतलब पूर्ण सैक्स क्रिया से अपने आप को रोक सकते हैं, खुद को स्थिर कर सकते हैं, और अपने आप को दोष देने से भी बच सकते हैं।

कुछ गिने-चुने लोगों से जुड़ने की कोशिश करें

अकेलापन का अहसास, बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के बावजूद, अच्छा न लगने का सबसे बड़ा कारण हो सकता है। क्या हम अकेलापन महसूस करते हैं? क्या हमें मित्रों की कमी खटकती है? ऐसी स्थिति में, हमारे लिए लोगों से जुड़ना जरूरी है। सामाजिक संबंधों को सुधारने के विषय में अधिक जानकारी के लिए यह अध्याय पढ़ें: अब हम भी एक-एक करके सफलता की सीढ़ियां चढ़ सकते हैं। सामाजिक संबंधों के अतिरिक्त और दूसरे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की जरूरत भी हमें हो सकती है।

हमें क्या अच्छा लगता है? उसे अपने जीवन में लागू करें।

क्या-क्या करना हमें अच्छा लगता हैं? बागवानी से लेकर सिक्के इकट्ठे करने तक, और टीवी देखने से लेकर फुटबाल खेलने तक, दुनिया की किसी भी चीज में हमारी रुचि हो सकती है। क्या हमें संगीत का शौक है? हमें गाना बजाना अच्छा लगता है, या केवल संगीत सुनना अच्छा लगता है? जो भी हमें अच्छा लगता है, और जिन भी कामों में हम अपना समय बिताना चाहते हैं, उनकी एक लिस्ट बनाएँ। यह हमारी बड़ी लिस्ट हो गई। इस बड़ी लिस्ट में से अब एक छोटी लिस्ट बनाएँ। छोटी लिस्ट में केवल उन कामों को शामिल करें, जो हमारे लिए संभव हैं, और हमें अपने लिए उपयोगी भी लगते हैं।

एक बड़े उद्योगपति के लिए कार बनाने का कारखाना लगाना भी सम्भव है। और एक बड़े राजनेता के लिए, अपने क्षेत्र में एक दर्जन बड़े कारखाने लगवा देना सम्भव है। जाहिर है कि राजनेताओं और उद्योगपतियों की छोटी लिस्ट में बड़ी-बड़ी चीजें आ सकती हैं। परंतु एक आम आदमी की छोटी लिस्ट में बहुत साधारण चीजें ही आएंगी, और यहां पर हम उन साधारण चीजों की ही बात करेंगे।

क्या हमें गाने का शौक है? क्या हमें अलग-अलग तरह का खाना बनाने का शौक है? क्या हमें दूसरों की मदद करना अच्छा लगता है? क्या हमें कविता लिखने में आनंद मिलता हैं? क्या हमें क्रिकेट खेलना अच्छा लगता हैं? क्या हमें नाटक में काम करना अच्छा लगता हैं? क्या हमें उपन्यास पढ़ना अच्छा लगता है? क्या हमें टीवी सीरियल देखना अच्छा लगता है? क्या हमें बागवानी का शौक है? सम्भव है कि हमारी ऊपर लिखा सभी करने की इच्छा हो, परंतु यह व्यावहारिक नहीं होगा। इसलिए एक छोटी लिस्ट बनाएँ, जिसमें अधिक से अधिक चार काम हों। इन चार कामों को भी व्यावहारिकता और उपयोगिता को ध्यान में रखकर क्रमबद्ध करें। हो सके तो व्यावहारिकता और उपयोगिता के बिंदुओं को लिख लें। अब यह हमारी छोटी लिस्ट बन गई। यह हमारे जीवन से जुड़ी होगी, और हमें अपने खुद के बारे में जानकारी देगी।

अब इस छोटी लिस्ट के पहले एक या दो कामों की शुरुआत करें। इस मार्गदर्शिका के तीसरे चरण में जीवन में आगे बढ़ने और असफलताओं का सामना करने के बारे में जानकारी दी गई है, जो हम अपने ऊपर लागू कर सकते हैं, और अपनी छोटी लिस्ट में सूचीबद्ध किए गए कामों में सफलता पा सकते हैं।

नींद की गुणवत्ता को बढ़ाने की कोशिश करें

नींद की गुणवत्ता बढ़ाना, हमारे लिए लाभकारी हो सकता है। इसके लिए इन नीचे लिखे बिंदुओं पर ध्यान दें।

अपने सोने और जागने का समय नियमित कर लें।

हम समय तय कर लें, और उसी समय सोएँ और जागें। हममें से कुछ के लिए यह बेहद जरूरी हो सकता है। सोने और जागने का समय नियमित करने से, नींद जल्दी लगती है, गहरी नींद आती है, और कम घंटे सोकर हमारा काम हो जाता है। हमारे शरीर में एक आंतरिक घड़ी होती है। मान लीजिए हम रोज रात दस बजे सोना शुरू कर देते हैं। कुछ दिन के बाद यह घड़ी हमारे शरीर और मस्तिष्क को रात दस बजे सोने के लिए अनुकूल स्थिति में लाना शुरू कर देगी, और हमें आसानी से नींद आ जाएगी।

नींद को नियमित करने के लिए, सबसे पहले जागने का समय निर्धारित करें। माना हम सवेरे पांच बजे उठना शुरू कर देते हैं। कुछ दिन के बाद, हमारी जरूरत के हिसाब से हमारा सोने का समय अपने आप निर्धारित हो जाएगा और हमें उस समय पर सोने की इच्छा होने लगेगी। इस प्रकार से हमारा सोना और जागना नियमित हो जाएगा। जरूरी है कि हम रविवार और छुट्टी के दिन भी सोने और जागने के समय में अधिक परिवर्तन न करें।

सोने से एक घंटा पहले ही रात का खाना खा लें।

सोने से एक या दो घंटे पूर्व ही रात का खाना खा लेना उचित है। साथ ही साथ खाने की मात्रा पर भी ध्यान देना जरूरी है—मतलब आधा-पेट या बहुत पेट भरकर खाना न खाएँ। ध्यान रहे कि चालीस की आयु के बाद, खाने की जरूरत कम हो जाती है, और हरेक दस वर्ष बाद और कम होती है।

सोने से पहले पानी आदि तरल पदार्थ कम मात्रा में पीएँ, और चाय कॉफी से परहेज करें।

सोने से पहले के दो घंटे में अधिक मात्रा में पानी आदि पीने का मतलब है कि हमें रात में पेशाब करने के लिए उठना पड़ सकता है। और फिर दोबारा सोने में दिक्कत आ सकती है।

सोने से पहले के चार घंटे में चाय कॉफी इत्यादि पीने से नींद आने में बाधा आ सकती है।

सोने से तुरंत पहले तनाव-मुक्ति का आसन करें।

तनाव-मुक्ति का आसन करते हुए ही सो जाएं। अगर बीच रात में नींद खुल जाती है तो कुछ भी उपयोगी काम करें और फिर नींद आने पर पुन: तनाव-मुक्ति का आसन करते हुए सो जाएं।

नियमित शारीरिक व्यायाम

नियमित शारीरिक व्यायाम या शारीरिक श्रम नींद के लिए अच्छा है, और यह बहुआयामी परिवर्तन का अभिन्न अंग है। परंतु सोने के एकदम पहले शारीरिक व्यायाम की सलाह नहीं दी जाती है। इसलिए सोने से दो घंटा पहले ही व्यायाम समाप्त कर लें।

क्या हम दिन में भी सोते हैं?

एक घंटे से कम ही समय दिन की नींद के लिए दें। दिन की नींद और रात की नींद के बीच कम से कम आठ घंटे का जागने वाला समय जरूरी है। इसका अर्थ हुआ कि रात को दस बजे सो जाने वाले व्यक्ति को दोपहर दो बजे तक दिन की नींद पूरी कर लेनी चाहिए।

क्या हम नींद की गोलियां ले रहे हैं?

दो-चार दिन के लिए नींद की गोलियों का सेवन भी हमें इन गोलियों का आदी बना सकता हैं। इसका एक ही परिणाम हो सकता है: नींद की गुणवत्ता में भारी कमी। इसका एकमात्र उपाय इन गोलियों का सेवन पूरी तरह से बंद कर देना है। अधिक जानकारी के लिए ग्यारहवां अध्याय देखें। डॉक्टरी सलाह लेना भी जरूरी हो सकता है।

यहां यह उल्लेख करना जरूरी है कि नींद की गुणवत्ता बढ़ने से कम समय में हमारी नींद पूरी हो सकेगी, और हमें दिन में आलस्य भी नहीं आएगा। कुल मिलाकर हमारा जीवन नियमित बनेगा, हमें अच्छा लगेगा, काम में हमारा मन लगेगा, और हमारी कार्यकुशलता बढ़ेगी।

हमें कुछ लंबे और मुश्किल रास्तों से गुजरना पड़ सकता है

कई बार हम अपने आप को किसी मुश्किल परिस्थिति में पाते हैं। हम ऐसी परिस्थिति से समझौता भी नहीं कर पाते हैं और उससे बाहर निकलने का साहस भी नहीं जुटा पाते हैं। ऐसे में हमें कुछ कठोर निर्णय लेने की जरूरत हो सकती है। नीचे दिए उदाहरणों से यह स्पष्ट हो जाएगा।

✓ मधूलिका को गाने का बड़ा शौक था, और वह पढ़ाई में भी बहुत आगे थी। उसका मेडिकल कॉलेज में दाखिला हो गया, लेकिन वहां वह पहले साल में ही फेल हो गई। मेडिकल की पढ़ाई में उसका दिल लगता ही नहीं था, क्योंकि उसका ध्यान केवल गाने में रहता था। फेल होने के बाद मधूलिका उदास रहने लगी। उसने बहुआयामी परिवर्तन अपनाया, लेकिन उसका मन अशांत बना रहा। अंत में उसने मेडिकल छोड़कर संगीत की पढ़ाई शुरू कर दी। वह एक कठिन निर्णय था, लेकिन आज मधूलिका खुश है। संगीत में पी एच डी करने के बाद, अब वह म्यूजिक कॉलेज में लेक्चरर बन गई है।

✓ अवनीश की अच्छी नौकरी थी, और एक अच्छी पगार उसे मिलती थी। वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ हंसी खुशी का जीवन बिता रहा था। पत्नी भी नौकरी करती थी और बच्चे स्कूल में पढ़ते थे। तभी अवनीश का ट्रांसफर हो गया। पत्नी और बच्चों को साथ ले जाना सम्भव नहीं था, इसलिए नई जगह पर उसे अकेलापन खाने लगा और सिगरेट पीने की लत लग गई। सिगरेट छोड़ने के लिए, अवनीश ने बहुआयामी परिवर्तन का सहारा लिया। सिगरेट तो छूट गई लेकिन मन अशांत बना रहा। अंत में अवनीश ने एक कठोर निर्णय लिया और अच्छी भली नौकरी को ठोकर मार दी। उसने पत्नी और बच्चों के साथ रहते हुए, अपना खुद का व्यवसाय करने का निर्णय लिया।

✓ किरण और वैभव सहपाठी थे। पढ़ाई खत्म होने के बाद, दोनों विवाह बंधन में बंध गए। लेकिन कुछ सालों में ही उनके बीच एक गहरी खाई पैदा हो गई। किरण सिगरेट और शराब पीने तथा रात को बहुत देरी से घर लौटने लगी थी। वह एक उन्मुक्त जीवन जीना चाहती थी, और इसके लिए वैभव से तलाक चाहती थी। वैभव अभी भी किरण से प्यार करता था। इसलिए वह किरण को समझाने की कोशिश करता, और दोनों के बीच झगड़ा हो जाता था। आखिरकार किरण अलग घर लेकर रहने लगी। वह वैभव का फोन भी नहीं उठाती थी। वैभव पूरी तरह से टूट गया। उदासी का सामना करने के लिए, उसने बहुआयामी परिवर्तन अपनाया, लेकिन उसका मन अशांत बना रहा।

वैभव समझ गया था कि किरण का रास्ता उसके रास्ते से बिल्कुल अलग है। उसने किरण को तलाक दे दिया, और पल्लवी से विवाह कर लिया। अब वह पल्लवी के साथ खुश है।

✓ नेहा अच्छे परिवार में पैदा हुई थी, लेकिन उसका विवाह एक गरीब परिवार में हो गया। उसका पति प्रवीण बस स्टैंड पर चाय का ठेला लगाता था। उसकी कमाई बहुत कम थी, लेकिन नेहा एक सुगढ़ गृहिणी थी। उसे ससुराल की खेती से अनाज मिल जाता था, और कुछ मदद अपने मायके से भी मिल जाती थी। इस प्रकार से वह अपना, प्रवीण, और दो बच्चों का पेट पाल रही थी। प्रवीण उनके बेटे को, खेती में मदद के लिए, गांव भेजना चाहता था, लेकिन नेहा न मानी और अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में भेजती रही। नेहा को लग रहा था कि उसकी जिंदगी इसी प्रकार कट जाएगी, लेकिन परेशानियां कुछ ही दूरी पर थीं।

सबसे पहले नेहा के माता पिता का देहांत हो गया, और उसे मायके से मिलने वाली मदद बंद हो गई। कुछ महीने बाद ही, प्रवीण ने चाय का ठेला भी बंद कर दिया। वह घर बैठा-बैठा टीवी देखता और सिगरेट पीता, और उसने अपनी जिम्मेदारी का बोझ उठाने से साफ इनकार कर दिया। फिर भी नेहा ने हिम्मत नहीं हारी। उसने लोगों के कपड़े सीना शुरू किया। जब इससे भी काम नहीं बना तो उसने घर-घर जाकर बर्तन मांजना, कपड़े धोना, और झाड़ू पोंछा करना शुरू भी कर दिया। इन कामों से समय मिलता तो नेहा बच्चों को पढ़ाने और उनका होमवर्क कराने में व्यस्त हो जाती। जाहिर है कि नेहा प्रवीण को समय नहीं दे पाती थी। इस बात से प्रवीण बेहद नाराज रहने लगा। वह बात-बात में गुस्सा होता था और मार-पीट भी कर बैठता था। नेहा बेहद परेशान थी, और उसे कमर-दर्द की शिकायत भी रहने लगी थी।

कमर-दर्द के लिए नेहा ने बहुआयामी परिवर्तन अपनाया। कमर-दर्द तो ठीक हो गया लेकिन नेहा का मन अशांत बना रहा। वह बार-बार प्रवीण से अलग होने का सोचती थी लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाती थी। एक दिन हद हो गई। प्रवीण ने अपनी चमड़े की बेल्ट उतारी, और उससे नेहा और बच्चों को पीटा। इतना ही नहीं, उसने नेहा का मोबाइल और सिमकार्ड भी तोड़ डाला। अब नेहा ने अपने मन को पक्का कर लिया था। वह बच्चों को लेकर पुलिस स्टेशन गई, और प्रवीण के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई। पुलिस ने जांच की, और नेहा का मेडिकल भी किया गया। इसके आधार पर पुलिस ने प्रवीण को चेतावनी दी और नेहा और बच्चों से अलग रहने की सख्त हिदायत दी। इसके बाद से नेहा खुश है।

कुछ दूर वहां रोशनी दिख रही है

ऊपर के उदाहरण हो सकता है कि हमारे ऊपर लागू न होते हों, और शायद हमें किसी कठोर निर्णय को लेने की जरूरत अपने जीवन में न हो। फिर भी हमें अपनी ताकत कई प्रकार से आगे बढ़ाने की जरूरत हो सकती है। हो सकता है कि हमें अपने व्यक्तित्व को संवारने की जरूरत हो या बोलचाल का लहजा बदलने की जरूरत हो। हो सकता है कि हमें लोगों से अपने संबंध सुधारने की जरूरत हो। हो सकता है कि हमें अपनी शैक्षिक योग्यता बढ़ाने की जरूरत हो। हो सकता है कि हमें अपनी मासिक आय बढ़ाने की जरूरत हो। हो सकता है कि हमें अपने गुस्से पर काबू पाने की जरूरत हो। इस प्रकार की अनेक प्रकार की हमारी जरूरतें हो सकती हैं।

इस मार्गदर्शिका के तीसरे चरण में, सफलता की सीढ़ियां चढ़ने, विफलताओं को पार करने, और अपना सर्वांगीण विकास करने की बात की गई है। हम कुछ देर के लिए शांतिपूर्वक बैठें और अपनी जरूरतों को समझने की कोशिश करें। जरूरत होने पर अपना रास्ता बदलें। हम अपने जीवन में सुख और सफलता का एक अद्भुत मिश्रण पैदा कर सकते हैं।

अगर इतना सब भी हमारे लिए काफी नहीं है। और आज अगर हम शांति और स्थिरता को पाने और उसे आगे ले जाने में पूरी तरह से सफल महसूस नहीं भी कर रहे हैं। हमें आज उदासी और निराशा लगती है, और आज हमारा मन विचलित भी रहता है। तब भी कुछ और प्रयत्न करें और करते रहें। बहुआयामी परिवर्तन अपनाने के बाद, समय अधिक भी लग सकता है, लेकिन हमें स्थिरता पाने और उसे आगे ले जाने में सफलता अवश्य मिलेगी।





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